"બેનામ"

अब तेरे शहेर से जाया भी नहीं जा सकता,
और तुझे अपना बनाया भी नहीं जा सकता,

एक ही चहेरा बसा रखा है इन आंखों में,
दूसरा कोई बसाया भी नहीं जा सकता।

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मामूली सा सवाल हूँ
"मैं"

और लोग कहते_हैं..
तेरा...
जवाब नहीं...

@बेनाम

कहीं पर जग लिए तुम बिन, कहीं पर सो लिए तुम बिन,
भरी महफिल में भी अक्सर, अकेले हो लिए तुम बिन,

ये पिछले चंद वर्षों की कमाई साथ है मेरे,
कहीं फिर हस लिए तुम बिन, कहीं फिर रो लिए तुम बिन..!

@अज्ञात

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तुम
चांदनी
मै एक सितारा
हजारों है ख्वाहिश
तुम पे ही मै दिल हारा।

@बेनाम

वो अगर शाम है तो उसे ठलना चाहिए,
वो अगर शमा है तो उसे जलना चाहिए,

वो अगर इश्क है तो मुकदर होना चाहिए,
वो अगर बेवफ़ा है फिर तो उसे रोना ही चाहिए।

@बेनाम

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तुम
गुलाब,
मै एक कांटा,
नजदीक है दोनों
फिर भी अंतर ज्यादा।

अगर वो शमा है तो फिर जलती क्यों नहीं ?
अगर वो नदी है तो फिर बहती क्यों नहीं ??

माना कि मेरे शब्द उसको छु जाते है,
अगर उसे पसन्द है तो फिर कहते क्यों नहीं?

@बेनाम

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मुजको ऐसा लगता है हो गया हूं कुछ मै भी,

दोस्तो को अब मेरी शख्सियत खटकती है ।

@अज्ञात

जिस वक्त तुम्हारी हसरत थी मुझे, तुम्हे आ जाना था,

अब तो तू खुदा भी बन जाए मै तेरा सजदा न करू ।

@बेनाम

उसे लगता है मै एक पत्थर हूं जिसे खेला जा सकता है,


बेनाम कोई जाकर बताओ हम भी इंसान है हमें भी दर्द हो सकता है।

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