हिन्दी एम.ए., बी.एड.। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती हैं। कुकिंग, चित्रकारी, कविता व कहानी लेखन, संगीत आदि में रुचि । 16 वर्ष तक हिन्दी अध्यापिका का कार्य भी कर चुकी हूँ।

Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी लोक संगीत
4 दिन पहले

🌸🙏🌸

राम लला के गीत गाओ री
जय राम,श्री राम में रम जाओ री।

सरयू तट पर हुई भीड़ भारी,
धन्य हुई है अवध हमारी,
ईंट ईंट राम की है आभारी
झूम रहे बच्चे, बूढ़े, नर-नारी,
माटी माटी से आवाज आई
बस 'राम नाम है सुखदाई।'

राम लला के गीत गाओ री।
जय राम,श्री राम में रम जाओ री।

भूमि पूजन,पुष्प,तिलक कर
राम, राम की जयकार लगा।
राम नाम ही है सत्य साईं,
रोम रोम में राम समायी,
तीन अक्षर में जग रमायी,
परम आनंद इस नाम में भाई।

राम लला के गीत गाओ री।
जय राम,श्री राम में रम जाओ री।

भक्ति रस में डूबी नगरी सारी,
सियाराम की छवि लागे प्यारी।
राम धुनी तन मन में रमाई।
धन्य-धन्य हुए अवध बिहारी।।
धरती अंबर में है गुंजायमान,
तन मन में रम गए सियाराम।

राम लला के गीत गाओ री।
जय राम,श्री राम में रम जाओ री।

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
6 दिन पहले

वक्त का खेल

कितने मजबूर हो गए हम,
पास होकर भी दूर हो गए हम।
बीत गई 'होली' बस यूं ही,
न चढ़ा रंग प्रेम का सोचो।
दूरियां बढ़ा ली मानव ने,
वक्त ने रचा खेल है देखो।
'कोरोना' ने ज़िद कर ठानी,
इस दफा झुकेगा अहम तुम्हारा।
मानव को नया सबक मिलेगा,
प्रेम, विछोह को शायद समझेगा।
'ईद पर्व' भी कुछ इस तरह मनाई,
घर पर ही नमाज़ अदा कर,
खीर-पकवान की थाल सजाई।
बंद दीवारों में थोड़ी रौनक आई।
दूजा पर्व आ गया अनोखा,
बहन-भाई का स्नेह बंधन ऐसा,
डोरी,रोली व चंदन के जैसा।
पर इस वर्ष में किसने था सोचा
राखी बेबस पड़ी थाल में,
इंतजार की घड़ी हुई है लंबी।
जाने कब महामारी छटेगी?
एक जुट हो त्योहार करेंगे,
मिलकर हम सब फिर झूमेंगे।
वक्त की मार से जो मानव सीखे,
स्नेह,प्रेम संग से गर रहना सीखें।

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ संध्या
2 सप्ताह पहले

🙏🌧️☔
सावन मन भावन है।
बरखा की बूंदों में,
शीतल पवन के झोंंकों में,
बादलों के घेरों में,
कोयल के गीतों में,
सावन मन भावन है।
अमिया के झूलों पे,
नदियों के उफान पे,
खेतों की हरियाली पे,
मेहंदी हथेली पे,
सावन मन भावन है।
सखियों की टोली संग,
धानी चुनरी के संग,
खनकती चूड़ियों संग,
छतरी हमजोली संग,
सावन मन भावन है।

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

कविता ✍️ मुझे यकीन है

मुझे यकीन है
तुम इक दिन समझोगे।
जब आॅंखें कमज़ोर हो जाएॅंगी,
मन का कोना खाली हो जाएगा,
आॅंगन भी सूना हो कोसेगा,
दीवारों में दरारें दिखेंगी,
मुस्कान मेरी तुम खोजोगे।
मुझे यकीन है
तुम इक दिन समझोगे।
गुजरा वक्त याद आएगा,
तन्हा पहर भी ढल जाएगा,
गुलाबी शाम फिर रुलाएगी,
बस धुॅंधली होंगी यादें पुरानी,
आॅंसुओं से होंगी पलकें गीलीं।
मुझे यकीन है।
तुम इक दिन समझोगे,
पुरानी तस्वीरों में ढूॅंढोगे,
रंगोली के रंगों में खोजोगे,
गलियारों सड़को पर
तन्हाॅं गुम हो भटकोगे।
भीड़ में भी रहोगे अकेला
फिर मेरी मोहब्बत को तरसोगे।
मुझे यकीन है।
........ अर्चना सिंह जया

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
1 महीना पहले

✍️😃
उन्नीस बीस का अंतर
इस वर्ष ने अच्छे से समझाया।
छोटे-बड़े झटके रह-रह
जीवन को महसूस है कराया।

🙏🌸
कुछ नहीं रखा है 'मैं' में
खाली हाथ लौटना है वहां।
सफ़र है जिंदगी, मंजिल नहीं
जी ले इक-इक पल यहां।

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले

🙏✍️🌸
मायानगरी है ये दुनिया ही
नकाब पहना है सबने यहां।
उम्दा कलाकार हैं हमसभी
सच से चुराकर आंखें देखो,
कृत्रिम जीवनशैली को
समझ बैठे हैं वास्तविक जहां।
यथार्थ से होकर दूर हम
भटक गई हैं राहें कहीं।
औरों की झूठी तसल्ली के लिए
खुद को गिरवी रखते हैं सभी।
'मकान बहुत ही सुन्दर है'-
ऐसा सभी कहते हैं यहां।
दीवारों पर लगी पेंटिंग,
रंग बिरंगी टंगी तस्वीरें
खूबसूरती को हैं बढ़ाते।
पर मन एक कोना फिर भी
रह जाता खाली कहीं यहां।
इसे सजाएं कैसे, कहो अब
खुशियां, ठहाके,रिश्ते,प्यार
सहज मिलते नहीं बाजारों में।
हां, दर्द को छुपाया मुस्कानों से
तनहाई को सजाया गीतों से
ऊंचाई को छूने की चाहत ने
साथ छुड़ाया अपनों से।
सौहरत,दौलत, मकान, गाड़ियां
पाकर भी मैं रहा अकेला जहां।
विचित्र है ये दुनिया यारों
सब पाकर भी कभी कभी
खुश नहीं हो पाता मानव यहां।
तलाश खत्म होती नहीं उसकी
खुद को खो देता है वो यहां।
जिंदगी इक पहेली सी
जाने क्यों हरपल लगती यहां?
खुद की खुशी है जरूरी,
न करना खुदकुशी कभी यहां।
.....अर्चना सिंह जया

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
2 महीना पहले

🙏😃✍️
सबके प्रिय होने वाले ही मौत के प्यारे भी होते हैं,
दिल में दर्द और होंठों पर मुस्कान सजाए होते हैं।

Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
2 महीना पहले

धिक्कार है तेरा

मैं गजानन पूज्यनीय
क्या गुनाह किया मैंने?
हां, शायद बुद्धिजीवी पर
कर बैठा विश्वास मैंने।
नहीं की थी कल्पना कभी
अमानवीय व्यवहार की।
मेरे जीवन के साथ ही
कर बैठा निर्मम हत्या
मेरे गर्भ में पल रहे,
मासूम नन्हें सुमन की।
क्यों कर्म हीन,भाव हीन
हो गया है मानव?
जानवर हैं हम
पशुता का व्यवहार
दर्शाता है तू क्यों?
कब अपराधबोध हो
समझ सकेगा तू ?
उसके ही दुष्कर्म का
परिणाम है आज
प्राकृतिक, जैविक आपदा।
मानव के संग
पेड़ पौधे ही नहीं
पशु पक्षी,जीव जंतु भी
धरोहर हैं इस धरा की।
बेजुबान हैं हम पर
हिय में है स्नेह अपार।
क्रूरता कितनी भरी है
तेरे हृदय में बता।
धिक्कार है तेरे
मानवता होने का,
शर्मसार कर दिया
आज फिर इंसानियत का।
वैहशी हो चला है मानव
क्यों अधर्मी है हो रहा?

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Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ संध्या
2 महीना पहले

# meaning
सुध न ली जब सांस के साथ आस जिंदा थी,
मातम में आकर चेहरा दिखाने का अर्थ क्या?

Archana Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
3 महीना पहले

# शूरवीर

किसान,मजदूर, सैनिक,
सफाई कर्मचारी और
अब तो डाक्टर, नर्स भी
शूरवीर कहलाने के हुए हकदार।
कल, आज और कल
देश करेगा सदा इन पर नाज।

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