हिंदी हास्य कथाएं किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    अफसर का अभिनन्दन - 17
    by Yashvant Kothari
    • (3)
    • 35

    मारीशस में कवि                             यशवंत कोठारी जुगाडू कवि मारीशस पहुँच गए.हर सरकार में हलवा पूरी जीमने का उनका अधिकार है,वे हर सरकार में सत्ता के गलियारे में कूदते फांदते ...

    kambal kripa prapti
    by Sadhana Kumar
    • (1)
    • 25

    सोशल मीडिया का हर तरफ बोलबाला है. इस इन्टरनेट युग मे हर तरफ ज्ञान तों जैसे प्रसाद की तरह बँट रहा है. लोगों के सोशल मीडिया प्रोफाईल देखिये तो ...

    अफसर का अभिनन्दन - 16
    by Yashvant Kothari
    • (2)
    • 64

    व्यंग्य हम सब बिकाऊ हैं . यशवंत कोठारी   इधर समाज में तेजी से ऐसे लोग बढ़ रहे हैं जो बिकने को तैयार खड़े हैं बाज़ार ऐसे लोगों से ...

    अफसर का अभिनन्दन - 15
    by Yashvant Kothari
    • (3)
    • 75

    बनते –बिगड़ते फ्लाई ओवर                                           यशवंत कोठारी जब भी सड़क मार्ग से गुजरता हूँ किसी  न  किसी बनते बिगड़ते  फ्लाई ओवर पर नज़र पड़ जाती है.मैं समझ  जाता हूँ ...

    अफसर का अभिनन्दन - 14
    by Yashvant Kothari
    • (4)
    • 51

     धंधा चिकित्सा शिविरों  का ...                      यशवंत कोठारी हर तरफ चिकित्सा शिविरों की बहार हैं. जिसे देखो वो ही शिविर लगा रहा  है. कहीं भी जगह दिखी नहीं की ...

    अफसर का अभिनन्दन - 13
    by Yashvant Kothari
    • (2)
    • 42

    होना फ्रेक्चर हाथ में  ... यशवंत कोठारी आखिर मेरे को भी फ्रेक्चर का लाभ मिल गया.जिस उम्र में लेखकों को मधुमेह ,उच्च रक्त चाप ,किडनी फेलियर ,या स्ट्रोक या ...

    हम हिन्दीवाले
    by dilip kumar
    • (2)
    • 49

    हम हिन्दीवाले (व्यंग्य )अपने कुनबे में हमने ही ये नई विधा इजाद की है ।एकदम आमिर खान की मानिंद "परफेक्शनिस्ट",नहीं,नहीं भाई कम्युनिस्ट मत समझिये।भई कम्युनिस्ट से जब जनता का ...

    दाम्पत्य
    by VIJAY KUMAR SHARMA
    • (5)
    • 171

    दाम्पत्य बात २०१४ के प्रारंभ की है जब नायक की सगाई परिवार जनों की व्यवस्था पद्धति (अरेंज ) से सम्पन्न हो चुकी थी, जहाँ पहली ही मुलाकात में नायक-नायिका ...

    अफसर का अभिनन्दन - 12
    by Yashvant Kothari
    • (1)
    • 46

    आओ अफवाह उड़ायें   भारत अफवाह प्रधान देश है। अतः आज मैं अफवाहों पर चिन्तन करूंगा। सच पूछा जाए तो अफवाहें उडा़ना राष्ट्रीय कार्य है और अफवाहें हमारा राष्ट्रीय ...

    छुपी सच्चाई
    by Smit Makvana
    • (7)
    • 106

    छुपी सच्चाई मेने अपने दोस्त(राहुल) को फोन करके अपने साथ बुला लिया ताकि कोई समस्या आये तो हम दोनों एक दूसरे को संभाल शके। राहुल की फिटनेस बहुत ही ...

    एक सच : आरंभ ही अंत
    by Smit Makvana
    • (10)
    • 121

    एक सच: आरंभ ही अंत  PART-1 में(निखिल) कॉलेज में था, पापा(जगदीसभाई)  काम पर और माँ(रवीनाबेन)  घर पे, छोटा भाई(आयुष) भी स्कूल में गया था। सोमवार से लेकर शनिवार तक हम लोगो ...

    अफसर का अभिनन्दन - 11
    by Yashvant Kothari
    • (4)
    • 32

    व्यंग्य सफल और स्वादिष्ट श्रद्धांजली                                   यशवंत कोठारी साहित्य के भंडारे चालू आहे.कविता वाले कविता का भंडारा कर रहे हैं,कहानी वाले कहानी के  भंडारे में व्यस्त है. नाटक वाले ...

    अफसर का अभिनन्दन - 10
    by Yashvant Kothari
    • (3)
    • 62

    लू में कवि                                   यशवन्त कोठारी           तेज गरमी है। लू चल रही है। धूप की तरफ देखने मात्र से बुखार जैसा लगता है। बारिश दूर दूर तक ...

    म्यूजियम में चाँद
    by amitaabh dikshit
    • (4)
    • 65

    “कहते हैं पिछली सदी का चांद  इस सदी जैसा नहीं था” एक बोला. “नहीं बिल्कुल ऐसा ही था”  दूसरे ने पहले की बात काटी. “तुम्हें कैसे मालूम है”  पहले ...

    तीन बेचारे
    by Pushp Saini
    • (24)
    • 318

    लघुकथा ( तीन बेचारे ✍?)~~~~~~~~~~~~~~~"झील किनारे बैठ के सोचू क्यों बचपन तू दूर गया" "अरे यार ! हमने झील किनारे मिलने का कार्यक्रम इसलिए नहीं बनाया था कि तुम "पुष्प ...

    न्युटन का अपराध
    by Ajay Amitabh Suman
    • (12)
    • 177

    अर्जुन अपने 5 भाइयों के साथ मुजफ्फपुर में रहता था। उसके पिता सरकारी मुलाजिम थे । गुजर बसर लायक बामुश्किल कमा पाते थे । अक्सर खाने पीने के लिए ...

    अफसर का अभिनन्दन - 9
    by Yashvant Kothari
    • (3)
    • 48

    सम्माननीय सभापतिजी                                                                                                                                                                                                                                             

    मैं अपने भाई को क्यूँ मरना चाहता था..
    by devendra kushwaha
    • (12)
    • 212

    मैं पिछली सदी में उस साल में पैदा हुआ जब परिवार नियोजन बहुत प्रचिलित नही था और हम दो हमारे दो पर किसी को बहुत विश्वास भी नही था। ...

    हनीमून स्पेशल
    by Ajay Amitabh Suman
    • (26)
    • 483

    रमेश और महेश की मित्रता की मिसाल स्कूल में सारे लोग देते। पढ़ाई या खेल कूद हो, दोनों हमेशा साथ साथ रहते। गिल्ली डंडा हो, कबड्डी या कि पतंग ...

    अफसर का अभिनंदन - 8
    by Yashvant Kothari
    • (4)
    • 74

      साहित्य में वर्कशॉप –वाद   यशवन्त कोठारी   इन दिनों सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में वर्कशाप वाद चल रहा है। भक्तिकाल का भक्तिवाद रीतिकाल का शृंगारवाद, आधुनिककाल के प्रगतिवाद, ...

    आओ चमचागीरी सीखें - व्यंग
    by Deepak Bundela Moulik
    • (10)
    • 150

    कलम दरबारी की कलम से“आओ चमचागीरी सीखें”कसम है उन चम्चगीरों की जिन्होने पूरे देश के कर्मठ लोगों को अपना पालतू बना रखा है…बगैर चमचों के बड़ा आदमी इनके बगैर ...

    कहानी च्युइंग गम की
    by devendra kushwaha
    • (7)
    • 165

    कक्षा छह में मुझे पहली बार पॉकेट मनी यानी जेब खर्च मिलना शुरू हुआ। जेब खर्च के नाम पे 1996 में रोजाना एक रुपया बुरा नहीं था। मैं शायद ...

    अफसर का अभिनंदन - ७
    by Yashvant Kothari
    • (5)
    • 85

      रचनाकारों  के छाया –चित्र                           यशवंत कोठारी इधर मैं रचनाकारों के छाया चित्रों का अध्ययन कर रहा हूँ .वर्षों पहले धर्मयुग में किसी लेखक का फोटो छप जाता ...

    जनता को छलना कितना आसान है
    by Poornima Raj
    • (2)
    • 126

    एक बड़े से मैदान मे नेताजी भाषण दे रहे थे " भाइयों और बहनों यह आपकी सरकार इतनी सुस्त है कि उससे कोई काम नहीं होता , अपराधी खुले ...

    अफसर का अभिनन्दन - 6
    by Yashvant Kothari
    • (5)
    • 94

      दुनिया के मूर्खों एक हो जाओ       यशवन्त कोठारी   बासंती बयार बह रही है। दक्षिण से आने वाली हवा में  एक मस्ती का आलम है। फाल्गुन की ...

    रूम
    by Nimesh
    • (7)
    • 113

    सुबह के नौ बजे होंगे। छुट्टी का दिन था। फ़ोन की घंटी बजी। अंजान नंबर था। उठाया तो देखा उस तरफ कोई  सौहाद्र था। कोई खास जानता नहीं था ...

    लोल
    by Nimesh
    • (3)
    • 86

    एक बच्चा लोल लोल (LOL!!) बोलते हुए अचानक से ज़मीन पे गिर पड़ा। पिता पास हीं बैठे थे, चौंक उठे, अपने फ़ोन के स्क्रीन से नज़र उठा कर बच्चे ...

    अफसर का अभिनन्दन - 5
    by Yashvant Kothari
    • (6)
    • 127

    व्यंग्य-- चुनाव ऋतु –संहार   यशवंत कोठारी हे!प्राण प्यारी .सुनयने ,मोर पंखिनी ,कमल लोचनी,सुमध्यमे , सुमुखी कान  धर कर सुन और गुन ऐसा मौका  बार बार नहीं आता ,इस ...

    अफसर का अभिनन्दन - 4
    by Yashvant Kothari
    • (5)
    • 80

      चुनावी - अर्थशास्त्र                            यशवंत कोठारी   विश्व के सबसे महंगे चुनाव भारत में होने जा रहे हैं .सत्रहवीं लोक सभा के लिए ये चुनाव पैसों की बरसात ...

    पहला घूंट
    by S Kumar
    • (114)
    • 495

    फेसबुक पर हुई दोस्ती के काफी दिन messanger chat के बाद जब उस दोस्त ने मेरी मिलने की इच्छा पर जब अपना इजहार जताया तो मिलने पहुंचते ही जैसे ...