पुरानी हवेली का राज - 10

इस कहानी के पिछले 9 भाग प्रकाशित हो चुके हैं। अगर आपने वो नही पढ़े है तो पहले मेरी प्रोफाइल पर जाकर पढ़िए उसके बाद यह भाग पढिए। इस कहानी को नियमित रूप से प्रकाशित करता रहूंगा। इसलिए अगले भाग की नोटिफिकेशन के लिए मुझे फाॅलो करना ना भूले। और कमेन्ट करके अवश्य बताएं कि कहानी कैसी चल रही है ? और कहानी के बारे में आपके क्या विचार है। मुझे आपकी समीक्षाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि राजू सोनू और दीनू गांव के मंदिर के पुजारी के पास पुरानी हवेली का राज पता करने जाते है और उनसे भूत के बारे में सवाल करते है और मदद मांगते है। अब आगे . . .

 

हां, ये तो मुझे उस समय ही पता लग गया था जब तुम यहां आए। क्योंकि मंदिर के पट दोपहर में बंद होने के बाद शाम को 4 बजे खुलते है। और तुम इतनी तेज धूप और गर्मी में भी ठीक 4 बजे यहां आ गए। गर्मी में लगभग सूरज ढलने के समय भक्तों का यहां आना जाना होता है। पर अगर कोई इतनी गर्मी में भी यहां आया है तो जरूर कुछ विशेष कारण होगा और फिर इन बच्चों के चेहरे पर भी एक अनजान सा भय है। 


हां, आपने बिल्कुल ठीक कहा। हम बहुत बड़ी मुसीबत में है। हम नही चाहते थे कि आप हमारे बारे में जाने। पर लगता है कि हमें आपको सब कुछ बताना होगा। - सोनू ने कहा। 


तुम तो ठाकुर साब के पोते हो ना। हम तो तुम्हें देखते ही पहचान गए थे। - पुजारी जी ने उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए कहा।


जी, इसीलिए। दादी और पापा से बहुत डर लगता है। और हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई। - सोनू ने कहा।


हमसे नही भैया, इस दीनू से - राजू ने कहा। 


क्या गलती हो गई ? सब विस्तार से जल्दी से बताओ। शाम होने के बाद भक्तों को आना शुरू हो जाएगा। 


तब सोनू भैया ने जल्दी से सारी बात पुजारी जी को बताई। 


पुजारी जी ने सारी बात जानकर यही कहा कि बेटा मुझे लगता है, तुमने उस अंगूठी को उठाकर सच में पुरानी हवेली की उस दुष्टात्मा को आमंत्रण दे दिया है जिसे आज से कईं सालों पहले तुम्हारे ही पूर्वजों ने उस पुरानी हवेली में समाप्त कर दिया था। इस गांव के ही लोग अक्सर रात के समय यहां आ जाते थे और पुरानी हवेली के किस्से सुनाते थे। 


ओह, ये क्या कह रहे हो भैया ? इस बारे में हमें तो आज तक किसी ने नही बताया। - चंदू ने बीच में टोकते हुए कहा। 


तुम तो शहर में रहते हो। हम तो यहां गांव में रह कर भी आज तक ये बात नही जान पाए। - राजू ने कहा।
आगे क्या हुआ भैया ? - रानो ने पूछा।


गोलू प्रभु जाओ तो मेरे लिए पानी की बोतल ले कर आओ नीचे से। - सोनू ने कहा।


ठीक है, पर आप आगे क्या हुआ ? सब बताना। - गोलू ने कहा।


हां, जरूर। पर खाना खाने के बाद पानी नही पिया। गला सूख रहा है। 


हां , लाते है। प्यास तो मुझे भी बहुत तेज लगी।- गोलू उठा और साथ में प्रभु भी चला गया। 


दोनो सीढ़ियों से नीचे उतर गए। सोनू ने ये देखने के बाद कि दोनो चले गए है जल्दी से कहा - पुजारी जी ने कहा था कि आज से कई साल पहले वो हवेली एक अंग्रेज की थी जो कि लगान वसूली के लिए आजादी से पहले, आज से लगभग 150-200 साल पहले नियुक्त किया गया था। वो एक सनकी इंसान था। उसे लकड़बग्घे पालने का शौक था। इसलिए उसने गांव से बाहर, जंगलों में ये हवेली बनवाई। और अपने लकड़बग्घों को वो हवेली में पालता था, लेकिन उनके खाने के लिए वो रात में ही किसी को बेहोश करके घोड़े पर बैठा कर हवेली में ले आता था और उनकों भूखे लकड़बग्घों के सामने फेंक देता था। 


लेकिन कुछ लोग यह भी कहते है कि वो अंग्रेज कोई सनकी वैज्ञानिक था जो भेड़िया मानव की तरह लकड़बग्घा मानव बनाना चाहता था। इसलिए वो जिंदा इंसानों को पकड़ कर उनको लकड़बग्घों से कटवाता था। जिससे कईं लोग मर जाते थे। उनके मरने के बाद वो उनकों उन मुर्दाखोर लकड़बग्घों के सामने फेंक देता था। 


पहले किसी का इस बात पर कोई ध्यान नही गया। लेकिन जब आस पास के हर गांव से इंसानों के रातों रात गायब होने की खबरें आने लगी तो लोंगों में दहशत फैल गईं। लोगों ने शाम होते ही घर से निकलना बंद कर दिया। 


जिसकी वजह से उसके प्रयोगों में दिक्कत होने लगी। और कहते है कि तब उसने एक तांत्रिक को खूब पैसा देकर लोगों को सम्मोहन करने का कोई साधन ढूंढने को कहा। तब उस तांत्रिक ने एक लाल रंग की अंगूठी बनाई। जिसे देखते ही लोग उस पर सम्मोहित हो जाते थे। और खुद ही चलकर उस हवेली में आ जाते थे। लेकिन हमारे ही खानदान में उस समय ठाकुर बलदेव प्रताप सिंह हुए थे, उन्हें अंग्रेज की इन बातों की भनक लग गई। और उन्होंने अंग्रेज को एक बार इसी तरह प्रयोग करते देख लिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूनम की एक रात वो सच में एक लकड़बग्घे के जैसा इंसान बन गया। 


ओह जैसा मैंने सपने में देखा था। - रानो ने कहा। 


हां शायद वैसा ही था। 


पर उसका अंत कैसे हुआ ? और उस तांत्रिक ने क्या किया ? 


इस बारे में पुजारी जी और भी बहुत सी बातें बताने ही वाले थे कि कुछ और लोग मंदिर में आने लगे। लेकिन उन्होंने ये अभिमंत्रित धागा दिया और कहा था कि चंदू की अंगुली और हाथ में इसे बांध देना। और उससे कहना कि वो उस भूत के लिए कुछ भी गलत न कहे। और कल फिर जरूर आना। 


ओह, मतलब पूरा राज तो अभी भी पता नही चला। - रानो ने कहा।


हां, रानो। मन तो हो रहा था एक एक बात अच्छी तरह से सुने। पर तुम जानती हो मंदिर पर कोई न कोई आता ही रहता है। वैसे उन्होंने सुझाव तो दिया था कि हम चाहे तो रात को 9 बजे के बाद मंदिर आ सकते है। पर फिर उन्होंने ही कहा कि अगर परिवार में किसी को पता चल गया तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी। इसलिए तुम दिन में ही आना। 


तो ठीक है भैया। कल मैं भी आपके साथ चलूंगी। - रानो ने कहा।


तभी गोलू प्रभु पानी की दो बड़ी बोतल लेकर आ गए। 


भैया, आपने सारी कहानी सुना दी ना। - प्रभु ने कहा।


अरे हां, पर वो तो ये चंदू को नींद आ रही है तो इसी ने कहा कि कुछ खास बात हो तो बताओ। बाकी बातें सुबह बता देना। - सोनू ने कहा।


ये तो चीटिंग है भैया। हमें पूरी बात बताओ। - गोलू ने कहा।


सोनू ने कहा - देख मैं सुना तो दूंगा। पर फिर वो भूत रात में आकर तुझे परेशान करें तो मुझसे मत कहना। 


अरे हां सही कहा भैया। हम सुबह ही सुन लेंगे। क्या बात थी ? - प्रभु ने कहा। 


ठीक है तो अभी सोते है। और हां सभी ये धागा जरूर बांध लो। - सोनू ने रानो को धागा देते हुए कहा।


रानो ने सभी के बारी बारी से हाथ में धागा बांध दिया।


सभी ने पानी पिया और सभी बिस्तरों पर लेट गए। कुछ देर सबने इधर उधर की बातें की और फिर कुछ देर बाद सब सो गए। जब सब लगभग सब सो गए तो रानो ने अपने हाथ का वो धागा उतार दिया और वो अंगूठी पहन ली। इसके बाद उसने अपने सीने पर एक कागज रख दिया। और आंखे बंद करके लेट गई। कुछ ही देर में उसे नींद आ गई।


आगे क्या हुआ ? रानो ने धागा उतार कर वो अंगूठी क्यों पहन ली ? रानो आखिर क्या करने जा रही थी ? पुरानी हवेली का पूरा राज क्या है ? जानने के लिए अगले भाग का इंतजार करिए। 

 

 

अभिषेक हाड़ा अभि 

 

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Mital 4 महीना पहले

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Ramesh Kumar 5 महीना पहले

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Annu 5 महीना पहले

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nihi honey 5 महीना पहले

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Prafulla Chothani 5 महीना पहले