इश्क़ आख़िरी - 22 Harshali द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

इश्क़ आख़िरी - 22

वैसे अब तो टाइम भी हो चुका है , और डिनर करने के बाद ना तुम्हे नींद भी आयेगी तो कार में सो जाना थोड़ी देर , घर जाने में थोड़ा टाइम तो लगेगा ही ", आकाश ने अमृता से कहा । अमृता ने भी झट से हां कर दी ।




डिनर करने के बाद आकाश और अमृता घर जाने के लिए निकल गए । आकाश ने हल्की आवाज मैं गाना शुरू किया । अमृता कार के विंडो से बाहर का नजारा देख रही थी , अमृता के वो हवा में लहराते बाल उसकी आंखो पर आ रहे थे और अमृता उन्हे अपने हाथों से पीछे करने की नाकाम कोशिश कर रही थी , आज हवाओं का अंदाज भी कुछ बदला बदला सा था । आकाश ये सब देख कर अकेले में ही मुस्कुरा रहा था । आकाश को समझ नही आ रहा था की उसके साथ हो क्या रहा है ! आकाश को लग रहा था की ये रात का सफर कभी कभी खत्म ना हो । " मुझे नींद आ रही है ", अमृता ने एक उबासी लेते हुए आकाश से कहा। " तो तुम सो जाओ , गाना सुनना है ?", आकाश ने पूछा। " हां ", अमृता ने कहा और अपनी आंखे मूंद ली ।

आकाश ने गाना शुरू किया ।

हमको मिली है आज ये , घड़ियां नसीब से ।

जी भरके देख लीजिए , हमको करीब से ।

फिर आपके नसीब में , ये बात हो ना हो ।

शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो ना हो ।

लग जा गले . . .




ये खूबसूरत सफर ऐसे ही आगे चलता रहा ।




कहा रह गए है ये दोनों , आकाश की मां राधा ने कहा। " अरे तुम क्यों चिंता कर रही हो , आकाश क्या अभी छोटा बच्चा थोड़ी है जो गुम जाएगा , और अमृता की चिंता तो मत ही कर , आकाश के साथ गई है ना ", गोविंद ने अपनी पत्नी राधा से कहा । " हां फिर भाई का फोन स्विच ऑफ क्यों है ? वो तो कभी भी ऐसे फोन बंद नहीं रखते ", मानव ने कहा । " अरे उसके फोन की बैटरी खत्म हो गई होगी इसलिए फोन नही उठा रहा होगा ", दादा जी ने कहा । " लेकिन भाई हमेशा पावर बैंक अपने साथ रखते है ", मानव ने फिर से चिंता जताते हुए दादा जी से कहा।

" अरे राधा , अमृता को कॉल लगाके देखो", दादी जी ने कहा ।

" मां सोनाली ने उसको भी कॉल लगाया था लेकिन उसका फोन भी स्विच ऑफ है ", राधा ने कहा ।

" हां दादी , हम एक काम करते है , मानव और मैं उनको ढूंढने के लिए जाते है ", सोनाली ने सबसे कहा । " हां , दीदी चलो अब हम और ऐसेही नहीं बैठ सकते , आप आइए मैं गाड़ी निकालता हूं , बोलकर मानव बाहर चला जाता है ।

" बेटा जैसे ही कुछ भी पता चले ना , हमे इनफॉर्म करना ओके ? ", राधा ने चिंता जताते हुए कहा। हम्म , डोंट वरी बोल कर सोनाली भी वहा से चली गई । " तुम बेकार मैं इतनी चिंता कर रही हो राधा , अरे आकाश अमृता को बनारस घुमाने ले कर गया है तो थोड़ा टाइम भी तो लगेगा ना , और उसने बताया भी था ना की लेट होगा और डिनर भी हम बाहर ही करेंगे ", गोविंद ने कहा। " आप नहीं समझेंगे एक मां के दिल को ", राधा ने जवाब दिया।




आकाश ने अपनी कार घर से कुछ दूरी बनाकार रोक दी । और सोई हुई अमृता की और एक टक देखने लगा ।




"अरे मानव मानव रोको कार रोको , देखो वो आकाश की कार है ना ", सोनाली ने आकाश की कार की और इशारा करते हुए कहा । "हां , वो तो भाई की ही कार है लेकिन वो उन्होंने ऐसे क्यों घर से दूर रोकी है ", मानव ने सवाल करते हुए कहा। " मुझे क्या पता , चल थोड़ी से जासूसी करते है , देखते है की क्या कर रहा है वो , हमे भी तो पता चले की कार घर से दूर क्यों रोकी है ", सोनाली ने मानव से कहा । मानव और सोनाली कार से नीचे उतर गए और आकाश की कार की और चलने लगे ।




"सोते हुए कितनी क्यूट दिखती है , बिलकुल एक छोटी सी बच्ची की तरह , जब भी तुम्हे देखता हूं ना एक अजीब सा सुकून मिलता है दिल को , तुम्हारी इन जुल्फों में उलझना अच्छा लगता है , तुम्हारी बाते सुनना अच्छा लगता है , तुम्हारी हर बात मानना अच्छा लगता है , तुम्हारा मुझ पर हक़ जताना अच्छा लगता है , तुम्हारी फिक्र करना मुझे अच्छा लगता है , पता नही ये सब क्या है क्यों है ! लेकिन ये सब इसके पहले मैंने कभी भी फील नहीं किया है ", आकाश ने अपने मन मैं ही कहा । और अमृता की और बड़े प्यार से देखने लगा ।




" ये क्या कर रहे है भाई , अमृता की और बस देखे जा रहे है वो भी बिना हले डुले ", मानव ने सोनाली से कहा और अपने ही माथे पर हाथ मार लिया । " चल अब , आगे जाते है और सामने से हम ही पूछते है उसे ", सोनाली ने आगे बढ़ते हुए कहा ।




सोनाली ने आकाश की कार की विंडो पर नॉक किया , जैसे ही आकाश ने शीशा नीचे किया , सोनाली ने कहा " तुम कर क्या रहे थे इतनी देर यहां , और कार यहां क्यों रोकी है ? तुम्हारा फोन भी बंद है , पता है घर पर मां कितनी चिंता कर रही है तुम दोनों की ", सोनाली ने आकाश से धीमी आवाज मैं कहा ।




फिर मानव ने भी बोलना शुरू किया । " क्या भाई , वहा मां आपकी चिंता कर रही है और आप यहा अपनी ही दुनिया में मस्त है ", मानव ने थोड़ी तेज़ आवाज में आकाश से पूछा । " अरे पागल धीरे बोल , अमृता सो रही है ना , जगाएगा क्या अब उसे !", में सब बताता हु घर जाकर ", आकाश ने मानव को डाट लगाते हुए कहा । "भाई ,अमृता को कभी ना कभी जगाना तो पड़ेगा ही ना , या फिर उसको फिर से गोद में उठा कर उसके रूम में सुलाने का इरादा है आपका ? ", मानव ने कहा । "अगर ऐसा है तो ठीक है , टेक योर टाइम हम जाए घर ? ", सोनाली और मानव ने आकाश को छेड़ते हुए कहा ।

"हुआ आपका मजाक करके , दीदी आप भी ? ? , तुम दोनों जाओ घर , में अमृता को उठाता हूं ", आकाश ने सोनाली और मानव से कहा ।

" हम क्यों जाए भला ? हम चारों साथ मैं ही जायेंगे , चलिए अब जगाइए ना अमृता को , हमे भी देखना है की आप कैसे जगाते हो हमारी दोस्त को ", मानव ने कहा ।

"एक मिनिट हमारी दोस्त का क्या मतलब है ? वो मेरी कुछ नही लगती क्या ? , आकाश ने सवाल करते हुए कहा । " हमे क्या पता आपके लिए वो दोस्त है या फिर उससे कुछ ज्यादा ", मानव ने बहुत धीमी आवाज मैं कहा जिस के कारण ये सब आकाश को ठीक से सुनाई नहीं दिया । " लिव ईट , तुम दोनों आ जाना तुम्हारा जब मन करे , में जा रहा हूं ", ये बोलकर आकाश ने कार स्टार्ट की और वहा से आगे चला गया ।




" ये हो क्या रहा है सब ?", सोनाली ने कहा । " हुआ नही है , लेकिन अब हो रहा है धीरे धीरे ", मानव ने सोनाली से कहा । " क्या हो रहा है ?", सोनाली ने पूछा । "भाई को प्यार हो रहा है दीदी , चलिए अब घर चलते है , सभी लोग इंतजार कर रहे होंगे हमारा ", मानव ने कहा और दोनों कार मैं बैठ गए ।



रेट व् टिपण्णी करें

Preeti G

Preeti G 3 महीना पहले

hi harshu where is next episode

Hina Patel

Hina Patel 2 महीना पहले

Rupa Soni

Rupa Soni 3 महीना पहले

Bijal Patel

Bijal Patel 2 महीना पहले

ashit mehta

ashit mehta 3 महीना पहले