तंत्र रहस्य - 27 Rahul Haldhar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

तंत्र रहस्य - 27

श्यामा बाबा ,

अगले दिन दोपहर के वक्त आशीष का फोन आया कि श्यामा बाबा आए हैं। मैंने उससे कहा था कि ज़ब बाबा आए तो मुझे बताया।
उसका फोन आते ही मैं आशीष के घर पहुंच गया।
श्यामा बाबा उस वक्त नीतू दीदी के कमरे में बैठे हुए थे। उनका उम्र काफी ज्यादा था। बाल व दाढ़ी सफ़ेद , शरीर पर लाल वस्त्र , गले में पत्थरों के नरमुंडी की माला। शरीर बूढा था लेकिन उनके चेहरे व आँखों का तेज देख मैं आश्चर्य हो गया। पागल बाबा ने मुझे दिव्य लोगों को कैसे पहचानने , इस बारे में काफी कुछ बताया था। तंत्र की दुनिया में लोगों को पहचाहना बहुत जरूरी है।
श्यामा बाबा को देखकर मैं खूद को रोक नहीं पाया। मैंने जाकर उनके पैर को छूकर आशीर्वाद लिया। श्यामा बाबा मेरे चेहरे की ओर कुछ देर देखते रहे और फिर अपने यहाँ आने के उद्देश्य में लग गए।
श्यामा बाबा ने वचन दिया कि नीतू दीदी को ठीक किए बिना वो यहाँ से नहीं जायेंगे। हालांकि नीतू दीदी को क्या हुआ है व उसके अंदर एक भयानक क्रोधित आत्मा का वास है , इस बारे में श्यामा बाबा ने आशीष के घर वालों से अभी तक कुछ भी नहीं बताया था।
कुछ भी कहो लेकिन आशीष के घर साधु - संतों का आदर सत्कार बहुत ही बढ़िया होता है। इस जमींदारी परिवार की यह एक पुरानी परम्परा है।
श्यामा बाबा भी इस आदर सत्कार से खुश थे।
आज रात को को श्यामा बाबा एक यज्ञ करने वाले थे। उसी यज्ञ का समान लाने मैं और आशीष बाजार गए।
बाजार से लौटकर मैंने देखा श्यामा बाबा खुद से ही आँगन के बीच में मिट्टी खोदकर यज्ञ कुंड बना रहे थे।
मैंने यज्ञ का सामान उनके पास रखते हुए पूछा ,

" बाबा जी आपकी कुछ मदद करूँ ? "

श्यामा बाबा मेरी ओर देखकर मुस्कुराए और फिर बोले ,
" नहीं बेटा , यह कार्य मुझे खुद से ही करना होगा।
तो तुमने ही कल रक्षा मंत्र का प्रयोग किया था ? "

यह सुन मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ कि श्यामा बाबा जान कैसे गए? अब ज़ब उन्हें पता चल ही गया इसीलिए मैंने भी उनसे कुछ नहीं छुपाया।
" हाँ बाबा मैंने बस ऐसे ही पढ़ दिया था। क्या इससे दीदी को कुछ फायदा हुआ? "

" नहीं बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन कल रात को नीतू पर वह आत्मा उतना ज्यादा हावी नहीं हो सका। उस मंत्र का प्रयोग कर अच्छा किया। इससे भी ज्यादा कर सकते थे तब मुझे यहाँ आने की जरूरत ही नहीं होती ।"

" बाबा जी इससे ज्यादा तो मुझे कुछ पता ही नहीं। "

मैंने सोचा कि अब श्यामा बाबा मुझसे सब कुछ पूछेंगे कि मुझे यह मंत्र कहां से मिला व मैं मंत्र का उपयोग कैसे जानता हूं लेकिन उन्होंने कुछ नहीं पूछा। केवल मुस्कुराकर फिर से अपने कार्य में जुट गए। मैंने भी बाबा से और कुछ नहीं पूछा , क्या पता उन्हें मेरे बारे में सबकुछ जान गए हो?

रात को लगभग 9 बजे श्यामा बाबा ने यज्ञ शुरू किया। उन्होंने नीतू दीदी को एक कमरे में अकेला ही बंद कर बाहर से ताला लगा दिया था। आशीष के घरवालों से बाबा जी ने पहले ही बता दिया कि नीतू दीदी कितना भी रोए, चिल्लाए व दरवाजे को खटखटाये कोई भी कमरे में नहीं जायेगा।
यज्ञ शुरू होने के बाद उन्होंने जब मंत्र पढना शुरू किया तब उन मन्त्रों को सुनकर ऐसा लगा कि शायद वो किसी देवी के मंत्र हैं लेकिन किस देवी के यह मुझे नहीं पता।
लगभग आधे घंटे बाद यज्ञ के बीच में अंदर से नीतू दीदी के चिल्लाने व गाली देने की आवाज आई।
सभी बहुत परेशान हुए लेकिन श्यामा बाबा के कहे अनुसार ही किसी ने दरवाजा नहीं खोला।
लगभग 1 घंटे तक इधर यज्ञ और उधर नीतू दीदी के रोने व चिल्लाने की आवाज आती रही। इसके बाद ज़ब श्यामा बाबा ने यज्ञ समाप्त किया तब उन्होंने कहा कि अब नीतू दीदी के पास जा सकते हैं।
आशीष के साथ मैं भी नीतू दीदी को देखने कमरे में गया। दीदी ने बहुत सारी उल्टी की थी और इस वक्त बेहोश फर्श पर गिरी हुई थी। आशीष के घरवाले दीदी को उठाकर बेड पर ले गए और उसका देखभाल करने लगे। अब मुझे दीदी को देखकर लगा कि उनके अंदर से शायद उस आत्मा का प्रवाह खत्म हो चुका है क्योंकि मैं उस वक्त दीदी के शरीर में कोई भी नकारात्मक शक्ति को महसूस नहीं कर पा रहा था।
इसके बाद घर के आदमियों से श्यामा बाबा ने कहा कि दीदी अब ठीक है लेकिन उन्हें अभी एक काम और करना है। वो काम उन्हें आशीष के खंडहर वाले बंगले पर जाकर करना था।
लगभग आधी रात को मैं , आशीष , आशीष के पिताजी व चाचा और श्यामा बाबा कार से जंगल के पास वाले उनके खंडहर हो चुके टूटे - फूटे बंगले पर पहुँचे।
बंगले को चारों तरफ से देखकर श्यामा बाबा ने एक स्थान पर लकड़ियों को इक्क्ठा करके आशीष को आग जलाने को कहा। आशीष और मैंने पास ही जंगल से कुछ लकड़ियाँ तोड़ कर बाबा के बताए जगह पर इक्क्ठा किया। इसके बाद आशीष ने आग लगा दिया। अब पागल बाबा जिस मंत्र का जाप कर रहे थे वो शायद आत्मा वश में करने का मंत्र था। यहाँ मैं नकारात्मक शक्ति को साफ - साफ महसूस कर सकता था।
श्यामा बाबा मंत्र पढ़ते रहे। ज़ब सारी लकड़ियाँ जलकर राख हो गई तब पागल बाबा ने आसमान की ओर देखकर एक मंत्र पढ़ा।
कुछ देर बाद पागल बाबा ने कहा कि अब सबकुछ ठीक है। इसके बाद हम आशीष के घर लौट आए। घर आकर बैठक में आशीष के पिताजी ने दीदी के साथ क्या हुआ था व श्यामा बाबा यहाँ उनके खंडहर बंगले पर क्यों गए , इस बारे में जानना चाहा लेकिन श्यामा बाबा ने बताने से मना कर दिया और कहा,
" कुछ बातों को ना जानना ही अच्छा होता है। उस जगह को साफ करवाकर एक मंदिर का निर्माण करो। मंदिर के निर्माण के पश्चात नवद्वीप आना। मैं एक देवी पीताम्बरी की मूर्ति दूंगा। उसे ही इस मंदिर में प्रतिष्ठित करना। देवी पीताम्बरी को मंदिर में प्रतिष्ठित करने के बाद प्रतिदिन उनकी पूजा तुम्हारे आने वाले हर वंश को करना होगा। मंदिर बनने के बाद देवी की पूजा सर्वप्रथम नीतू बेटी को ही करना होगा। वंश में अगर फिर कोई लड़की पैदा हुई तो वह लड़की ज़ब 18 साल की होगी तब उसे एक सप्ताह लगातार देवी पीताम्बरी की पूजा करके आशीर्वाद लेना होगा। पूजा की विधि मैं मंदिर बनने के बाद मूर्ति देते वक्त बता दूंगा। "

आशीष बोला,
" बाबा देवी पीताम्बरी , यह नाम पहली बार सुना है। "

श्यामा बाबा बोले ,
" देवी पीताम्बरी भी देवी महामाया काली की ही एक रूप हैं। शत्रु व भयानक शक्ति का दमन करने वाली देवी का नाम देवी बगलामुखी भी है। "

इसके बाद मैं रात को अपने घर चला आया। श्यामा बाबा आज रात आशीष के घर रुकेंगे।
अगली सुबह ज़ब मैं आशीष के घर पहुंचा तब श्यामा बाबा को नवद्वीप छोड़ने आशीष के पिताजी जाने वाले थे। नीतू दीदी को सुबह ही होश आ चुका था। अब दीदी सामान्य थी। आशीष के घरवाले श्यामा बाबा के लिए दोपहर को बढ़िया कुछ जमींदार घर का राजसी भोज बनाना चाहते थे लेकिन श्यामा बाबा ने मना कर दिया। बाबा सुबह ही जाना चाहते थे।
श्यामा बाबा के जाने से पहले आशीष के घर की सभी महिलाओं ने उनका आशीर्वाद लिया।
जाने से पहले श्यामा बाबा मेरे पास आए मैंने भी उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने कहा,
" मैं तुम्हारे गुरुदेव के बारे में कुछ भी जान नहीं पाया पर उनका दिव्य आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ ही रहता है। उन्हें मेरे तरफ से प्रणाम कहना। और अगर कभी नवद्वीप गए तो मुझसे अवश्य मिलना। नवद्वीप के राधा रानी मंदिर के पुजारी से मेरा नाम पूछोगे तो तुम्हें मेरे घर का पता मिल जायेगा। "

मैंने उनसे जल्द ही मिलने की बात कही। इसके बाद चाचा जी श्यामा बाबा को लेकर चले गए।
मैंने भी मन बना लिया कि जल्द ही नवद्वीप जाऊंगा।
एक श्री राधा - कृष्ण भक्त होने के नाते नवद्वीप मेरे दिल के बहुत करीब है। जहाँ श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ। जहाँ गंगा किनारे मायापुर का ISKON मंदिर आपको श्री राधे - कृष्ण के माया से अविभूत कर देता है। जहाँ शाक्त सम्प्रदाय अपनी पूजा वैष्णव सम्प्रदाय के अनुसार करता है। शायद मेरे लिए वहां का बुलावा आ गया है ।......

क्रमशः.....

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Indu Beniwal

Indu Beniwal 1 महीना पहले

Himanshu P

Himanshu P 2 महीना पहले

Hema Patel

Hema Patel 2 महीना पहले

Minaz Shaikh

Minaz Shaikh 3 महीना पहले

SUNIL ANJARIA

SUNIL ANJARIA मातृभारती सत्यापित 3 महीना पहले