मिले जब हम तुम - 3

                               part - 3
   
          क्या मतलब देव ने कहा  करन ने कहा - " हा तो तुझे में कब से उठा रहा हु और तू है की पता नहीं क्या बहेकी - बहेकी बात कर रहा था, और पता नही क्या क्या हरकते कर रहा था, यह सुन देव ने कहा - " क्या करा मैने? तो करन हँसने लगा और कहता है यह पूछ क्या नहीं करा,

          देव ने कहा- क्या यार तू भी तुझे पता है न में पीता नहीं हूं वो तो रातभर नींद नहीं आई इसलिए सुबह उठ न सका, चल अब में जल्दी से फ्रेस हो जाता हु फिर सोपिंग के लिए जाना है,

           करन ने कहा- ठीक है तू फ्रेस हो जा में थोडीदेर नानाजी के पास बैठता हु।

            देव ने कहा- ठीक है, और फ्रेस होने चला जाता है।

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           दूसरी तरफ होसटेल के मंदिर घर से घंटी बजने की आवाज आ रही थी..... और   "जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोधपादस आप, देहु अभय वरदान "  शिवजी के दोहे से पुरा घर गुंज रहा था।( यह आद्रिती गा रही थी ) आद्रिती होस्टेल में रहती थी, आद्रिती का पुरा परिवार एक हादसे में समाप्त हो गया था, वह अपने बलबुते पर स्कोलरसिप की सहायता से अपनी पढाई करती थी। आरती को जगाते हुए

          आद्रिति ने कहा- कितना सोएगी उठ भी जा अब सुबह हो गई है फिर हमे सोपिंग के लीए भी जाना है, चल उठ जा अब, लेकिन आरती बिलकुल हिलि भी नई, आद्रिति अपने दोनों हाथ कमर पर रखके मन में ही बोलती है ये लड़की ऐसे नहीं उठेगी कुछ सोच कर आद्रिति ने पानी का जग आरति पर डाल दिया, इस से आरति एकदम गबरा जाति है और हदबदाहत से उठ बेठती है, और दोनों हाथ से अपनी आँखो को मसलते हुए कहती है की क्या यार दिती खुदतो सोती है नहीं मुझे भी नही सोने देती है ( उबासी खाते हुए )

           आद्रिती ने कहा- चल अब बाते मत बना उठजा और फ्रेस हो जा जल्दी से नई तो आज भी भूखे ही रह जाएगी, और आज सोपिंग भी तो जाना है , यह सुन आरती हदबदाहत से उठती है और बाथरूम की तरफ भागते हुए कहती है - तू नहीं होती तो मेरा क्या होता यार.... यह सुन आद्रिती मुशकुराजाती है और सर पर ठपकी मारते हुए कहते है यह लड़की कभी नहीं सुधरेगी....(  आरती आद्रिति की रुम मेट और अच्छी दोस्त भी थी)

            थोडीदेर में देव और करन दोनों सोपिंग के लिए निकल ते है। उधर आद्रिती और आरती भी सोपिंग के लिए निकलती है.....

            दोनों ही एक सोपिंग मोल में आते है जैसे आज कायनात भी उन दोनों को मिलाने की साजिश कर रही हो,  दोनों ही लिफ्ट में जाते है लेकीन दोनो ही एकदुसरे से अनजान दो अलग - अलग कौनौ में खडे हुए थे लेकिन लिफ्ट में भीड होने की वजह से वे दोनों धीरे - धीरे पास आ गए थे, इतना पास की दोनो के हाथ एकदुसरे से छू रहे थे, देव ने अभी तक आद्रिती को देखा नही था वह तो करन के साथ बातो में लगा हुआ था, लेकिन जेसे ही आद्रिती के हाथने देव के हाथ को छुआ तो उसे एक सिहरन सी हुई, देव उस और देखता है और देखता ही रहता है, जो लड़की इतने दिनो से देव को सपने में परेशान कर रही थी, मन ही मन देव आद्रिती को चाहने लगा था वह उसके इतने पास खडी थी, यह देख देव को यकीन नहीं होता है वह अपनी आँखे मसलता हुआ वापस देखता है, लेकिन वह सच में थी ये जानकर देव का दिल बहुत जोरो से धडक रहा था, इस बात से अनजान आद्रिति आरती से क्या क्या सामान लेना है उसके बारे में बात कर रही थी, देव तो बस आद्रिती में खो सा गया था उसे कोई होस ही नही रहा, इतने में लिफ्ट फोर्थ फ्लोर पर आकर रूकती है... लिफ्ट में भीड की वजह से बहार निकलते वक्त आद्रिती को किसीका धक्का लग जाता है वह जैसे ही लडखडाती है देव ने अपनी बाहो का सहारा देते हुए आद्रिती को संभाल लिया... गिरने के डर से आद्रिती ने अपनी आँखे बंद कर दी थी उसे इतना पास होने के वजह से देव का दिल जोरोसे धडकरहा रहा था मानो अभी उछल कर बहार आ जाएगा.... वह तो बस सबकुछ भुल आद्रिति के चेहरे में खो सा गया था....

             आद्रिती को महसूस हुआ की किसीने उसे थामे हुए है, वह धीरे से अपनी आँखे खोलती है और.....  और क्या दोस्तों वही हुआ जो हर बार होता है एक लडका और लडकी टकराने से होता है..... बस यहां भी वही हुआ,,, दोनों ही एकदुसरे की आँखो में खो गए...

क्रमशः

@Komal Talati

      


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Prapti Timsina

Prapti Timsina 1 दिन पहले

neelam yadav

neelam yadav 3 सप्ताह पहले

Love Music

Love Music 3 सप्ताह पहले

Priya Sharma

Priya Sharma 4 सप्ताह पहले

Manbir

Manbir 1 महीना पहले