पुरानी हवेली का राज़ - 4

पुरानी हवेली का राज

भाग 4

(नया रहस्य)

पुरानी हवेली का राज कहानी के पिछले 3 भाग आपने पढे़ होंगे। यदि नही पढ़े तो मेरे नाम पर क्लिक कर के मेरी प्रोफाइल पर जा कर आप उन तीनों भागों को पढ़ सकते है। पहले 3 भाग का उद्देश्य भूत प्रेत जैसी किसी चीज पर विश्वास ना करें और सच का पता लगाएं इस बात पर आधारित था। इसलिए इस बार मैंने एक नई कहानी लिखने के बारे में सोचा जो सच में भूतप्रेत, रहस्य, रोमांच से भरी हो। नये पात्र और नये कथानक से नई कहानी लिखने की अपेक्षा मैंने इस कहानी को ही आगे बढ़ाने के बारे में सोचा। क्योंकि इसके पात्र और कहानी आपके लिए परिचित है। इसलिए इस पुरानी हवेली का राज कहानी को ही मैंने आगे बढ़ाते हुए इस बार सच में होरर, भूतप्रेत, रहस्य, रोमांच का प्रयोग किया है। आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी। कहानी का अगला भाग शीघ्र से शीघ्र प्रकाशित करने का प्रयास करूंगा। मुझे फॉलो करना और इस कहानी को अपने मित्रों के साथ फेसबुक, व्हाट्सऐप पर अधिक से अधिक शेयर करना ना भूलें।

पिछले भाग की अंतिम पंक्ति से आगे ...

आज सूरज ढल रहा था पर उन सबके लिए एक नया उदय था।

वो सोच रहे थे कि उन्होंने पुरानी हवेली की राज जिसकी वजह से वो डरे हुए थे, पता कर लिया है पर ऐसा नही था। एक नया रहस्य उनका इंतजार कर रहा था।

सभी अंधेरा होने से पहले ही घर पहुँच गए थे। उन्हे लग रहा था कि सब घर वाले चिंता कर रहे होंगे। पर ऐसा नही था। बस दादी ने पूछा कि इतनी देर कहां लगा दी। शाम की चाय भी नही पी।

सबने खेल में व्यस्त होने का बहाना बना दिया।

सोनू ने सबको रास्ते में ही समझा दिया था कि घर पर पहुंचते ही सबको नहाना है। क्योंकि सब श्मसान और मुर्दों के बीच में से होकर आए है। तो सभी ने गर्मी ज्यादा होने और पसीने की बदबू की वजह से नहाने का बहाना बनाया।

पर सिवाए दीनू के सब नहा लिए। दीनू को वैसे ही नहाना अच्छा नही लगता था। और उसे ठंड भी ज्यादा ही लगती थी। उसने केवल बाल गीले किए और हाथ पैर पर पानी के छींटे देकर कपड़े बदल लिए। रात को खाना खा कर सब आराम से सो गए।

***

रात के 1 बज रहे थे। सिवाए झिंगुरों के संगीत के किसी और की आवाज नही आ रही थी। दीनू को किसी ने जगाया। दीनू ने आंख खोल कर उसका चेहरा देखने की कोशिश की पर उसकी आंखो में इतनी नींद भरी थी कि वह उसका चेहरा नही देख पाया। उसको लगा ये उसके पापा है। उन्होंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले जाने लगे। दीनू उनके पीछे पीछे चलने लगा। वो बार बार आंखे खोलता। उसे कपड़ों से वो उसके पापा ही लग रहे थे। जो हमेशा देहाती बनियान,पेंट पहनते थे। उनके सर पर हमेशा कपड़ा बंधा हुआ रहता था। उसने कहा - पापा इतनी रात में कहां ले जा रहे हो ? मुझसे चला नही जा रहा। पीठ पर बैठा लो मुझे।

वो पीठ करके नीचे बैठ गए। दीनू झटपट उनकी पीठ पर सवार हो गया। और उसने आंखे बंद कर ली। उसे पापा की पीठ पर बड़ा ही मजा आ रहा था।

अचानक से उसे ठोकर लगी। और उसकी नींद खुली। उसने खुद को एक घोड़े की पीठ पर पाया। वो घोड़ा उसे पुरानी हवेली के सामने ला चुका था। पर पुरानी हवेली इस वक्त खंडहर नही थी। वो एकदम सही थी। वो पापा पापा चिल्लाने लगा। पर वहां दूर दूर तक उसकी आवाज सुनने वाला कोई नही था। उसने रानो दीदी, सोनू भैया, चन्दू, गोलू, प्रभु, दादी सबको आवाज दी पर कुछ फायदा नही हुआ।

जिस मौसम में उसे कुछ देर पहले गर्मी लग रही थी। उसी मौसम में अचानक से बिजलियां चमकना शुरू हो गया। वो हवेली को चारो तरफ से देखने लगा। हवेली सच में बहुत ज्यादा डरावनी लग रही थी| अचानक से जोरदार बिजली चमकी। और एक बहुत भयंकर गूंज के साथ बादल गरजे। उस एक क्षण की बिजली में उसने देखा कि बरगद के पेड के पास कोई साया लम्बा काला चादर ओढ़ के खड़ा है। उसे समझ नही आ रहा था कि वो कहां जाए ?

और तभी अचानक से हवेली का बड़ा दरवाजा क .... क..इ.. ई... की... की आवाज के साथ खुला। हवेली के अंदर से प्रकाश आ रहा था। दीनू ने अंदर जाना ही ठीक समझा। दीनू के अन्दर जाते ही दरवाजा वापस बंद हो गया। दीनू बचाओ बचाओ चिल्ला रहा था। हवेली में एक दीपक जल रहा था जहां से रोशनी आ रही थी। पर वो दीपक भी तेज हवा से बुझ गया। तभी उसे एक के बाद एक बहुत सी आंखे दिखाई दी। ये जरूर लकड़बग्घे ही होंगे। पर मैं नही डरूंगा। रानो दीदी की बात याद रखूंगा।

पर इस बार लकड़बग्घे एक दो नही बहुत सारे थे। अचानक से एक बिजली चमकी और उसने देखा पूरे महल में लकड़बग्घे घूम रहे थे। दीनू मदद के लिए इधर उधर दौड़ने लगा।

पर उसे पता था कि मदद के लिए कोई नही आने वाला है। लकड़बग्घे उसका शिकार करने के लिए उसके ऊपर कूदने ही वाले थे कि वो पूरी ताकत से लगाकर जोर से चिल्लाया -बचाओ... बचाओ। बचाओ।

क्या हुआ ? क्या हुआ ? दीनू दीनू - घर के सब लोग एक साथ जाग गए।

दीनू एक भयानक सपना देख रहा था। वो डर से चिल्लाता हुआ भागने लगा। दीनू के पापा उसके पीछे भागे। रानो, चन्दू, प्रभु, सोनू सबको कुछ समझ नही आया। दीनू के पापा ने दीनू को पकड़ने की कोशिश की पर दीनू ने उनको देखते ही कहा - दूर हटो मुझसे। जाओ। आपने ही सब किया है।

तब तक दीनू की मम्मी और चाचा भी आ गए थे। दीनू के चाचा ने कहा - डरो मत। तुम सपना देख रहे होंगे। दीनू । आ जाओ मेरे पास आ जाओ।

चाचा। मुझे बचा लो। मुझे बचा लो। - कहता हुआ दीनू चाचा की बाँहों में गिर गया। चाचा ने उसे गोद में उठाया और दुबारा बिस्तर पर लेटा दिया। दीनू पसीने से तरबतर हो चुका था। और डर की वजह से बेहोश हो गया।

घर की सब औरते और बच्चे बुरी तरह डर चुके थे। सब दीनू के चारो और बैठे थे। कोई उसे पंखा कर रहा था। कोई उसके लिए नींबू पानी बना रहा था। कुछ देर बाद दीनू की नींद खुली। तो दीनू ने माँ को सामने देख गले से लगा लिया। और बोला - माँ, मुझे मरना नही है। माँ वो बहुत सारे थे। मुझे मार डालेंगे।

कोई नही बेटा। कौन मार डालेगा ? तूने सपना देखा होगा। देख हम सब तो तेरे साथ ही है। कुछ भी तो नही हुआ है। - दीनू की माँ ने उसे गले लगाते हुए कहा।

अरे तू तो मेरा बहादुर बेटा। तू किससे डरने लगा। - दीनू की दादी ने कहा।

ले दीनू ये पी ले। बहुत पसीना आ गया था तुझे। - रानो ने उसे गिलास पकड़ाते हुए कहा।

दीनू जल्दी से एक सांस में सब पी गया।

दीनू भैया को क्या हो गया था ? - गोलू ने पूछा।

अरे बस अब जो भी बात करना है। सुबह करना। सोने दो अभी उसे। वापस याद मत दिलवाओ। -दीनू के दादी ने कहा।

सब अपने अपने बिस्तरों पर चले गए।

दीनू अब चुपचाप शांति से सो जाओ। मैं तुम्हारे पास ही हूँ। - दीनू की मम्मी ने कहा। और उसके बगल में ही लेट गई। दीनू भी मां से चिपक कर सो गया। बहुत जल्दी उसे नींद आ गई।

रात के 3 बज चुके थे। दीनू ने करवट लेने के लिए अपना सिर घुमाया और अचानक से उसकी आंखे खुली तो उसने देखा कि उसके सामने वही कम्बल ओढे़ हुए सायां खड़ा है। उसने चिल्लाने के लिए अपना मुंह खोला पर उसकी आवाज नही निकल पाई। उसने अपने हाथ पैर उठाने की कोशिश की पर उसके हाथ पैर बहुत भारी हो चुके थे। पूरी ताकत लगा कर भी वो उन्हे नही उठा पा रहा था। उसकी माँ उसके बगल में ही लेटी थी पर वो उन्हे भी कुछ नही बता पा रहा था। वो सायां धीरे धीरे उसकी ही तरफ बढ़ रहा था। उसका पूरा चेहरा अंधेरे मे था पर उसकी आंखे एकदम लाल थी। उसने डर से अपनी आंखे बंद कर ली। उसका पूरा शरीर दुबारा पसीने में भीगने लगा।

शेष अगले भाग में..

आशा करता हूँ इस भाग ने आपको जरूर डरा दिया होगा। और एक नये रहस्य को जानने की इच्छा पैदा कर दी होगी। कहानी की लगातार नोटिफिकेशन के लिए मुझे फॉलो करे।

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आगे क्या हुआ ? क्या ये सच में कोई आत्मा थी या केवल दीनू के मन का वहम ? जानेंगे कहानी के इससे भी अधिक डरावने और रहस्यमयी अगले भाग में...

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रेट व् टिपण्णी करें

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Ugam 3 महीना पहले

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Kandhal 4 महीना पहले

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Rekha 4 महीना पहले

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Mital 4 महीना पहले

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Ramesh Kumar 5 महीना पहले