**अलिफ लैला: सिंदबाद जहाजी की पहली यात्रा** सिंदबाद ने अपनी संपत्ति को भोग-विलास में बर्बाद कर दिया था और अब वह निर्धन हो चुका था। अपने पिता की बात याद करते हुए, जिसने कहा था कि निर्धनता से मृत्यु बेहतर है, सिंदबाद ने समुद्री व्यापार करने का निर्णय लिया। उसने अपनी बची-खुची संपत्ति बेचकर व्यापारियों से सलाह ली और एक जहाज पर सवार होकर अपना व्यापार शुरू किया। जहाज फारस की खाड़ी से होते हुए यात्रा पर निकल पड़ा। सिंदबाद को समुद्री यात्रा का अनुभव नहीं था, जिससे वह कई दिनों तक बीमार रहा। एक दिन जहाज ने एक सुंदर द्वीप पर लंगर डालने का निर्णय लिया। जब सिंदबाद और अन्य व्यापारी खाना पकाने के लिए आग जलाने लगे, तो द्वीप हिलने लगा। व्यापारियों ने भागकर जहाज पर जाने के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया, यह बताते हुए कि यह द्वीप वास्तव में एक बड़ी मछली है। सिंदबाद जल्दी नहीं कर सका और जहाज चल पड़ा, जबकि वह समुद्र में गिर गया। उसके पास केवल एक लकड़ी थी जिससे वह तैरने लगा। वह एक दिन और एक रात समुद्र में तैरता रहा, जब तक कि एक लहर ने उसे किनारे पर नहीं फेंक दिया। किनारा ढलवा था और सिंदबाद धीरे-धीरे वृक्षों की जड़ों को पकड़ते हुए वहां पहुँचा और बेहोश हो गया। अलिफ़ लैला - 20 MB (Official) द्वारा हिंदी लघुकथा 12.4k 4.4k Downloads 10.5k Views Writen by MB (Official) Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सिंदबाद ने कहा कि मैंने अच्छी-खासी पैतृक संपत्ति पाई थी किंतु मैंने नौजवानी की मूर्खताओं के वश में पड़कर उसे भोग-विलास में उड़ा डाला। मेरे पिता जब जीवित थे तो कहते थे कि निर्धनता की अपेक्षा मृत्यु श्रेयस्कर है। सभी बुद्धिमानों ने ऐसा कहा है। मैं इस बात को बार-बार सोचता और मन ही मन अपनी दुर्दशा पर रोता। अंत में जब निर्धनता मेरी सहन शक्ति के बाहर हो गई तो मैंने अपना बचा-खुचा सामान बेच डाला और जो पैसा मिला उसे लेकर समुद्री व्यापारियों के पास गया और कहा कि अब मैं भी व्यापार के लिए निकलना चाहता हूँ। उन्होंने मुझे व्यापार के बारे में बड़ी अच्छी सलाह दी। उसके अनुसार मैंने व्यापार की वस्तुएँ मोल लीं और उन्हें लेकर उनमें से एक व्यापारी के जहाज पर किराया देकर सामान लादा और खुद सवार हो गया। जहाज अपनी व्यापार यात्रा पर चल पड़ा। Novels अलिफ़ लैला फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी और बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रिय... More Likes This प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी