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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
6 दिन पहले

अब क्या कहें,
क्यों रात आयी है ।
ख्वाब संग हर याद की,
बारात आयी है ।
मैं चिलमन उठा,
उनके दीदार करता हूँ ।
इस उम्र में खुद ही खुद से,
कुछ प्यार करता हूँ ।

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी गीत
1 सप्ताह पहले

"मेरी परछाई"
                     💐💐💐💐💐

बहुत दिनों के बाद खुशी एक आई थी,
सामने थी वह खड़ी मेरी परछाई थी ।

जब मैंने उससे हाथ मिलाना चाहा तो,
वह नयी-नयी दुल्हन जैसे शरमाई थी ।

मेरी ज़िद थी आज वो आस न तोड़ेगी,
पर देखा वह भी साथ किसी के आई थी ।

उसकी ज़िद से हार गया मैं रूठ गया,
ढली साँझ तो बिछुड़ के वह पछताई थी ।

बहुत दिनों के बाद खुशी एक आई थी,
सामने थी वह खड़ी मेरी परछाई थी ।

भूपेन्द्र डोंगरियाल
08/02/2020

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
2 सप्ताह पहले

चला जो कोई ख़ुशी की चाह में,
आए दुःख भी उसी की राह में ।

Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
3 सप्ताह पहले

मैं सुकरात,प्लूटो,कन्फ्यूसियस जैसा कोई विचारक तो नहीं,लेकिन गाँधी के भारत का एक आम नागरिक हूँ । जो आज इस बात से दुःखी है कि हिन्दुस्तान को धर्मनिरपेक्ष देश बनाना क्यों ज़रूरी समझा गया । जबकि पाकिस्तान मुस्लिम देश बना । इसके बाद बांग्लादेश भी मुस्लिम देश बना । लेकिन भारत अपनी टूट-फूट सहकर भी विश्व को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ा रहा है ।

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

रफ़्ता-रफ़्ता मैं चलाता हूँ कलम,
तुम्हें देख कर ही मैं बढ़ाता हूँ कदम ।
जो तुम न देते साथ इस अन्जान का,
हक़दार मैं कभी था नहीं इस मान का।
💐💐🙏💐💐
🙏भूपेन्द्र डोंगरियाल🙏

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

है खुशी की बात ये,
हैं होशियार लोग सब।
यहाँ आता नहीं काम,
कोई किसी के अब।।
मैंने समझा जिसे यहाँ,
आज तक अपना खुदा ।
ज़रूरत पड़ी उसकी मुझे,
वह भी हुआ जुदा-जुदा ।। 💐💐🙏💐💐 ।भूपेन्द्र डोंगरियाल।

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 महीना पहले

हाँ यही जिन्दगी है

कभी वासन्ती फूल खिले,
कभी घनघोर घटा है ।
जब-जब चटक धूप खिली,
कुहासा तभी हटा है ।
पूछता पथिक अंततः,
क्या यही जिन्दगी है ?
देखकर कहता यही,
हाँ यही जिन्दगी है ।

ये दौडम भाग क्यों,
जिन्दगी को ललकारती है?
अच्छी-बुरी राह का,
इन्सान अपना सारथी है ।
काया चमकती रही,
उर में बसी गन्दगी है।
देखकर कहता यही,
हाँ यही जिन्दगी है ।

भूपेन्द्र डोंगरियाल
12/01/2020

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी प्रेरक
1 महीना पहले

सुबह को दुआ,
रात को सलाम कीजिए ।
अपने टूटे हुए दिल का,
कुछ तो एहतराम कीजिए ।
नफ़रतें तो ताउम्र जिंदा रहेंगी,
आओ पहले उनका काम तमाम कीजिए।।
💐💐🙏💐💐
भूपेन्द्र डोंगरियाल

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी रोमांस
1 महीना पहले

खुद के इश्क़ के चर्चे, ख़ुद से न कर "साथी"।
तेरी बर्बादियों की महफ़िल सजे,
हसरत उनकी भी ऐसी हैं ।।
💐💐🙏💐💐
भूपेन्द्र डोंगरियाल

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Bhupendra Dongriyal बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 महीना पहले

एक दिन,फिर एक दिन ।
हो गए सब नेक दिन ।।
दर्द भी उठता रहा,
मेरे उर हर एक दिन

वह हँसी मुझे देख कर,
मैं रोता हूँ उसे अब देख बिन ।
एक दिन,फिर एक दिन ।
हो गए सब नेक दिन ।।
💐💐🙏💐💐
भूपेन्द्र डोंगरियाल
08/01/2020

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