पुरानी हवेली का राज़ - 15

इस कहानी के अभी तक कुल 14 भाग प्रकाशित हो चुके है। अगर आपने अभी तक नही पढ़े है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर पहले उन्हे पढ़िए उसके बाद इस भाग को पढ़िए।

पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि सोनू गाँव के एक लड़के रॉकी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जाता है और वहां पर उस अंगूठी को खोजता है पर उसे वो अंगूठी नहीं मिलती है लेकिन एक बच्चा वहां से गायब हो जाता है | कुछ लोग उसको खोजने जाते है पर सोनू के पापा सोनू को कही नहीं जाने देते है| अब आगे - - -

 

सोनू अब कुछ न कह सका। वो मन ही मन उस बच्चे की सलामती की दुआ कर रहा था। उसकी नजरें पुरानी हवेली की तरफ जाने वाले रास्ते की तरफ ही थी। 

पर 10 मिनट बाद ही कुछ लोग जल्दी से भागते हुए उस तरफ आए। बच्चे के पापा के हाथ में शायद उसका बच्चा था पर वो बेहोश था। लोगो इस तरह भागते देख श्मसान में खड़े लोग भी उस तरफ भागे। 

ठाकुर साब देखिए। क्या हो गया मेरे बेटे को। न कुछ बोलता है न कोई हरकत करता है। - उस आदमी ने सोनू के पापा से कहा।

इसे जल्दी से उस साफ जगह पर लेटाइए। - सोनू के पापा ने कहा।

उसने जल्दी से अपने बच्चे को साफ जगह पर लेटा दिया। सोनू के पिता ने उसकी नब्ज देखी। उसके बाद उसकी सांसे देखी। 

इसकी नब्ज बहुत तेज चल रही है, और सांसे भी बहुत तेज चल रही है। जल्दी से इसे ठाकुर बाबा के स्थान पर लेकर जाते है। 

हां, जल्दी चलिए। - उस आदमी ने अपने बच्चे को उठाते हुए कहा। सोनू ने देखा वो अंगूठी उस बच्चे के हाथ में ही थी। 

सभी जंगल के अंदर ठाकुर बाबा के स्थान पर गए। वहां एक चबूतरा था जिस पर कुछ झंडे लगे हुए थे। और कुछ धागे बंधे हुए थे। चबूतरे पर एक छोटी से पत्थर की शिला पर एक घोड़े पर सवार व्यक्ति की आकृति बनी हुई थी। जो शायद उस गांव के लोगों के ठाकुर बाबा थे। 

सोनू ने वह स्थान पहले नही देखा था और न ही उसके परिवार में किसी ने इस स्थान के बारे मे कभी कोई बात की थी।

बच्चे का पिता अपने बच्चे को लेकर चबूतरे पर चढ़ने ही वाला था कि तभी कुछ आदमियों ने कहा - अभी हम किसी की शवयात्रा में आए है। ऐसे समय में किसी देवस्थान पर जाना अच्छा नही है। 

हां, अपने बच्चे को दूर से ही ठाकुर बाबा जी के सामने रख दो। और प्रार्थना करो। 

हां और शायद पुजारी इधर उधर ही कहीं गया होगा। कुछ ही देर में आ जाएगा।

सोनू बहुत बैचेनी में था उसने कहा - पापा, हमें ज्यादा सोचना नही चाहिए। इसके मुंह पर पानी डालिए। शायद बेहोश हो गया हो। 

हां, लाओ पानी लाओ। - सोनू के पापा ने कहा।

सोनू ने पानी की बोतल दी। जो उसने पहले से ही भर कर रखी थी। सब की निगाहें बच्चे के चेहरे पर थी पर बच्चे में कोई हलचल नही हो रही थी।

सोनू ने तब उसका हाथ अपने हाथ में लिया और आंखे बंद की। अचानक से उसे लगा कि वो हवेली के सामने अंधेरी रात में खड़ा है। उसने जल्दी से आंखे खोली। उस वक्त दिन ही था। 

उसने तब बच्चे को जोर से हिलाना शुरू कर दिया और जोर जोर से कहने लगा - जागो। तुम्हे कुछ नही हुआ है। नींद से जागो। तुम सपना देख रहे हो।

सोनू के पापा ने कहा - ये क्या बड़बड़ा रहे हो ? इसे हमें डॉक्टर के पास ले जाना होगा। बाबा का काम बाबा करेंगे और डॉक्टर का काम डॉक्टर करेंगे। 

पापा, मैंने पढ़ा था कहीं बार आदमी सपने में इतना खो जाता है, उसे बाहरी दुनिया का ध्यान नही रहता है। मुझे लगता है इस बच्चे के साथ भी यही हुआ है। अगर ये बेहोश होता तो अबतक जाग चुका होता। 

अगर ऐसा है तो बेटा, कोशिश करो। मेरा इकलौता बेटा है। और अभी तो इसकी उमर ही क्या है ? बच्चा ही तो है। - बच्चे के पिता ने कहा।

तब सोनू ने जोर जोर से कहा - जागो, जागो।

और अंगूठी के पास अपने काले धागे को लगा कर फिर एक बार जोर से उसके कान में जाकर कहा- तुम्हे कुछ नही होगा। जागो। तुम सपना देख रहे हो। और चमत्कार हो गया। बच्चा एकदम से जाग गया। और चिल्लाने लगा - पापा मुझे बचा लो। वो पुरानी हवेली का . . . 

अरे मेरे लाल, तू ठीक है। तू ठीक हो गया - कहते हुए उस बच्चे के पिता उसके गले लग गए। और उन्होंने बच्चे की बात पर ध्यान नही दिया। बच्चे ने भी अपने पिता के गले लगकर रोना शुरू कर दिया। 

वाह, सोनू आज तो तुमने कमाल कर दिया - सोनू के पापा ने सोनू की पीठ थपथपाते हुए कहा। 

बच्चे का पिता सोनू के हाथ जोड़ कर धन्यवाद देने लगा। - आप सच में ठाकुर बाबा की तरह ही हमारी मदद की है। आखिर आपका परिवार ही तो हमारे गांव वाले की जान बचाता आया है। बहुत बहुत धन्यवाद बेटा। 

सोनू ने उसके हाथों को रोकते हुए कहा - अंकल इसकी कोई जरूरत नही। आप बस अब इस नटखट का ध्यान रखना। 
चलो, सब ठीक हो गया है। अब घर चलते है। गांव में सब सोच रहे होंगे कि इतनी देर कैसे लगा दी- सोनू के पापा ने कहा। 

सोनू ने तब जल्दी से मुड़ कर देखा। वो अंगूठी उस बच्चे के हाथ से गिर चुकी थी। ये उसने खुद ने देखा था। उसने इधर उधर देखा। पर उसे वो अंगूठी कहीं नजर नही आई। उसकी बैचेनी बढ़ गई। 

सभी लोग गांव जाने के लिए चलने लगे। पर सोनू उस अंगूठी को ही ढूंढ रहा था। सोनू को वहीं खड़ा देखकर सोनू के पापा ने कहा - क्या हुआ क्या सोचने लगे ? जल्दी चलो। शाम हो चुकी है। कुछ ही देर में अंधेरा हो जाएगा। 

हां पापा - सोनू ने कहा और उनके साथ चल दिया। 

पर सोनू बार बार पीछे मुड़ कर देख रहा था। तभी उसने देखा कि अचानक से सफेद कपड़ों में एक व्यक्ति उसे नजर आया। पर दूर होने के कारण वो उसका चेहरा नही देख पाया। 

सोनू ने पलट कर सामने देखा, और फिर दुबारा पीछे देखा। पर इस बार वहां कोई नही था। सोनू पापा से ये बात कहना चाहता था पर यही सोच कर कि पापा को सारी बातें पता न चल जाए। वो चुप रहा। और सोचने लगा कि अभी अभी जो उसने देखा वो कौन था ? वो भी पुरानी हवेली का भूत था या वो पुजारी जिसकी गांव वाले बाते कर रहे थे ? और वो अंगूठी कहां गिर गई ? इतनी मुश्किलों के बाद तो मिली थी। इस मुसीबत से कब छुटकारा मिलेगा ?
सोचते सोचते वो कब श्मसान की तरफ आ गए पता ही नही चला। सोनू का दिमाग खराब हो रहा था। उसने खुद ने अंगूठी को अपने हाथों से छुआ था। पर अचानक कहां गायब हो गई ? 

और अब किसकी बारी है ? उसे कुछ समय नही आ रहा था। उसका मन तो कर रहा था कि वो वापस जाए और अंगूठी को ढूंढे। पर ये सब मुमकिन नही था। एक तो वैसे ही अंधेरा होने का समय हो गया था। दूसरी बात ऐसे समय कहीं भी आया जाया नही जाता है। सीधा घर पर ही जाते है। 

आगे क्या हुआ ? जानने के लिए पढ़िए कहानी का अगला भाग . . .

कहानी के अगले भाग के लिए मुझे फाॅलो करना और इस कहानी को शेयर करना ना भूलें। कहानी को अपना प्रेम इसी तरह देते रहे। काॅमेंट और रेटिग्ंस के माध्यम से अपने विचार बताते रहे है। 

धन्यवाद। 

अभिषेक हाड़ा अभि 

 

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Ugam 4 सप्ताह पहले

Ashish Kumar 2 महीना पहले

Sapna Patel 2 महीना पहले

Rashmi 2 महीना पहले

Mital 2 महीना पहले