पुरानी हवेली का राज - 16

इस कहानी के अभी तक कुल 15 भाग प्रकाशित हो चुके है। अगर आपने अभी तक नही पढ़े है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर पहले उन्हे पढ़िए उसके बाद इस भाग को पढ़िए।

पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि सोनू अंगूठी की खोज में राॅकी के अंतिम संस्कार में जाता है। वहां एक बच्चा गायब हो जाता है। जो कुछ देर बाद मिल जाता है। तब लोग उसे ठाकुर बाबा के स्थान पर लेकर जाते हैं। वो अंगूठी उस बच्चे के हाथ में ही थी। सोनू अपनी समझदारी से उस बच्चे को बचा लेता है। लेकिन वो अंगूठी फिर उसके हाथ में नही आ पाती है। अब आगे . . .

सोनू का दिमाग खराब हो रहा था। उसने खुद ने अंगूठी को अपने हाथों से छुआ था। पर अचानक कहां गायब हो गई ? और अब किसकी बारी है ? उसे कुछ समय नही आ रहा था। उसका मन तो कर रहा था कि वो वापस जाए और अंगूठी को ढूंढे। पर ये सब मुमकिन नही था। एक तो वैसे ही अंधेरा होने का समय हो गया था। दूसरी बात ऐसे समय कहीं भी आया जाया नही जाता है। सीधा घर पर ही जाते है। 
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तो भैया, क्या ये आपका आखिरी फैसला है। - रानो ने सोनू से पूछा।

हां, और हमारे पास अब कोई दूसरा रास्ता भी नही है। - सोनू ने कहा।

पर भैया, क्या ये वक्त सही है ?- चंदू ने कहा।

चंदू और सोनू भैया सबसे पहले तो आप सब धीरे धीरे बात करो। ताकि नीचे तक आवाज नही जाए। और वैसे सही वक्त तो कभी आएगा ही नही। तुम्हे नही पता मुझे कितना डर लग रहा था, जब उस बच्चे को होश नही आ रहा था। - सोनू ने कहा।

पर भैया, आप भी तो अंगूठी नही ला पाए। और वही हमारे लिए आखिरी मौका था, उस अंगूठी को पाने का - रानो ने कहा।

रानो मैंने पूरी कोशिश की, पर वो अंगूठी नही मिल पाई। पर मैं जो कह रहा हूं, वही करने से हमें उस अंगूठी का रहस्य और उस भूत का पता लगेगा। - सोनू ने कहा।

सोनू ने रानो और बाकी सभी को श्मसान में क्या हुआ ? सब बता दिया था। और सोनू ने अंगूठी का पता लगाने के लिए मंदिर वाले पुजारी के पास जाने का विचार रखा था। लेकिन रानो के अलावा कोई भी उसे मानने के लिए तैयार नही था। क्योंकि रात के समय घर से बाहर निकलने में ही सभी को डर लगता था। और फिर घर वालों को बिना बताए इस तरह से जाना बहुत ही खतरनाक था। सोनू अपने तर्क दे कर सभी को मनाने में लगा था। 

सोनू ने आखिरी बार अपना अंतिम तर्क देते हुए कहा- ठीक है मैं अकेला ही जा रहा हूँ, पर कल को अंगूठी की वजह से गांव के किसी और आदमी, बूढें, बच्चे या औरत की मौत हो जाए। तो उसके कारण तुम सब बनोगे। मैं नही। 

सभी सोच में पड़ गए। समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए ? उनके लिए आगे कुआं पीछे खाई वाली बात हो रही थी। पर सोनू भैया को अकेले जाने देना भी गलत था। इसलिए रानो के साथ चलने के लिए राजू और दीनू भी तैयार हो गए। चंदू ने भी उनकी योजना में हामी भर दी। पर रानो ने प्रभु और गोलू का घर पर ही ध्यान रखने के लिए उसे वही रूकने को कहा। वैसे भी रानो को डर था कि चंदू वहां उनके साथ चलकर उनका काम न बिगाड़ दे क्योंकि चंदू से नींद बिलकुल भी सहन नही होती थी। 

दीनू ने रानो से पूछा - दीदी। हम घर के मेन गेट से तो जा नही सकते। क्योंकि दादी सोने से पहले ताला लगा लेती है और फिर किसी के द्वारा देख लिए जाने का भी डर है। 

पर कुछ तो करना होगा - रानो ने छत से इधर उधर देखते हुए कहा। 

आपके दिमाग में कुछ चल रहा है क्या ? - दीनू ने कहा।

हां, सोच रही हूँ, छत के इस कोने से साड़ी बांध कर हम नीचे उतर कर मंदिर जा सकते है। 

राजू और दीनू ने देखा। 

दीदी, आपको पता है। इस तरफ झाड़िया ही झाड़ियां है। और तो और इस तरफ कोई आता जाता भी नही है। - दीनू ने कहा।

हां तभी तो इसी तरफ से जाना सही रहेगा। वैसे तो हमारा घर गांव में सबसे अलग और दूर है। पर सोचो अगर हम आगे की तरफ से उतरे तो हो सकता है सड़क पर साड़ी बांध कर उतरते हमें कोई देख ले तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। 

आप कह तो सही रहे हो दीदी। पर आपको पता है। इस तरफ सांप, कीड़े मकोड़े भी हो सकते है। और फिर इस तरफ बिल्कुल अंधेरा भी है ना। ये सब आपको रिस्की नही लग रहा। - दीनू ने कहा।

अरे ये सब हमारे लिए अच्छी बातें है, तुम चिंता मत करो। सांप को काटना होगा तो वो तो हमेें कहीं भी कभी भी काट सकता है, अगर ऐसे ही डर डर कर काम करेंगे तो जिएंगे कैसे ? 

रानो सही कह रही है, अभी हमें सबसे पहले मंदिर जाना होगा। वरना आगे गांव में अंगूठी अब किसी और की भी जान ले सकती है।

नही, ऐसा कुछ नही होगा। हम आज और अभी मंदिर चलेंगे। मैं नानी की साड़ी लेकर आती हूँ। - रानो ने कहा और चली गई।

कुछ ही देर में वो साड़ी और एक चाकू साथ लेकर आई। 

ये किस लिए रानो ? - सोनू ने पूछा।

अपनी सुरक्षा के लिए। रात के समय बच्चों के साथ बाहर निकलना सही नही है। मजबूरी है इसलिए चलना पड़ रहा है। और पता नही कब क्या मुसीबत आ जाए ? 

सही कह रही हो, पर जल्दी करो। हमें जल्दी ही वापस भी लौटना पड़ेगा। 

हां, बस एक मिनिट - रानो ने साड़ी को बांधते हुए कहा।

दीदी, क्या मैं भी साथ चलूं ? - गोलू ने कहा।

नही, गोलू। तुम अभी बच्चे हो ? तुम, प्रभु और चंदू यही रहो। हम बस कुछ ही देर में आ जाएंगे। - रानो ने कहा।

ठीक है। दीदी पर जल्दी आना।

हां, जल्दी से जल्दी आने की कोशिश करेंगे। अच्छा पहले कौन उतर रहा है ये बताओ - रानो ने कहा।

राजू ने नीचे से झांककर देखा - ओह दीदी। ये अगर गलती से भी हाथ फिसल गया तो हाथ पैर टूटना पक्का है। 

तो मैं सबसे पहले उतरती हूं, तुम देखना मैं कैसे उतर ही हूं फिर वैसे ही उतरना। गोलू तुम टार्च से दिखाना। - रानो ने कहा और साड़ी पकड़ के नीचे उतरने लगी। गोलू टार्च से दिखा रहा था। 

रानो ने उतरने के बाद कहा - राजू आ जाओ। 

नही, दीदी। अब सोनू भैया उतरेंगे। मैं बाद में आऊंगा- राजू ने कहा।

उसके बाद सोनू उतरा और फिर दीनू । पर राजू को उतरने में बहुत डर लग रहा था। 

रानो ने कहा - राजू अब तो तुम आखिरी बचे हो। जल्दी आ जाओ।

पर राजू को नीचे देखने में भी डर लग रहा था। 

रानो ने कहा - आंखे बंद करो और मन ही मन में भगवान का नाम लो। जल्दी उतरो यार। हम लेट हो रहे है। 

तब राजू आंखें बंद करके भगवान का नाम लेते हुए नीचे उतरा। 

गोलू ने तब टाॅर्च सोनू को फेंक कर दे दी। 

चंदू, अपना और गोलू प्रभु का ध्यान रखना।, हम जल्दी आ जाएंगे। - सोनू ने कहा।

ठीक है। भैया। संभल कर जाना। - चंदू ने कहा। 

चारो ने अपने मुंह पर कपड़ा बांधा और फिर हाथ से अलविदा करते हुए मंदिर की तरफ निकल गए।

 

आगे क्या हुआ ? जानने के लिए पढ़िए कहानी का अगला भाग . . .

कहानी के अगले भाग के लिए मुझे फाॅलो करना और इस कहानी को शेयर करना ना भूलें। कहानी को अपना प्रेम इसी तरह देते रहे। काॅमेंट और रेटिग्ंस के माध्यम से अपने विचार बताते रहे है। 

धन्यवाद। 

अभिषेक हाड़ा अभि 

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Geeta 4 दिन पहले

Sapna Patel 2 महीना पहले

Ramesh Kumar 2 महीना पहले

Annu 2 महीना पहले

nihi honey 2 महीना पहले