बस एक आवारा

Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
10 महीना पहले

कभी अपनों ने लूटा
कभी परायों ने लूटा
मैं क्या मुल्के हिन्दुस्तां था
जिसने चाहा उसने लूटा।

Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 साल पहले
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

है ख्वाहिशों की खलिश इतनी कि मर जाने दे।
तू भी जीने की वजह मत बन मुझे मर जाने दे।

अब यहां कोई आश्ना सा लगता नहीं है मुझको
अस्क़ाम अश्क़िया इश्क हूँ मैं मुझे मर जाने दे।

न साथ दे तू मेरा तुझे भी कभी जुए में लगा दूँगा
जुआरी हूँ लुटा हुआ पास न आ मुझे मर जाने दे।

जिस अस्हाब का अब्द था कत्ल कर दिया उसका
खुदा भी नहीं रहा कोई जहां में मुझे मर जाने दे।

मुझे न सिखायो इश्क के उसूल और वफ़ा के सबब
टूटा यकीं ऐसा खुदी पर नहीं होता मुझे मर जाने दे।

जो उसने कहा था वही सब तो तुम भी कहती हो
चली जाओ बाद जाने के तुम भी मुझे मर जाने दे।
#आवारा

और पढ़े
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 साल पहले
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 साल पहले
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

सबको समस्याएं हैं
किसी न किसी को लेकर
किसी न किसी से
मुझे भी समस्या है
मेरी समस्या मैं स्वयं हूँ
किसी अंधेरे कालकोठरी के कफ़स में कैद
जो खुद को वर्षों पहले छोड़ आया है
पीछे
वजह, शायद कुछ नहीं
अगर होगी भी तो बेवकूफी भरी
इतनी कि किसी से कह भर तो पत्थर पड़े
कभी हँसता हूँ
किसी चुटकुले पर नहीं, खुद पर
मेरे लिए मुझसे बड़ा उपहास कोई केंद्र नहीं
थोड़ी अजीबियत से भरा
हर पल ख्वाबों की उधेड़बुन में लगा हुआ
मृत्यु की कामना लिए
जी रहा हूँ
वैसे अगर सच कहूं तो
मैं मार देता हूँ खुद को
दिन में कई दफा जिंदा करके
एक सांस भरता है जिस्म
मैं रेत देता हूँ गला
दो पंख खिलती है मुस्कान
मैं चीर देता हूँ होंठ
एक फलांग उछलती है कामना
मैं फेंक पाश ला पटकता हूँ जमीन पर
दबा देता हूँ हज़ारों फीट गहरे गड्डे में
मुझे डर लगता है सपने देखने से
हर ख़्वाब मेरे गले में फांसी का कसता फंदा है
मेरी स्वास गति रोकता हूँ
मेरे कृत्य, महान, नहीं बहुत महान
जिनकी वजह से हो गयी है खुद से घृणा
मेरे वादे, किसी और से नहीं, खुद से किए
टूटे हैं
वेश्या से दिल लगा बैठे किसी आशिक के दिल से
और अब मैं, मैं नहीं बचा
जो बचा है वह सिर्फ एक हत्यारा है
जिसने खुद का धीरे-धीरे कत्ल किया है
मंदिर के पीछे बने किले की अंधेरी कोठरी में
एक धार-धार छुरे से
इतने प्यार से कि अफसोस दूर तक नहीं
बस है तो अपार सुकून
कैसा! नहीं जानता।
-बिनीश कुमार
#kavyostav -2
#काव्योत्सव -2

और पढ़े
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 साल पहले
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

मैं खाना बनाता हूँ
बर्तन धोता हूँ
हर काम को
कोशिश करता हूँ करने की
उसी नफ़ासत के साथ
जिसके साथ माँ करती है
माँ जैसी गोल रोटियां बनाना
साफ कपड़े धोना
पोंछा लगाना
बर्तन ऐसे धोना की आईना बन जाए
और भी बहुत कुछ
जो घर को घर सा बनाए रखने के लिए जरूरी है
फिर भी न जाने क्यों
तमाम कोशिशों के बावजूद
माँ जैसा नहीं कर पाता हूँ
हर काम में कुछ अधूरा पन रह जाता है
और मैं लाख पानी में डुबकियां लगाने के बाद भी
रह जाता हूँ
बर्तनों पर जमें साबुन की तरह
मां हमेशा रखती है परिवार को खुश
किसी फूली हुई मुलायम गोल रोटी की तरह
और मैं
रोटी से बने त्रिकोण के जैसे
मेरी माँ उतराती है
दूध के ऊपर मलाई की तरह
सचमुच मेरी माँ के हाथों में जादू है
मैं माँ सा होना चाहता हूँ।

-अवकेश कुमार प्रजापति
#kavyotsav -2

और पढ़े
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

मैं आजकल अकेला रह रहा हूँ
परिवार है
मैं जीवन की तलाश में दूर निकल आया हूँ
इसका जिम्मेदार मैं अकेला नहीं हूँ
वह भी हैं
बस दूर निकलते-निकलते
कुछ ज्यादा ही दूर निकल गया हूँ
खुद से भी दूर
अंधेरों तक
शायद यह जरूरी था
खैर, जीवन के उपागम में
भोजन, स्वास और हृदय
द्वंदात्मक दिखते हैं मुझे हर पल
मेरा इस द्वंद का हिस्सा नहीं है
मेरा परिवार तो राहत की वह दवा है
जो रोगी को सुकून देती है
हालांकि आजकल यादों के सिरप से काम चलना पड़ता है
सिरप थोड़ा कड़वा है
और आँसू पोंछने के लिए मां का पल्लू भी नहीं है।
-अवकेश कुमार प्रजापति
#kavyotsav -2

और पढ़े
Avkesh kumar prajapati बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 साल पहले