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तुजे याद करके जागना...
तुजे याद करके सोना...
तुजे याद करके हसना...
तुजे याद करके रोना...
कितना आसान है ना
तेरा दूर रहेकर भी
मेरे पास होना...
bhavna

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अब तेरे मिलने
ना मिलने से क्या होगा...
हम तों अब खुद से भी
बहोत दूर निकल गयें हैं...
bhavna

कुछ इस तरह से उन्हे
हम चाहेंगे...
एक वक़्त ऐसा भी
आयेगा के...हम
उनके लिए जरुरी नहीं...
उनकीं जरूरत बन जायेंगे...
bhavna

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यह सोच कर
जागते रहे
रात भर...के
किस तरह कटते होंगे
मेरे बगैर दिन उनके...
bhavna

केसे कहुँ तुम्हे के...
जितने अहेसास
तेरे लिए मेरे दिल में है...
bhavna
उतने तो शब्द भी
नहीं होंगे किताबों में...

इतनी दूरीओ में भी
हमारे बीच
प्यार जिन्दा रहा
अगर पास होते तो
क्या कमाल होता...
bhavna

थोड़े गुस्से वाले तुम
थोड़े नादान है हम...
पर जेसे भी है
एक दूसरे की जान है हम...
bhavna

अगर दिल से साथ निभाने का इरादा हो...
तो हीं किसी से कोई
वादा करो...
किसी को यु किनारे पर
ला कर डूबाया ना करो...
bhavna

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प्यार से भी ज्यादा ताकत
मजबूरी में होती हैं
इसलिए शायद...
नजदीकियों में भी
दूरी होती हैं...
bhavna

कुछ ख्वाब थें जो
उसने तोड़ दिये
ओर जो बाकी थें वो
हमने देखने हीं छोड़ दियें...
bhavna