खौफ - 2

तकरीबन 15 दिन से वह ऐसे कमरे में बंद था जो चारों तरफ से पूरी तरह पैक था! उस रूम में सामने की दीवार पर एक बड़ा एलईडी लगा हुआ था! पूरा दिन उसकी सेवा में प्रिया तैनात रहती थी! किसी उच्च दर्जे के कूक की तरह उसकी रसोई मैं विभिन्नता और अद्भुत टेस्ट था! वह तरह-तरह के फ्रूट जूस लेकर एंट्री मारती! ज्यादातर एपल टमाटर खरबूजे वीट और ऐसे रक्त कणों को बढ़ाने वाली सारी चीजे का मिश्रण लेकर वो उपस्थित हो जाती थी!
कैसे अपने साथ बचपन से पली बडी हो ऐसा प्रिया का व्यवहार था!
"पर यह सब किस लिए ? उसकी इतनी सेवा चाकरी क्यों की जा रही है? उन लोगों ने किस मकसद से उसे बंद कमरे में रखा था अभी तक समीर नहीं समझ पाया था!   समझ में ना आने वाली एक गूंच उसके मन को उलझाती जा रही थी!
उस गूंच की तह तक जाना जरूरी था! उसकी अंतरात्मा से एक ही आवाज उठ रही थी जरूर कुछ पक रहा था कुछ ऐसा जो उसकी समझ से परे था!
आज उसकी तबीयत ठीक नहीं थी और कांचा( अग्नीपथ मूवी के विलन) जैसा उसके दोनों खतरनाक भाई इस वक्त घर में मौजूद नहीं थे!
फिर भी उनका खौफ था! शरीर में काफी सुस्ती लग रही थी अशक्त होकर वो लेटा हुआ था! शायद नींद कम लेने की वजह से ये हुआ होगा! अमंगल विचारों ने उसके मन पर घेरा डाला था! उसका मन उद्विग्न हो ऐसे बेचैनी बढ़ती जा रही थी! सर चकराने लगा था अचानक अपने बदन पर किसी मुलायम स्पर्श की वजह से वो चौका!  मादक नशा जैसे उसको पिगला रहा  था! सम्मोहन कार्य आवरण से अपने आप को मुक्त करके वहां से भाग जाने की इच्छा जोर कर गई!
पर उसकी नजदीकीया पाकर प्रिया जैसे आक्रमक हो गई थी!
उसके बदन की नरमी पुष्पधनवा का रूप लेकर समीर के दिल और दिमाग पर हावी हो रही थी!

उसने समीर की अनिच्छा को वश कर लिया ! समीर विचलित हुआ! अद्भुत सौंदर्य और मुलायमता के गहरे आवरण में
उसने अपनी जात को खुला छोड़ दिया! मादक अधरअमी के गुंट भरने की लालच से उसने हरे-भरे अमिकुंभ  पर उसने अपना मुखकमल रख दिया!
अचानक..
धब्ब...! सी सीने पर आवाज आई! हड़बड़ाहट से आंखें तरेर कर उसने छिपकली को देख लिया!

और उसकी आंख खुल गई! एक पल की भी मेरे किए बगैर उसने पूरी रजाई को ऊपर से उथला दिया! उसका बदन पसीने से तर हो गया था सांसे धौंकनी की मानिंद चलने लगी! उसने तकिए को कसकर पकड़ रखा था! तकिए में भी जैसे कोई भूत हो वैसे उसको सामने दीवार पर दे मारा! खौफ खाई निगाहों से उसने कमरे की एक एक चीज पर निगाहें फेरी! खिड़कियों के पर्दे फड़फड़ा रहे थे! कैलेंडर के पन्ने भी हवा का एहसास करवा रहे थे!
इस वक्त कमरे में जीरो के लेम्प का प्रकाश मौजूद था! कुछ देर पहले प्रिया के साथ जो मंजर उसने देखे थे वह उसके मानस पटल पर इस वक्त छा गए थे!
एक बात जरूर थी स्वप्न में प्रिया के जिस रूप को देखा था वैंसा लुभावना रूप आज तलक उसने साक्षात प्रिया में नहीं देखा था!
थैंक्स गॉड कि वह एक सपना था!
प्रिया नाम की लड़की से उसकी जराभी पटती नहीं थी!
इस बंद कमरे में अब तो उसका दम घुट रहा था!
शायद यही वजह थी, उसकी लाख कोशिशों के बावजूद भी मन उसकी तरफ ढला नहीं था!
पूरा दिन प्रिया उस पर मधुमक्खी की तरह मंडराती रहती! जैसे वह कोई रसगुल्ला ना हो..!
उसकी वह निगाहें अक्सर भयभीत कर देती थी!
संभलकर वो खडा हुआ! जोरो से प्यास लगी थी! गला सूख रहा था!
वह अब बिल्कुल स्वस्थ था उस बात का आश्चर्य भी उसे बहुत हुआ!
उसने फ्रिज खोला! बर्फीली ठंडक उसके चेहरे को तरोताजा कर गई!
गर्दन झुका कर उसने फ्रीज में देखा!
बहुत सारे कोल्ड ड्रिंक्स फ्रूट्स और तरह-तरह की ब्रांड वाली शराब की बोतले मौजूद थी!
फिर उसने नीचे आखरी स्टैंड पर देखा!
उसकी आंखें आश्चर्य और भय के मिश्रित भावों से खुली की खुली रह गई!
एक बड़ा सा ग्लास खून से भरा हुआ था!
एक अंजाना खौफ उसके मन पर हावी हो गया! उसने वह प्याला उठाया एक पल के लिए लगा शायद वीट का जूस हो सकता है! अपनी उंगलीया डुबोकर चेक किया!
वह खून ही था! पर किसका? समझ में नहीं आया!
और इस खून को यहां फ्रीज में क्यों रखा गया है? अचानक किसी की आहट सुनाई दी !
प्याला भीतर रखा फ्रिज बंद कीया और वो उछल कर अपने बेड पर वापस आ गया!
पानी पीने की उसकी इच्छा अब मर चुकी थी वह टुकुर टुकुर दरवाजे को देख रहा था! उस की धड़कने तेज हो गई थी!

( ક્રમશ:)

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Bharatsinh K. Sindhav 1 सप्ताह पहले

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Bharat 3 सप्ताह पहले

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Mate Patil 3 सप्ताह पहले

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Rakesh Vartak 1 महीना पहले

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Meena Kavad 1 महीना पहले

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