शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (46) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (46)

              शहद की गुड़िया - प्रकरण 46

       " जरीवाला बड़ा हरामी आदमी था.. ऊस की नजर बहुत ख़राब थी.

       " स्नेहा दादू के साथ काम करती थी.. ऊस बात से उसे बहुत जलन होती थी. वह स्नेहा को पटाने की हर कोशिश करता था, लेकिन दादू की वजह से ऊस के सारे इरादे, मनसूबे विफल हो गये थे. इस लिये वह दादू को घृणा की नजरो से देखता था, जिस की उन्हें कोई चिंता, परवाह नहीं थी. "

        " स्नेहा दादू के लिये याद नहीं बल्कि एक एहसास थी ऊस ने दादू को सिखाया था प्यार में हार जीत कोई मायना नहीं रखती. सब कुछ हारकर भी कैसे जीता जा सकता हैं!"

         " जरीवाला के लिये वह एक मामूली धंधेवाली थी लेकिन दादू के लिये वह बहुत कुछ थी बेटी, बहु दोस्त और ना जाने क़्या क़्या? "

         " स्नेहा घर में ओफिस में हर वक़्त दादू के साथ रहती थी. उसे नीला का भी साथ मिला था. ऊस की जिंदगी खुशियों से भर गई थी, वह अपने ससुर को बड़े पापा को लिखने में भी सहाय करती थी देर रात तक दोनों साथ रहते थे. एक बार स्नेहा अपना आपा खो बैठी थी ओर दूसरी और दादू की भी वैसी हालत थी ओर ऊस के नतीजे के स्वरूप एक नन्हा सा आकार ऊस के पेट में पल रहा था. नीला को सब कुछ मालूम था. वह कुछ नहीं बोली थी. ऊस ने हालात को स्वीकार लिया था.. "

          " दादू अक्सर पुरानी यादों में खो जाते थे. उन्होंने प्यार के हर स्वरूप को जाना, समझा था उन्हें बहन, बेटी, मा, भाभी, साली के जरिये प्यार का भरपूर खजाना मिला था. जिस के लिये भगवान का पाड मानते थे. "

          " माधुरी एक्सपोर्ट्स में उन्होंने volunteer retirement लिया था. कंपनी  को यूनियन की रचना होने की वजह से काफ़ी नुकसान हुआ था ऊस का तोड़ निकालते हुए कंपनी ने यह स्कीम रखी थी जिस में काफ़ी लोग निकल गये थे जिस में जरीवाला भी निकल गया था."

           " ऊस के बाद दादू को छोटे मोटे जोब मिलते थे ऊस वक़्त आरती के चाचा के लडके ने उन्हें अपनी ओफिस में काम के लिये बुलाया था. "

           "ओर दादू ने ऊस का जोब कबूल किया था. "

           " साथ में उन्हें संगीता के रूप में एक संनिष्ट बेटी का उपहार मिला था, जिस ने दादू की झोली खुशियों से भर दी थी. "

           " संगीता कंप्यूटर ऑपरेटर थी. वह फ्रेश लड़की थी, पढ़ाई पूरी क़र के जोब में लगी थी. वह देखने में काफो सुंदर थी. ऊस के पिता कोमी कांड के शिकार हो गये थे. वह अपने मामा मामी के साथ रहती थी. दादू और ऊस के बीच लगाव हो गया था. वह दादू को पीता मानती थी. वह उसे म्युजिका नाम दिया था. ऊस के नाम का अंग्रेजी करण  किया था. उसे यह नाम बहुत पसंद आया था. "

          " ऊस ने दादू को कंप्यूटर का प्राथमिक ज्ञान दिया था. इस लिये वह म्युजिका के आभारी थे.."

         " दोनों का रिश्ता ओफिस में स्वीकारा था लेकिन मनीषा नाम की लड़की ने उन्हें काफ़ी प्रोत्साहित किया था दोनों की मदद की थी. "

         " म्यूजिका दादू को बहुत प्यार करती थी. छुट्टी के दिन भी दोनों फोन पर बातें करते थे आरती ओर उन की बेटी भी यह बात जानती थी. "

         " दादू ओर ऊस की उम्र में काफ़ी अंतर था फिर भी वह उन दोनों को एक ही बेंच के स्टूडेंट मानते थे.."

         " दोनों में काफ़ी आपसी समझ थी. एक दुसरो के बारे में बहुत सोचते थे. "

         " ऑफिस नई जगह शिफ्ट हो रही थी. ऊस के मुहूर्त के दिन पूजा रखी गई थी. ऊस दिन आरती थी ओफिस में आई थी. म्यूजिका ने बडे भाव से आरती के पैरों का स्पर्श किया था ओर ऊस का मन जीत लिया था. "

          " एक बार म्यूझिका ने दादू को कुछ कहां था जिस से उन्हें बहुत बुरा लगा था वह किचन में जाकर रोने लगे थे. उन्हें किसी ने इस हालत में देखा था ऊस ने जाकर रिपोर्ट दिया था. सुनकर वह तुरंत किचन में दौड़ गई थी. दादू के गालों को अपनी हथेलियों में दबोचकर माफी मांगी थी और उन के कमीज की जेब से गोली निकालकर गोली खिलाई थी. "

          " लंच समय में सब लोग साथ बैठकर खाना खाते थे ओर दादू और म्यूझिका बाजु बाजु में बैठकर खाना खाते थे. दादू रोज सुबह ओफिस आते वक़्त ऊस की मन पसंद चीज खाने को ले आते थे. "

          " ओफिस एक लड़का था जो म्यूझिका को अपनी बहन मानता था ऊस का ख्याल रखता था.. दादू उन के रिश्ते की सराहना करते थे. "

           " एक बार दादू ने भावुक होकर म्यूझिका के गालों को सहलाया था, ऊस पर ऊस ने नाराजगी व्यक्त थी और दादू ने ऊस की माफ़ी मांगी थी. "

          " एक रविवार को दादू ने ऊस के साथ बात थी ऊस वक़्त घर में मौजूद थे. फिर भी ऊस ने खुलकर दादू से बात की थी. "

          " दूसरे दिन ओफिस पहुंचते ही ऊस ने दादू को खुशी खबर सुनाई थी. "

            " पापा! आप की प्रार्थना रंग लाई. कल ज़ब आप ने मुझे फोन किया था तब एक लड़का अपने परिवार मुझे देखने आये थे. सब ने मुझे एक नजर में पसंद कर लिया और अगले रविवार को मेरी मग्नि भी तय हो गई थी. "

           " सुनकर दादू बहुत खुश हए थे. उन्होंने नियमानुसार अपनी बेटी के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था. "

           " म्यूझिका दादू और सारे परिवार को शादी के लिये आमंत्रित किया था, लेकिन उन की बीवी सगाई में शामिल नहीं हो पाई थी. ऊस का म्यूझिका को बहुत अफ़सोस हुआ था. "

                     00000000000    (क्रमशः)