धधक (भाग-5) नादान लेखिका द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

धधक (भाग-5)

ज़ोया ने कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी काम से। वो अपना सारा वक़्त जिया को देना चाहती थी। वो थोड़ी सेटिटूड हो जाये ताकि। ज़ोया उसे घुमाने-फिराने लेकर गयी, बाहर खाना खिलाया, शॉपिंग कराई। चार-पांच दिन बड़ी जल्दी बीत गए।
इस बीच अमान का फोन मात्र एक दो बार ही आया था। ज़ोया को थोड़ा अजीब लग रहा था। एक रात फुर्सत होकर उसने अमान को कॉल किया,"कहाँ बिजी चल रहे हो?बात करने तक कि फुर्सत नही है??"

"बस काम मे व्यस्त था यार। फिर मुझे लगा, तुम्हे समय देना चाहिए, ताकि जिया के साथ वक़्त बिता सको। तुम बहनों के बीच मे मैं क्या करूंगा कबाब में हड्डी की तरह।"
अमान ने सफाई दी। ज़ोया खामोश हो गयी। उसे कुछ खटक रहा था। उसने कहा,"मैं मिलना चाहती हूँ तुमसे??"

अमान चुप्प हल गया एकदम से। कुछ पल बाद उसने कहा,"ठीक है। ऑफिस से निकलते समय घर के बाहर मिल जाऊंगा। तुम बाहर ही रहना।"

"नही। तुम्हे उल्टा पड़ेगा इधर। तुम बताओ कहाँ हो, मैं वहीं आती हूँ।" ज़ोयाने कहा। अमान पहले तो नही माना , लेकिन ज़ोया की ज़िद के आगे झुकना ही पड़ा। उसने पूछा,"तुम दोनो बहने इतनी रात को क्यों रिस्क ले रही हो?"

"जिया तो सो चुकी है। बस में आ रही हूँ।" ज़ोया ने जैसे ही कहा, अमान ने जैसे ही चुना, उसने राहत की सांस ली। पता नही क्यों, वो जिया से दूर ही रहना चाहता था। बड़ी मुश्किल से उसने खुद को संभाला था। इसलिए ही वो इतने दिनो से ज़ोया से भी दूर भाग रहा था। वही जिया तो ये सब एक सपना समझकर भूल चुकी थी।

अमान ने कहा,"एक काम करो। तुम वही रुको। मैं निकल लिया हूँ यहां से। तुम्हे तुम्हारे घर के बाहर ही मिलता हूँ और मुझे कुछ नही सुनना। बस एक पैशनेट वाला किस चाहिए.. उसके लिए खुद को तैयार रखना।"

ज़ोया के गाल शर्म से लाल हो गए। कुछ ही मिनट बाद अमान ज़ोया के घर के बाहर था। उसने ज़ोया को बुलाने के लिए बाइक का हॉर्न बजाया। ज़ोया झट से घर से बाहर आ गयी। लेकिन हॉर्न की आवाज़ सुनकर जिया की नींद टूट गयी।
ज़ोया के बाहर आते ही अमान ने उसकी कमर में हाथ डाल उसे अपने करीब खींचा और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिए। एक लंबा सा डीप किस। अमान बाइक की सीट पर बैठा और ज़ोया उसके सामने आकर खड़ी हो गयी। उसने अमान के चेहरे को अपने दोनो हाथों के बीच लेकर थोड़ा ऊपर किया और उसे किस करने लगी। दोनो एकदूसरे में डूबते चले जा रहे थे। अमान की आंखे ज़रा सी खुली तो उसकी नज़र ऊपर ज़ोया के रूम पर गयी....जहां पर्दा लहरा रहा था। उसे लगा, जैसे कोई वहां से उसे देख रहा था। उसने आंखों झटकी ओर फिर से ज़ोया पर ध्यान लगा दिया।

"ज़ोयाsss... बाहर है क्या?" जिया ने नीचे आते हुए कहा। ज़ोया और अमान दोनो एकदूसरे से थोड़ी दूरी पर खड़े हो गए। ज़ोया ने आवाज़ लगाई,"हाँ। आजा यही।"

जिया बाहर ही चली आई। अमान ने उसे देखकर नज़रंदाज़ कर दिया। जिया ने मुंह बनाया और ज़ोया से बोली,"मुझे रात को चेहरे पर ग्लिसरीन लगाना था। मैं भूल गयी। कहाँ रखा है बता दो, मैं लगा लुंगी।"

"ग्लिसरीन तो शायद फ्रिज में पड़ा है। तू रुक यहीं। मैं लाकर देती हूँ।" ज़ोया ने कहा और जिया के लिए ग्लिसरीन लेनें चली गयी।
अमान उस इंसीडेंट के बाद आज मिला था जिया से अकेले में। उसने माफी मांगी,"एम सॉरी, उस रोज़ जो हुआ... वो बस एक गलतफहमी।"

"स्टॉप इट। मैं बड़ी मुश्किल से वो सब भूली हूँ। फिर से याद दिलाने की जरूरत नही है। जो हो गया सो हो गया.... लेकिन आइंदा से मेरी बहन के प्रति ज़िम्मेदार रहना। वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा।" जिया उसे धमकी देते हुए बोली। अमान को बिल्कुल अनुमान नही था जिया इतना नॉर्मली रियेक्ट करेगी। उसे लगा, शायद पश्चिमी देशों में ये बेहद ही आम बात है।"

ज़ोया ग्लिसरीन लेकर बाहर आई, जिया ने एक बार फिर अमान को चेताया,"मेरी बात याद रखियेगा अच्छे से।'

"कौन सी बात?" जिया के तीखे तेवर देख ज़ोया ने हैरानी से पूछा।

जिया उसके कंधे पकड़कर,"कुछ नही दी। बस होने वाले जीजाजी को वॉर्न कर रही थी.... मेरी बहन के प्रति जिम्मेदार रहने के लिए।"

ज़ोया मुस्कुरा उठी। जिया वापस अपने कमरे में चली गयी। ज़ोया ने पूछा,"तो... कब करें शादी??"

"शादी तो करनी ही है ज़ोया। लेकिन उसके पहले एक समस्या है।" अमान ने कहा।

"कैसी समस्या?" ज़ोया ने पूछा।

"तुम मेरे साथ रहोगी मेरे छोटे से घर मे??" अमान ने प्रश्न किया।

ज़ोया सोच में पड़ गयी। ये वाकई में गम्भीर प्रश्न था। वो अपने इस घर को नही छोड़ सकती थी। और अब तो जिया भी लौट आई थी, ऐसे में उसे भी अकेले नही छोड़ा जा सकता। उसने अमान के चेहरे को पकड़कर कहा,"क्या हम दोनो इस घर मे नही रह सकते??"

"बिल्कुल रह सकते हैं।" अमान ने एकदम सादगी से जवाब दिया। जो ज़ोया की उम्मीद के बिल्कुल विपरीत था। अमान ने कहा,"मैं एक अनाथ हूँ ज़ोया। जो इतने सालों तक अनाथालय में पला बढ़ा। उसके बाद एक किराए के कमरे में रह रहा है। मुझे भी कोई स्थायी ठिकाना बनाना ही था। तुम मेरे साथ रहो या मैं तुम्हारे साथ क्या फर्क पड़ता है। बस दोनो का साथ होना जरूरी है।" अमान ने बड़े ही सरल शब्दो मे अपनी बात रखी। उसकी इसी सादगी पर तो ज़ोया मर मिटी थी।

कुछ दिनो बाद एक बेहद ही सादे समारोह में ज़ोया और अमान ने शादी कर ली। बहुत ही कम और बहुत ही खास लोग शामिल हुए थे उस शादी में।



क्रमशः
आपकी नादान लेखिका
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Indu Talati

Indu Talati 2 महीना पहले

Nathabhai Fadadu

Nathabhai Fadadu 2 महीना पहले

Ina Shah

Ina Shah 3 महीना पहले