मुझको मेरे वजूद की हद तक न जानिए, बेहद हूँ बेहिसाब हूँ बेइन्तहा हूँ मैं। गुजरे हुए लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,  प्यास गहरी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ, हक़ से दो तो तुम्हारी नफरत भी कबूल हमें,  खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें। हमारे दिल में भी झांको अगर मिले फुर्सत,  हम अपने चेहरे से इतने नज़र नहीं आते। मेरी सादगी ही गुमनामी में रखती है मुझे,  जरा सा बिगड़ जाऊं तो मशहूर हो जाऊं। ........खान@..

बगैर तैयारी के दीये है जिंदगी के इम्तिहान साहेब।
नतीजे की परवाह होती तो थॉडा सिख सिख के आते।
@खान।
                                           @खान।

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लेकर के मेरा नाम मुझे कोसता तो है,
नफरत ही सही, पर वह मुझे सोचता तो है।
@खान।

अनजाने में तुझसे मुलाकात सी हो गयी दोस्ती करने चले थे और तुझसे चाहत सी हो गयी अपने वजूद में तुझे तलाश करते है, हमे तुमसे मोहब्बत सी हो गयी
@खान।

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ज़लज़ले यूं ही बेसबब नहीं आते,
कोई दीवाना तह-ए-खाक तड़पता होगा।
@खान।

इन आँखो में कैद थे गुनाह ए इश्क कि सजा के बेहिसाब आंसु….
तेरी यादों ने आकर उनकी जमानत कर दी…

बहुत ही नरम ओ नाजुक था मिजाज़ मेरा,
जीते जी खाक में मिलाया गया हूं,
मरीज ये मोहब्ब्त को गुलाब रास कहां,
हमेशा के लिए काटो पे सुलाया गया हूं
@खान।

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एक दिन ये नज़ारा भी देख लेना ज़ालिम
मेरा जनाजा तेरी बरात से अच्छा होगा।
@खान।

मुद्दत का सफर भी था,
ओर बर्षो कि चाहत भी थी,

रुकते तो बिखर जाते,
चलते तो दिल टूट जाते,

यु समझ लो की ……

लगी प्यास गज़ब कि थी,
ओर पानी मे भी ज़हर था,

पीते तो मर जाते,
ओर न पीते तो भी मर जाते।

कितने बरसों का सफर यूँ ही ख़ाक हुआ।
जब उन्होंने कहा “कहो..कैसे आना हुआ ?”
@खान।..

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ज़िन्दगी हर हाल में एक मुकाम माँगती है,
किसी का नाम तो किसी से ईमान माँगती है,
बड़ी हिफाजत से रखना पड़ता है दोस्त इसे,
रूठ जाए तो मौत का सामान माँगती हैं।

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मेरे संस्कारों की चढ़ी चादर थी मुझपे
तेरे एक तरफ़ा प्यार का शिकार हो गयी।

वो भोली सी सूरत थी मेरी, वो आँखों में नमी भी,
होठों पे दबी दबी मुस्कुराहट थी कहीं

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