तंत्र रहस्य - 28 Rahul Haldhar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

तंत्र रहस्य - 28

काम पिशाचिनी की भूख,

आज घर के आँगन में बने काली मंदिर के चौखट पर बैठकर मैं बहुत सारी बातों को सोच रहा था।
इसी मंदिर में बैठकर कुछ महीनों पहले मैंने तारापीठ जाने का निर्णय लिया था। तारापीठ जाकर थोड़ा बहुत तंत्र - मंत्र की कहानियों के लिए जानकारी लेने की सोचा था। वहाँ जाकर जानकारी के साथ - साथ मैं भी उसी तंत्र - मंत्र के क्षेत्र में लग गया। वहाँ रहस्यमय रूप से मुझे पागल बाबा मिले , जिनसे मैं दूर ही नहीं रह पाया। वो जैसा कहते गए मैं करता गया और आज मैं पूरी तरह बदल चुका हूं। 2 - 3 महीने पहले इसी मंदिर के चौखट पर बैठा मैं एक साधारण लड़का था लेकिन अब मैं खुद को साधारण कैसे कहूं। अब मैं कुछ अलौकिक व भयानक शक्तियों को महसूस कर सकता हूं। मेरे पास रक्षा मंत्र है जिसका उपयोग मैं देख चुका हूं। इसके अलावा एक पिशाचिनी मेरे वश में है। और भी ना जाने क्या कुछ है मेरे अंदर जिसके बारे में शायद मुझे पता भी ना हो। इस वक्त मेरे अंदर एक ही प्रश्न चल रहा है कि काम पिशाचिनी के बात को कैसे पूरा करूँ। उसे किसी लड़की या महिला के अंदर प्रवेश कराकर मुझे उसके साथ सम्भोग करना होगा। 21 दिन के अंदर मुझे यह करना था , काम पिशाचिनी को सिद्ध किए हुए 16 दिन बीत चुके हैं। अब केवल पांच दिन के अंदर मुझे यह करना ही होगा क्योंकि मैंने काम पिशाचिनी के इस शर्त को माना है। लेकिन किसी लड़की व महिला के सहमति के बिना उसके साथ सम्भोग करना एक अपराध ही है। इस क्रिया में उस लड़की व महिला को कुछ भी पता नहीं चलेगा क्योंकि उस वक्त उसके अंदर काम पिशाचिनी होगी। मैं ऐसा नहीं होने देना चाहता इसीलिए मैं परेशान हूं।
वैसे काम पिशाचिनी के मेरे साथ होने के कारण कुछ बातें मुझे कुछ बातें समझ आ रही थी जैसे लोग मेरे बातों पर आसानी से सहमत हो रहे हैं।
अभी परसों ही मेरे पिताजी के साथ चाय के दुकान पर कुछ लोगों ने पॉलिटिक्स की बातों पर झगड़ा कर लिया। हम बंगाली लोग सचमुच पॉलिटिक्स के बहस में एक कदम आगे होते हैं और इसी में झगड़ा भी कर लेते हैं। मैं भी वहीं पर पेपर पढ़ रहा था। मेरे पिताजी ने उन लोगों के मंत्री को बातों ही बातों में कुछ अपशब्द बोल दिया था। वो लोग उस मंत्री के कार्यकर्त्ता थे। दोनों तरफ से जबरदस्त झगड़ा मिनटों में शुरू हो गया। मैंने जाकर पिताजी व उन लोगों को केवल एक बार शांत होने को कहा और वो शांत हो गए। झगड़ा रुक गया केवल मेरे एक बार कहने से और मानो वहां पर सभी मेरे वश में थे। यह देख एक बार तो मैं भी आश्चर्य हो गया था।
लोग मेरे तरफ आकर्षित हो रहे हैं। बैंक बैलेंस अपने आप बढ़ रहा है। मेरे लेखों व किताब पर अचानक ही कई लोगों का रुझान दिखने लगा। इसी बीच मेरे अगले किताब को छापने के लिए कुछ बड़े पब्लिकेशन से मुझे कॉल भी आया। लोग मेरे किताब को अचानक ही खरीदने लगे हैं।
अब मैं काम पिशाचिनी के इच्छा को कैसे पूर्ण करूँ इसी बारे में सोच रहा था। फिर मैंने देवी काली मूर्ति के चेहरे को देख उन्हें प्रणाम करते हुए , उन पर सब कुछ छोड़ दिया। गलत कार्य कुछ भी नहीं करूंगा , जो होगा देखा जाएगा।

तीन दिन बाद की बात है। रात को मैं गहरी नींद में सो रहा था। अचानक किसी के छूने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैंने आँख खोलकर देखा तो काम पिशाचिनी मेरे पास ही बेड पर बैठी हुई मुस्कुरा रही थी। इस वक्त वह उसी खूबसूरत कामुक लड़की के रूप में थी। उसका एक हाथ मेरे चेहरे पर था पर मैं किसी हाथ को अपने चेहरे पर महसूस नहीं कर पा रहा था। केवल हल्का हवा चलने जैसा महसूस हो रहा था। पिशाचिनी की कामुक आँखें व कुटिल मुस्कान का अर्थ प्यार हैं या कोई ख़तरनाक फंदा यह समझना बहुत मुश्किल है। अभी पिशाचिनी जो कर रही है यह सब वो अक्सर ही रात को करती है। इसके साथ ही बहुत सारी कामुक व प्रेम प्रसंग की बातें भी वह करती रहती है। वह अक्सर याद दिलाती है कि मैंने उसे प्रेमिका रूप में पाया है इसीलिए उससे बहुत सारा प्यार करना होगा। जैसा कि लोग अपने प्रेमिका से प्यार करते हैं।

काम पिशाचिनी मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोली,
" राघव, क्या तुम्हें याद दिलाना पड़ेगा कि मैं कौन हूं। तुमने मुझे संतुष्ट करने का वचन दिया था पर मैं नहीं हूं। मेरी भूख अलग है जो कि तुम जानते हो पर तुमने अभी तक इसे पूर्ण नहीं किया। मात्र दो दिन के अंदर मेरे भूख को शांत करना होगा। मैंने कहा था 21 दिन....। मुझे एक शरीर दो राघव और मुझसे प्यार करो। "

मैं बस चुपचाप काम पिशाचिनी के बातों को सुन रहा था।
" अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया तब ? "

यह सुनकर काम पिशाचिनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया लेकिन फिर भी वह मधुर आवाज में बोली ,
" तुमने मुझसे पहले ही इस बारे में कह दिया है कि तुम मेरे इस भूख को पूर्ण करोगे इसलिए अब तुम अपने बात से पीछे नहीं हट सकते। तुम्हें करना ही होगा। "

इसके बाद मैंने कुछ भी नहीं बोला। मैंने अपने आँख को बंद कर लिया क्योंकि मैंने सोच लिया था कि आगे मुझे क्या करना है। मुझे अपने चेहरे व गले पर हवा महसूस होता रहा।..

अगले दिन सुबह ही मैंने कोलकाता जाने के लिए सियालदह लोकल ट्रेन पकड़ लिया। मैं कोलकाता काम पिशाचिनी के कार्य को पूरा करने ही जा रहा
था।
मेरे एक रिश्तेदार चाचा कोलकाता में रहते हैं। उनके लड़के के साथ मेरी अच्छी खासी दोस्ती है। वह मेरे भाई जैसा ही था। मैंने उससे बात करके किसी वेश्या लड़की से मिलने की बात कही। पहले तो वो यह सुनकर आश्चर्य में पड़ गया कि मैं लेखन छोड़कर ये सब क्या बन गया हूं लेकिन मैंने उसे समझाया कि बहुत जरूरी है। उसने मेरा बहुत मजाक उड़ाया, अब दोस्त तो मजाक उड़ाएगा ही। इसके बाद उसने बताया कि आजकल तो सिटी में कॉल गर्ल ही वो सब करने के लिए मिल जाती हैं। वो लड़कियां पैसा लेकर पूरी रात साथ में रहती हैं। उन्हें अपने ही होटल या रूम में बुला सकते हैं।
उसने एक कॉल गर्ल को मेरे लिए बुला भी लिया है । वह लड़की एक रात के लिए मेरे साथ होटल रूम में रहेगी , इसलिए मैं कोलकाता जा रहा हूं। हालांकि मुझे यह करने का कोई मन नहीं लेकिन मेरे पास कोई रास्ता नहीं है। मैं किसी सामान्य लड़की या महिला के साथ यह नहीं कर सकता था। एक तरह से यह भी गलत ही था पर जिंदगी में आप हमेशा अच्छे नहीं हो सकते पर जितना हो सके खुद को अच्छे के तरफ ही रखना चाहिए। मैं इतना ही अच्छा बन सकता था। ...

सुबह लगभग दस बजे मैं सियालदह स्टेशन पहुंच गया फिर वहां से बस लेकर चाचा के घर पहुंच गया। मेरे उस दोस्त का नाम प्रतीक था। वहाँ पहुंचते ही प्रतीक ने बताया कि सबकुछ सेट है। प्रतीक ने होटल भी देख लिया था। वह लड़की रात को 10 बजे आने वाली थी। प्रतीक मेरा मजाक उड़ा रहा था कि मुझे अब एक गर्लफ्रेंड बना लेना चाहिए क्योंकि कॉल गर्ल से कबतक काम चलाओगे। अब मैं उसे कैसे समझाऊं या बताऊं कि मैं क्या करने वाला हूं। वह कुछ महीने पहले के राघव को जानता है। होटल मैं रात को जाने वाला था इसलिए दिन भर मैं प्रतीक के साथ बाइक पर कोलकाता के फेमस स्थान जैसे विक्टोरिया मेमोरियल , हावड़ा ब्रिज, इडेन गार्डन, पार्क स्ट्रीट इत्यादि जगहों पर घूमता रहा। रात को प्रतीक मुझे होटल तक छोड़कर चला गया।
रात के साढ़े दस बजे वह लड़की आई। वह लड़की काफी खूबसूरत थी। दिखने में मेरे उम्र की ही थी या शायद दो - तीन साल ही बड़ी होगी। वह यह सब क्यों करती है इस बारे मैं ना ही कुछ सोचना और ना ही उससे कुछ पूछना चाहता हूं। सबकी कुछ मजबूरीयां होती हैं।
हम दोनों एक साथ होटल के कमरे में गए। हम दोनों जानते थे कि हम यहाँ क्या करने आए हैं क्योंकि मैंने उसे पूरी रात यहाँ रुकने का मुँहमाँगा पैसा दिया।
वह लड़की कुछ और ही सोच रही होगी लेकिन मैं यह सोचकर परेशान था कि काम पिशाचिनी को उसके अंदर प्रवेश कराते ही क्या होगा? कहीं इस लड़की को कुछ हो गया तो ? इसके ऊपर मैं उसपर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं कर सकता जिसके नाम में ही पिशाचिनी हो।
काम पिशाचिनी को किसी के शरीर में प्रवेश करने के लिए मुझे नाम की जरूरत व उसके चेहरे को देखना था। उस लड़की का चेहरा तो देख ही लिया था तथा लड़की का नाम भी मैंने पूछ लिया था।
अब मुझे काम पिशाचिनी को उस लड़की में प्रवेश कराने के लिए कुछ देर एक सुनसान जगह की जरूरत थी। मैं यह क्रिया उस लड़की के सामने नहीं कर सकता था इसीलिए उसे कुछ देर कमरे में अकेले प्रतीक्षा करने के लिए कहकर मैं बाहर आ गया। कमरे से बाहर आकर मैं होटल के छत की ओर गया। वहां एक खाली स्थान था। उसी जगह बैठकर मंत्र पढ़ते हुए मैने काम पिशाचिनी का आह्वान किया। कुछ ही देर में एक काले धुएँ के रूप में काम पिशाचिनी मेरे सामने आ गई। मैंने लड़की का चेहरा अपने मन में उकेरा और काम पिशाचिनी को उस लड़की का नाम बताकर उसके शरीर को ग्रहण करने को कहा। काम पिशाचिनी के हंसी की आवाज मेरे कानों में आई। कुछ ही पल में काला धुंआ गायब हो गया। काम पिशाचिनी आज रात के लिए अपने को एक शरीर देने चली गई। एक लड़की की शरीर अर्थात मेरे साथ मिलन का दिन , काम पिशाचिनी यही तो चाहती थी। ....

क्रमशः.....


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Indu Beniwal

Indu Beniwal 2 महीना पहले

Hema Patel

Hema Patel 2 महीना पहले

Minaz Shaikh

Minaz Shaikh 3 महीना पहले

Suraj Kumar

Suraj Kumar 4 महीना पहले

Suresh Makwvana

Suresh Makwvana 4 महीना पहले