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  • #Friendship Story
    Title: आत्मग्लानि

    वर्षों पश्चात् हमजोली से भेंट हुई ,मानो बादलों में जैसे चाॅंद निकल आया हो। अपने घर में मित्रों को साक्षात् देख फूली नहीं समाई। रीमा, निशा और पूजा सभी चाय-नाश्ता हॅंसी मजा़क व मोबाइल में उस पल को कैद भी कर रहे थे। पूजा को शाम को ही हरिद्वार पितृ पूजा के लिए भी निकलना था। पर मैं सिर्फ अपनी खुशी के आगे नासमझी कर बैठी, भोजन खाकर जाने की मेरी ज़िद ने उसे रो कर आग्रह करने को विवश कर दिया कि ‘कृपया मुझे मत रोक बस।‘ वो कुछ परेशान होकर दिल्ली से निकली। मैं आत्मग्लानि नहीं सह पाई और माफी माॅंग कर अपनी मित्रता को ऊपर रखा।

    ............................ अर्चना सिंह जया

  • #friendship story
    दोस्ती
    नदी किनारे झोपड़ी में एक बुढ़िया रहती थी। वरुण नामक उसे पोता था। वह रोज उसे उपदेश देती कि अनजाने दोस्ती मत करो। दोस्ती सदा निभाओ।
    वरुण नित्य पेड़ के निचे नदी के किनारे खेल रहा था। उसी पेड़ पर एक तोता था। धीरे-धीरे दोने में दोस्ती हुई। तोता वरुण के लिए पका मिठा फल गिराता था। वरुण फुलाया चना उसे खिलाता था। समय बितता गया, दोनों कि दोस्ती गहरी होती गई। दोनों कि दोस्ती देख लोग कहने लगे मनुष्य की अपेक्षा पशु-पक्षी की दोस्ती अटुट होती है। पशु-पक्षी हमारे अभिन्न मित्र है। इनपर दया करना हमारा धर्म है।