पुरानी हवेली का राज - 17

इस कहानी के अभी तक कुल 16 भाग प्रकाशित हो चुके है। अगर आपने अभी तक नही पढ़े है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर पहले उन्हे पढ़िए उसके बाद इस भाग को पढ़िए।

पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि सोनू अंगूठी ना मिलने से और उस बच्चे की जान को खतरे में देखकर ये फैसला लेता है कि वो रात में ही गांव के पुजारी के पास जाएंगे और उन्हेें सारी बात बताएंगे। तब सोनू रानो राजू और दीनू रात में छत से कूदकर पुजारी जी से मिलने के लिए चल देते है। अब आगे . . .

रात के 10.30 बज रहे थे। गांव की सड़को पर सन्नाटा पसरा था। वैसे भी गांव के लोग शहर के लोगों की तरह देर रात तक जागते नही है। चारो जल्दी से कदम बढ़ाते हुए मंदिर की तरफ चले जा रहे थे। रास्ते में एक दो लोगों ने उन्हे देखा। और इस तरह उन्हें घूमते देख शक की नजरों से उन्हें देख रहे थे। 


पर उनका ध्यान उस समय जल्दी से जल्दी मंदिर पहंुचने में लगा था। और कुछ ही देर में वो मंदिर भी पहुंच गए। पुजारी जी, मंदिर की सीढ़ियों पर बैठे-बैठे राम सियाराम सियाराज जय जय राम भजन मधुर वाणी में गा रहे थे। उन्हें सुनने वाला उस समय वहां कोई नही था पर वो आनंद में डूबे उस भजन को गा रहे थे। 


चारो के वहां पहुंचने पर उनके कदमों की आहट से उनका ध्यान भटका। उनका भजन रूक गया और आंखे खुल गई। सामने चार बच्चों को देखकर वो चौंक गए। 


रूमाल हटाने के कारण वो सोनू और दीनू को तो पहचान गए थे। पर इस समय आने पर वे बहुत ज्यादा चिंतित हो गए। 


तुम सब यहां इस समय ? सब ठीक तो है ना - पुजारी ने कहा।


नही, पुजारी जी। कुछ ठीक नही है। - सोनू ने कहा।


क्यों, क्या हुआ ? - पुजारी ने खड़े होते हुए कहा।


वह हो गया जो नही होना चाहिए था - रानो ने कहा।


पहेलियों में बात मत करो। जो भी बात है साफ साफ कहो। - पुजारी ने कहा।


तब रानो और सोनू ने उन्हें अंगूठी मिलने के बाद से आज शाम तक जो कुछ भी हुआ सब विस्तार से बताया। पूरी बात सुनने के बाद पुजारी ने कहा - तुम सब ने उस अंगूठी को पुरानी हवेली से बाहर लाकर बहुत बड़ा अनर्थ कर दिया है। इतने सालों में शायद ही कोई उस हवेली की सीमा में भी गया हो। और तुम वहां से अंगूठी उठाकर ले आए। वो पुरानी हवेली तंत्र - मंत्र और न जाने कितने लोगों की अकाल मृत्यु, नरबलि की साक्षी रही है। 
जो अंगूठी तुम उठाकर लाए हो, वो कहीं साल पहले उस अंग्रेज के द्वारा सम्मोहन के लिए प्रयोंग की जाती थी। और शायद उस दिन के बाद से उस अंगूठी के माध्यम से वो अब इस दुनिया में वापस आने वाला है। 


पर पुजारी जी वो दोनो तो मर चुके है, फिर वापस कैसे लौट आएंगे ? - रानो ने पूछा।


वो दोनो भले ही सांसारिक दुनिया से और शरीर के बंधनो से मुक्त हो गए हो, पर व्यक्ति की मृत्यु के बाद सभी उद्धार नही होता है। कुछ अतृप्त आत्माएं अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहीं भटकती रहती हैं और उचित समय आने का इंतजार करती है। मरने की बाद जीव की आत्मा को सूक्ष्म शरीर मिलता है। और इस दौरान उसके पाप पुण्यों का लेखा जोखा तय किया जात है। पर कुछ आत्माओं का मरने के बाद भी अपने शरीर या अपनी अतृप्त कामनाओं से इतना ज्यादा मोह होता है कि वो इस संसार में ही रह जाती है। ऐसी आत्माएं भूत, प्रेत, पिशाच बन कर धरती पर ही विचरण करती है। 
इन्हें जिस वस्तु, स्थान, व्यक्ति से प्रेम होता है ये उसे छोड़ती नही है। इस अंगूठी और पुरानी हवेली के साथी भी ऐसा ही है। तुम्हारे ही वंश के प्रतापी राजा ठाकुर बलदेव प्रताप सिंह जी ने उस अंग्रेज और तांत्रिक को मार तो दिया था। पर तांत्रिक ने मरते मरते तुम्हारे वंश और इस गांव का नाश करने की बात कही थी। तब से उस पुरानी हवेली को तंत्र साधना के द्वारा बांध दिया गया था। और सभी गांव वालों से उस हवेली की तरफ देखने से भी मना कर दिया था। 


पर जब हम पहली बार वहां गये थे तो वहां तंत्र मंत्र का तो कोई निशान नही दिखा। - रानो ने कहा।


हां, क्योंकि उस बात को बहुत समय बीत गया है। पर तुम्हे पता नही भूत प्रेतों की शक्ति भी एक निश्चित स्थान या एक दायरे में ही होती है, जहां वो अपनी शक्ति दिखा सकते है। उस दायरे से बाहर जाते ही उनकी शक्तियां या तो काम नही करती है या कमजोर पड़ जाती है। 


अगर ऐसा है तो फिर चंदू के ऊपर उस भूत ने अपना प्रभाव कैसे दिखाया और वो हमारे घर तक कैसे आ गया ? - राजू ने कहा।


वो उस अंगुठी की वजह से आया, जो दीनू उठाकर ले आया - रानो ने कहा।


हां, तुम सही कह रही हो ? आत्माएं वैसे तो किसी सुनसान जगह जैसे पुरानी हवेली, खण्डहर, गुफाओं या पेड़ आदि पर ही रहते है। और कोई उनकी सीमा में आता है तो उन पर अपना प्रभाव दिखाते है। पर अगर कोई उनकी ऐसी चीज अपने साथ ले जाए जिससे वो जीवित रहते हुए प्रेम करते थे तो वो अपनी सीमा से बाहर आकर उस वस्तु के सहारे कहीं भी पहुंच जाते है।-पुजारी ने कहा।


पर पुजारी जी, उस भूत में इतनी शक्ति कैसे आ गई कि उसने दो दो इंसानो की जान ले ली। - सोनू ने पूछा।


ये सब चंदू की गलती से हुआ है ? उसे बिना कारण ही आत्मा की शक्ति का मजाक नही उड़ाना चाहिए था। उसके मजाक और बुराई करने, कोसने की वजह से वो आत्मा बिगड़ गई और उसने चंदू से बदला लेने की सोचा। और उन दो व्यक्तियों के मरने की बात है तो जहां तक मैंने अपने बचपन में अपने दादाजी से उस पुरानी हवेली की बातें सुनी थी। उससे यही लगता है कि उस आत्मा ने वापस आने का रास्ता खोज लिया है। 


कैसा रास्ता ? और कैसे पुजारी जी ? - रानो ने कहा।


हमने सुना था कि अंग्रेज से मरते समय तांत्रिक ने कहा था कि अगर वो वापस इस दुनिया में आकर अपनी शक्ति बढ़ाना और लोगों से बदला लेना चाहता है तो उसे लोगों को सपने में ही पुरानी हवेली में ले जाना होगा और वहां ले जाकर उसी जगह पर पहले तीन नरबलि देनी होगी। सपने में बलि देते ही वो असल जीवन में मर जाएंगे। और तीसरी बलि देते ही शैतान उन्हें फिर से सारी शक्तियां दे देगा जिससे वो शक्तिशाली प्रेत बन कर इस गांव के लोगो से अपना बदला ले सकंेगे। 


मतलब दो बलि शैतान को दी जा चुकी है ?- राजू ने पूछा।


हां और अगर आज वो बच्चा मर जाता तो शायद तीसरी बलि भी पूरी हो जाती - पुजारी ने कहा।


पुजारी जी एक बात समझ नही आई। वो अंगूठी तो किसी के पास अपने आप जा नही सकती। फिर किसने उसे उन दोनो तक पहुंचाया होगा ?


तुमने शायद अंगूठी के किस्से के बारे में सुना नही। उसमें सम्मोहन की शक्ति है जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। उस अंगूठी ने उन दोनो को पहले आकर्षित किया और फिर उन्हे नींद में सुलाकर स्वप्नलोक ले गया। और फिर सपने में ही पुरानी हवेली में ले जाकर वहां उन दोनो की बलि दे दी। वहां बलि देते ही ये इस दुनिया में असलियत में मर गए। - पुजारी ने कहा। 


हां, ये सही है एकदम जब मैंने उस बच्चे को बेहोशी की हालत में छुआ और आंखे बंद की तो मुझे भी ऐसा लगा जैसे मैं पुरानी हवेली में हूँ। पर वो भूत हमारे साथ ऐसा कुछ नही कर पाया। ऐसा क्यों ? - सोनू ने कहा।


उस अंगूठी ने पहले तुम बच्चों पर अपना सम्मोहन करने की कोशिश की थी। तुम्हारे वो सपने उसी सम्मोहन का हिस्सा थे, पर तुम पर उस सम्मोहन का ज्यादा असर नही हुआ क्योंकि तुम्हारे ऊपर ठाकुर बाबा का आर्शीवाद है। उन्होंने समय से पहले ही तुम्हे सपने की दुनिया से असलियत में ला दिया। जिससे तुम्हारी जान बच गई। 


ठाकुर बाबा है कौन पुजारी जी, इनका नाम तो आज मैंने पहली बार सोनू के मुंह से ही सुना था। और अब आपके मुंह से - रानो ने कहा।


ठाकुर बाबा, ठाकुर बलदेव प्रताप सिंह जी ही है। अंग्रेज और तांत्रिक से लड़ाई के दौरान तांत्रिक ने मरते मरते उन्हें धोखे से मार दिया था। पर वो एक दिव्य आत्मा थे इसलिए वो मरने के बाद अपने गांव और वंश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध थे। इसलिए वो भूत और देवता के मध्य की श्रेणी अवधूत श्रेणी में चले गए। आमतौर पर उन्हें जिंदबाबा भी कहा जाता है। ये उनकी शरण में आने वाले हर व्यक्ति की बुरी आत्माओं से रक्षा करते है। 


ओह, तभी उस बच्चे को ठाकुर बाबा की स्थान पर ले गए थे। - सोनू ने कहा।


हां, आज भी पूरा गांव उनके चमत्कारों के किस्से सुनाता है।- पुजारी ने कहा।


तो पुजारी जी, अब आगे क्या होगा ? 


आगे अब बहुत बुरा हो सकता है, क्योंकि वो अंगूठी अब किसी और को सम्मोहित करके उसकी बलि देगी। और इस बार वो किसी बच्चे की बलि ही देगी। 


बच्चे की बलि ही क्यों ? - रानो ने कहा।


तुमने शायद ध्यान नही दिया। क्योंकि शैतान को सबसे पहले एक वृद्ध की और फिर एक जवान की बलि दी गई। तो अब केवल किसी बच्चे की बलि देना बाकी रहा है। 


हे भगवान, मुझे तो बहुत डर लग रहा है। ये सब बातें सुनकर। - दीनू ने कहा।


तो अब आगे क्या करना होगा पुजारी जी ? - रानो ने कहा। 


सबसे पहले उस अंगूठी को ढूंढना होगा। - पुजारी ने कहा।


पर वो अंगूठी तो गुम चुकी है। उसे ढूंढने की कितनी कोशिश की पर वो मिली ही नही। - सोनू ने कहा


पुजारी जी आपके पास कोई उपाय नही जिससे ये पता लग सके कि वो अंगूठी कहां है ? - रानो ने पूछा।


उपाय तो है पर उसके लिए मुझे मेरे गुरूजी के पास जाना होगा। 


तो आपके गुरूजी कहां है पुजारी जी- रानो ने कहा।


मेरे गुरूजी गांव के बाहर ठाकुर बाबा के स्थान पर ही रहते है। हमें वहां ही जाना होगा। 


पर वो तो जंगल में पुरानी हवेली से पास ही है। - सोनू ने डरते हुए कहा।


हां, तभी तो वो वहां रहते है। ताकि गांव वालो को उन शैतानी ताकतों से बचा सके। और ठाकुर बाबा की पूजा कर सके।


पर पुजारी जी, आज जब हम बच्चे को वहां लेकर गए थे तो वहां कोई नही था। ठाकुर बाबा का स्थान एकदम सुनसान पड़ा था। - सोनू ने कहा।


नही, ऐसा नही हो सकता। मेरे गुरूजी कभी उस स्थान को छोड़ कर नही जा सकते है। 


हो सकता है वो आसपास ही कहीं गये हो - रानो ने कहा।


पर रानो, इतने लोगों के आने की आवाज, उनकी बातों की आवाज क्या उन्हें सुनाई नही दी होगी। - सोनू ने कहा।


कहीं मेरे गुरूजी तो मुसीबत में नही है ? - पुजारी ने कहा।


मेरा मन तो डर से कांप रहा है ? वो अंगूठी बच्चे के हाथ से छूट कर वहीं गिर गई थी। - सोनू ने कहा।


बच्चों तुम घर जाओ। मुझे इसी समय मेरे गुरूजी के पास जाना होगा। क्योंकि बिना गुरूजी के उस अंगूठी का मिलना नामुमकिन है। और गुरूजी के बारे में सोच कर मेरा दिमाग खराब हो रहा है। अपनी आंखो से जब तक उनके दर्शन नही कर लूंगा। उनसे मिल नही लूंगा मेरा किसी चीज में मन नही लगेगा।- पुजारी ने खड़े होते हुए कहा।


पुजारी जी हम भी आपके साथ चलते है - रानो ने कहा। 


नही, बच्चों तुम सब बिना कारण ही मुसीबत में फंस जाओगे। वैसे भी उस तांत्रिक को ठाकुर बाबा के वंश से नफरत थी। इसीलिए तुम जाओ। वैसे भी रात के 11.30 हो गए है। शैतानी शक्तियों के जागने का समय होने वाला है। 12 बजे से पहले घर पहुंच जाओ। क्योंकि उस शैतान की नजर अब तुम पर ही होगी।


ठीक है हम चलते है - दीनू ने कहा।


हां, और मैंने जो धागा दिया है, उसे किसी भी हालत में अपने से दूर मत करना। ठीक है अब मैं चलता हूं कल सुबह समय मिलते ही आ जाना। - पुजारी ने कहा और जल्दी से हनुमान जी के सामने हाथ जोड़ता हुआ निकल गया। 


राजू दीनू चलने के लिए तैयार हो गए पर रानो और सोनू वहीं से वहीं खड़े रहे। 


क्या हुआ भैया ? जल्दी चलिए। - राजू ने कहा।


क्या हमारा इस वक्त घर चलना सही होगा या पुजारी जी के पीछे चलकर उनके साथ गुरूजी के बारे में पता करना सही रहेगा ? - सोनू ने कहा।


पर अगर हम पुजारी के पीछे गए और हवेली के पास हमें उस भूत ने पकड़ लिया तो ? - दीनू ने कहा।


और अगर हम घर की तरफ गये तो रास्ते में भी तो भूत पकड़ सकता है, क्योंकि वैसे भी रात के 12 बजने वाले है। - राजू ने कहा।


समझ नही आ रहा ? हमें अब क्या करना चाहिए ? - रानो ने कहा।

 


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आगे क्या हुआ ? जानने के लिए पढ़िए कहानी का अगला भाग . . .


कहानी के अगले भाग के लिए मुझे फाॅलो करना और इस कहानी को शेयर करना ना भूलें। कहानी को अपना प्रेम इसी तरह देते रहे। काॅमेंट और रेटिग्ंस के माध्यम से अपने विचार बताते रहे है। 
धन्यवाद। 


अभिषेक हाड़ा अभि 

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Nikita 3 महीना पहले

Sapna Patel 3 सप्ताह पहले

Ramesh Kumar 4 सप्ताह पहले

Annu 4 सप्ताह पहले

nihi honey 1 महीना पहले