आज फिर में सपने देखता रह गया और रात गुजर गई!
शाम के टिमटिमाते तारे गिनता रहा और सुबह हो गई !!
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आसमान से गिरते तारे में ढूंढता रहा और दुआएं अधूरी रह गई !
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मैं सपनों में उनको देखता रहा और वह आंखों से दूर होगी
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मैं दुआ में उनको मांगता रहा और वह किसी और की हो गई !!
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मैं इंतजार करता रहा और जिंदगी गुजर गई
............-Bharat Rabari
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हम तो आपके प्यार मे घायल हो के बेठे है
बदले तो कुछ नहीं पर आपको पाने के खातिर तुफ़ानो का दरिया दिल मे छुपा के बेठे है!!
........-Bharat Rabari
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