एम.ए. हिंदी हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी और लेख प्रकाशित।  हिंदी की पाठ्य पुस्तक कक्षा-4 मुस्कान में हमारी अंतरा नामक कहानी प्रकाशित। मानव मैत्री मंच द्वारा 2003 में नवोदित कवि के सम्मान से सम्मानित। 2016 में स्वरचित काव्य-संग्रह मेरी अनुभूतियों में प्रकाशित।

Asha Rautela बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

1. मेरी अभिलाषा

मैं भी महसूस करना चाहती हूँ माँ
जो तुमने महसूस किया था
जब मैं तुम्हारे उदर में आई
क्या परिवर्तन हुआ तुम्हारे जीवन में
मैं भी वही परिवर्तन
अपने जीवन में चाहती हूँ
क्या होता माँ बनने का सुख
मैं यह जान न पाई
पर मैं भी जानना चाहती हूँ माँ
तुम तो सब जानती हो माँ
फिर कुछ क्यों नहीं करती
आज फिर तुम मेरे लिए
भगवान से क्यों नहीं लड़ती
क्यों तुम मेरी किस्मत नहीं बदलती
क्या माँ तुम भी बदल गई हो
मेरे लिए औरों की तरह
-आशा रौतेला मेहरा

2. मेरी गुड़िया

मेरी गुड़िया तुम आ जाती एक बार
धूल जाता मेरे जीवन से गमों का भार
मैं भी तुम संग बच्ची बन जाती
बचपन को फिर मैं अपने वापस बुलाती
तुम आ जाती एक बार मेरी गुड़िया
तुम आ जाती एक बार
प्रश्नचिह्न लगा है आस्तित्व पर मेरे बेटी
मातृत्व मेरा चित्कार कर रहा है
तुझे पाने की गुहार कर रहा है
नहीं सहे जाते मेरी गुड़िया
इस दुनिया के ताने अब
बिन अपराध के मैं सजा काट रही हूँ
अपना दुख नहीं किसी से बाँट रही हूँ
किससे कहूँ कोई नहीं समझेगा मेरी व्यथा
इसलिए नहीं कहती हूँ किसी से मैं अपनी कथा
तुम जब आओगी मेरे आँंगन में
तुमसे बाँचूगी मैं अपना सुख-दुख
जो बरसों से समाहित हैें मेरे भीतर
निकल जायेगा मेरे जीवन से वो सारा विषाद
तुम आ जाओ एक बार मेरी गुड़िया
तुम आ जाओ एक बार।
-आशा रौतेला मेहरा

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Asha Rautela बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 साल पहले

समय नहीं है

सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
समय तो सबके पास है
पर अब पहले की तरह आत्मीयता न रही
रिश्तों में गहराई न रही
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
सब अपनी ही दुनिया में खोए हुए हैं
किसी के पास किसी के लिए फुरसत ही नहीं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
कभी फेसबुक पर तो कभी व्हाटसअप और कभी ट्यूटर
पर लगे हुए हैं
एक कमरे में बैठे दो लोग अजनबी बन गए हैं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
पहले हृदय धड़कता था
किसी अपने के लिए
अब वह धड़कता पैसे के लिए
धनवानों के हर रिश्ते हैं यहाँ
गरीब को कोई पूछता नहीं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब

देवभूमि की व्यथा

मैं व्यथित हूँ-मेरे पुत्र, पुत्रियो
तुम मुझे छोड़़कर चले गए
नाम कमाने, दाम कमाने
भूल गए तुम इस मिट््टी को
जिस पर लोट-लोटकर तुमने अपना बचपन बिताया
हाय! फिर क्यों तुमने अपना उत्तराखंड भुलाया
तुम रच गए पश्चिमी संस्कृति में
अपनी हस्ती ही मिटा डाली
मुझे तो चिंता है तुम्हारी
मैं माँ, जन्मभूमि हूँ तुम्हारी
क्या तुम मुझे बचाने नहीं आओगे
अपनी गरज जब होती है
तुम आ जाते हो पहाड़्
पूजा की तुमने, छप्पन भोग लगाया
धन-धन्य से भर दिया मेरा संसार
पर तुम नहीं समझते मेरे बच्चो
तुम ही तो हो असली में मेरा संसार
मैं तुम्हारी माँ तुम्हें कैसे भुलाऊँगी
तुम छिद्रित करोगे मेरा हदय
तो भी मैं तुम्हें हदय से लगाऊँगी
कुछ नहीं चाहती मैं तुमसे बेटा!
तुम लौट आओ पहाड़़
बंजर होती इस धरती पर
तुम अपने नन्हें कदमों से फिर ला दो बहार
-आशा रौतेला मेहरा

समय नहीं है

सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
समय तो सबके पास है
पर अब पहले की तरह आत्मीयता न रही
रिश्तों में गहराई न रही
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
सब अपनी ही दुनिया में खोए हुए हैं
किसी के पास किसी के लिए फुरसत ही नहीं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
कभी फेसबुक पर तो कभी व्हाटसअप और कभी ट्यूटर
पर लगे हुए हैं
एक कमरे में बैठे दो लोग अजनबी बन गए हैं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब
पहले हृदय धड़कता था
किसी अपने के लिए
अब वह धड़कता पैसे के लिए
धनवानों के हर रिश्ते हैं यहाँ
गरीब को कोई पूछता नहीं
सब कहते हैं मेरे पास समय नहीं है
अरे! झूठ बोलते हैं सब

देवभूमि की व्यथा

मैं व्यथित हूँ-मेरे पुत्र, पुत्रियो
तुम मुझे छोड़़कर चले गए
नाम कमाने, दाम कमाने
भूल गए तुम इस मिट््टी को
जिस पर लोट-लोटकर तुमने अपना बचपन बिताया
हाय! फिर क्यों तुमने अपना उत्तराखंड भुलाया
तुम रच गए पश्चिमी संस्कृति में
अपनी हस्ती ही मिटा डाली
मुझे तो चिंता है तुम्हारी
मैं माँ, जन्मभूमि हूँ तुम्हारी
क्या तुम मुझे बचाने नहीं आओगे
अपनी गरज जब होती है
तुम आ जाते हो पहाड़्
पूजा की तुमने, छप्पन भोग लगाया
धन-धन्य से भर दिया मेरा संसार
पर तुम नहीं समझते मेरे बच्चो
तुम ही तो हो असली में मेरा संसार
मैं तुम्हारी माँ तुम्हें कैसे भुलाऊँगी
तुम छिद्रित करोगे मेरा हदय
तो भी मैं तुम्हें हदय से लगाऊँगी
कुछ नहीं चाहती मैं तुमसे बेटा!
तुम लौट आओ पहाड़़
बंजर होती इस धरती पर
तुम अपने नन्हें कदमों से फिर ला दो बहार
-आशा रौतेला मेहरा

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Asha Rautela बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ संध्या
2 साल पहले

सबको नया संसार मिले

मिले तो बस सबका प्यार मिले

रहे आपस में सब मिलकर

हर दिन नई बहार मिले

Asha Rautela बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी ब्लॉग
2 साल पहले

सबको नया संसार मिले

मिले तो बस सबका प्यार मिले

रहे आपस में सब मिलकर

हर दिन नई बहार मिले