મારા વિચારોનું નામ એટલે મારી વાર્તા , કવિતા.

વિશ્વાસ

જેમ શ્વાસ લેવા માટે પણ એક સ્વાર્થ હોય છે જીવવાનો,
તેમ સંબંધોને પણ જીવવા માટે સ્વાર્થ હોય છે વિશ્વાસનો,

અફસોસ નથી રહ્યો એ સ્વાર્થ,હવે એ નિસ્વાર્થ મળવાનો,
શબ્દો શબ્દોએ હવે,જાણે કેવો શબ્દોનો ભરોસો કરાવાનો.

-બિંદીયા

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रास्ते पे चलते हुए एक पहचान सी मिल गई,
मेरा हाथ पकड के मेरी मंज़िल पे वोह ले गई,

ना थी कोई कमी जिंदगी मे, फिर भी हो गई,
वक़त ने सब कुछ दिया, मुस्कान ही खो गई,

सहोरत मिली, नाम मिला, खुद ही खो गई,
सब को खुशीयां बांटी, और अपनी ही खो गई,

-बिंदिया

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तसवीरे ही हमारी यादों को, ज़िंदा रखती है
हम रहे ना रहे, हमारी मौजुदगी बया करती है

-बिंदिया

Bindi Panchal લિખિત વાર્તા "રવિદ્રષ્ટિ " માતૃભારતી પર ફ્રી માં વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19877824/ravidrashti

कारोबार प्यार का

चाहतो का सिलसिला सदियों से चलता तो है,
इश्क़ में मरने का जुनून पर हर कीसी मे नहीं है,

रुठना और मनाना एक रिवाज बन गया है,
असल मे करीब आने का बहाना बन गया है,

तू छोड़ के जाएगा मर जाएंगे, पुराना हुआ है,
तेरे बाद किसी और पे मरेंगे, ये हाल हुआ है,

पेड़ के पीछे  प्यार करने वाले मीलते होते है,
अब किसी लड़की का बिगडा शरीर मिलता है,

शरीर में  चाहे शक्कर भले ही अब कम हुई है,
बातों में मीठा ज्यादा और फंसाने का जहर है,

चाहते पहले खुदा की परछाई समझते लेते है,
अब जिस्म की आग बुझाने का कारोबार ही है,

मील जाता है सच्चा कोई इस जमाने अगर है,
ना टिकेगा, तूट जाएगा, जमाना पत्थर बन गया है।

बिंदी पंचाल "बिंदिया"

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हसीन पल को संभालना,
हमने कभी नहीं शीखा,
चाँद सा महबूब मिला,
हमारी किस्मतने ही धोखा दिया

-बिंदिया

કલમ કિતાબ ને કયાં હું
નહોતો એક બીજાને કોઈ સંબંધ
જ્યાં ભાર વધ્યો હૃદયનો
બન્નેનો સહારો મળી ગયો


-બિંદીયા

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मेरी तरह मेरे सपने भी उनके दिवाने है
आंख मेरी होके भी ख्वाब में वही आते है


-બિંદીયા