डिटेक्टिव विक्रम - 5 - नाज़िया VIKAS BHANTI द्वारा जासूसी कहानी में हिंदी पीडीएफ

डिटेक्टिव विक्रम - 5 - नाज़िया

VIKAS BHANTI मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी जासूसी कहानी

"रे विक्रम भाई, देख पिछले 3 महीनों में थारी ज़िन्दगी ने क्या से क्या करवट ले डाली है । कहाँ तू डरा डरा घूमता था अब मुलजिम डरे हैं थारे नाम से ।" गिलास में व्हिस्की डालता हुआ गुर्जर ...और पढ़े