पुरानी हवेली का राज - 22

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पिछले भाग की अंतिम पंक्ति से आगे . . .

चंदू और रानो सुनसान सड़क पर चले जा रहे थे। रात के अंधकार में डर तो उन्हे भी लग रहा था पर दोनो बातें करते करते चले जा रहे थे। क्योंकि डरावनी राहों पर चलते चलते बातें करने से डर कम लगता है। 

दीदी, क्या आपको लगता है ? सोनू भैया सच में हमारी मदद के लिए आएंगे। - चंदू ने कहा।

अगर गोलू की नींद खुली होगी तो वो जरूर आएंगे। वैसे भी गोलू को रात में 10 बार जागने की आदत है। और सोनू भैया कभी नही चाहेंगे कि हम दोनो मुसीबत में पड़े। - रानो ने कहा।

तो दीदी आपने उनको ही साथ ले चलने के लिए क्यों नही उठाया ? 

क्योंकि देखा जाए तो ये सब मेरी वजह से ही शुरू हुआ है। अगर उस दिन जोश में आकर मैं तुम सब को पुरानी हवेली नही लाती तो शायद ये सब कहानी कभी शुरू ही नही होती। 

हां, दीदी। पर जब तक किसी को भूत प्रेत जैसी चीजों से आमना सामना नही हो जाता है। वो मानता ही कहां है कि भूत प्रेत नाम की की कोई चीज होती है। आप और मैं यही सोच कर तो वहां गए थे।

हां, पर हम दोनो की वजह से ही ये सारी मुसीबतें शुरू हुई है। गांव में दो मौंते हो गई। बस अब उस अंगूठी की वजह आगे कोई मौत नही हो। 

हां दीदी। पर बुरा न मानो तो एक बात कहूँ ।

हां कहो।

अगर उस अंगूठी ने तीसरी बलि दे दी तो क्या होगा ?

अरे बेवकूफ। जब मुंह खोलेगा तो उल्टा ही बोलेगा। ऐसे सवाल पूछते हुए भी तुझे जरा सा भी डर नही लगता ना। 

लगता है तभी तो पूछ रहा हूं। 

उस भूत की सारी शक्तियां जाग जाएंगी जो अभी तक केवल उस पुरानी हवेली की सीमा में ही कैद है। फिर वो पूरे गांव में आकर दहशत मचाएगा। क्योंकि उसने इस गांव के लोगों को मारने की कसम खाई है। 

ओह दीदी। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। 

चिंता मत करो। हम मिलकर कुछ न कुछ कर ही लेंगे। - रानो ने कहा।

दीदी वो देखो सामने एक मंदिर का झंडा नजर आ रहा है। और वहां उजाला भी नजर आ रहा है। लगता है वही ठाकुर बाबा का स्थान है। - चंदू ने सामने देखते हुए कहा।

हां - रानो की आंखे खुशी से चमक उठी।

चंदू चलो, जल्दी। पुजारी जी और उनके गुरूजी वहीं होंगे शायद। - रानो ने दौड़ते हुए कहा।

दीदी, सामने देखो। - चंदू चिल्लाया।

रानो ने देखा। सामने पुजारी जी सड़क पर पड़े हुए थे। दोनो जल्दी से दौड़ कर वहाँ पहुंचे। 

पुजारी जी ? पुजारी जी ठीक तो है आप ? - रानो ने कहा।

दीदी, पुजारी जी। ठीक है तो है ना। कहीं पुजारी जी को भूत ने . . . 

चुप कर चंदू। जब मुंह खोलेगा। कुछ उल्टा सीधा ही बोलेगा।

रानो ने जल्दी से उनकी नाड़ी देखी। और फिर नाक के पास अंगुली रख कर देखा।

कुछ नही हुआ पुजारी जी को ? ठीक है। शायद बेहोश हो गए है। - रानो ने कहा।

पर इनके साथ ऐसा क्या हुआ ?

पता नही। ये तो इनके होश में आने के बाद ही पता चलेगा। वो पानी की बोतल दे। जो हम मंदिर से लेकर आए थे। 

हां, ये लो। - चंदू ने बोतल पकड़ाते हुए कहा। 

रानो ने उनके चेहरे पर पानी के छींटे मारे। और कहा - चंदू तू इनके पैर को घिस। पुजारी जी होश में आइए। 

कुछ ही देर में पुजारी जी की आंखे खुली। 

अपने सामने रानो को देखकर वो चौंक गए। उन्होंने देखा कि चंदू उनके पैरो को मसल रहा है। उन्होंने अपना सिर पकड़ते हुए कहा - वो . . .वो . . सब कहां है ?

वो सब कौन ? - रानो ने कहा।

और तुम दोनो, इतनी रात में यहां - उन्होने बैठते हुए कहा।

आराम से पुजारी जी - रानो ने उन्हें संभालते हुए कहा।

बच्चों तुम यहां से जाओ, तुम्हे नही पता। वो सब फिर से न आ जाए। - पुजारी ने चारो तरफ देखते हुए कहा।

पुजारी जी क्या हुआ आपके साथ ? हमें सब साफ साफ बताइए। - रानो ने कहा।

लेकिन पुजारी को शायद अब तक जो कुछ भी हुआ वो समझ नही आया था।

चंदू पंडित जी को सड़क से एक तरफ ले चलते है, चलो - रानो ने उन्हें उठाते हुए कहा।

पुजारी जी को दोनो सहारा देकर एक पेड़ के पास ले कर गए। 

रानो ने पानी की बोतल पुजारी को देते हुए कहा - लीजिए। पुजारी जी। पानी पीजिए। 

पुजारी जी ने पानी पिया और लम्बी सांसे लेते हुए कहा - तुम यहां कैसे आ गए ? मैंने आने से मना किया था ना तुम्हे ?

आप को ऐसे संकट में कैसे छोड़ कर आते पुजारी जी ? मेरा मन ही नही माना। 

हां पुजारी जी, दीदी तो घर आ कर सो गई थी। पर आपकी मदद के चक्कर में सबको सोते हुए छोड़कर आ गई। 

हे भगवान। तुम्हे बिलकुल भी डर नही लगा। - उन्होंने चंदू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

मुझे तो शुरू में तो लगा था, पर दीदी है ना। दीदी के साथ नही लगा। 

रानो तुम सच में बहुत बहादुर हो। पर इतनी रात में इस तरह जंगल में आना खतरे से खाली नही।

हां, पुजारी जी पता है तभी तो मैं आपकी मदद के लिए आई। पर आपके साथ क्या हुआ ? और आप यहां रास्ते में बेहोश कैसे ? - रानो ने कहा।

मत पूछो, वो पल याद कर के तो मेरा दिल डर से फिर कांपने लगता है। 

ऐसा भी क्या हुआ था पुजारी जी ? जो आप इतना डरे हुए हो।

तब पुजारी ने वो लम्हा याद करते हुए बताना शुरू किया। उनकी आंखे डर से चौड़ी हो गई और वो दृश्य जैसे फिर से उनकी आंखो के सामने चलने लगा। 

मैं इस रास्ते में इस जगह तक आ गया था। तभी अचानक बहुत से लकड़बग्घे शैतानी हंसी में हंसते हुए मेरी तरफ आ गए। मैंने डर के ठाकुर बाबा का नाम लिया। पर इतनी देर में एक लकड़बग्घे ने मुझे जमीन पर गिरा दिया। मैं तो डर के मारे चीख उठा। लग रहा था जैसे मेरे मृत्यु की घड़ी निकट आ गई है। मेरी सांसे जल्दी जल्दी चलने लगी। और मैं बेहोश होने लगा। पर अचानक से सब भेड़िये दूर होने लगे। मुझे लगा कि सामने से एक बहुत तेज सफेद रोशनी आई या कोई सफेद कपड़े पहने था। पर मैं कुछ देख पाता इससे पहले ही सब मैं बेहोश हो गया। 

ओह तो आपको भी ठाकुर बाबा ने बचा लिया। - रानो ने कहा।

मतलब ? - पुजारी ने अचरज रानो को देखते हुए कहा।

हमें भी आज रात ठाकुर बाबा ने रास्ता दिखाया। जब हम रास्ता भटक गए थे। उन्होंने सफेद कपड़े पहने हुए थे। - रानो ने उनसे कहा।

आगे जारी . . . 

शेष अगले भाग में . . .

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Red Devil 3 महीना पहले

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Nikita 4 महीना पहले

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Ramesh Kumar 4 महीना पहले

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KINJAL 4 महीना पहले

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Annu 4 महीना पहले