इंसान क्या है, एक भटका हुआ भगवान। दिल से रचनाकार पर पेशे से केमिस्ट्री टीचर। इंद्रधनुष की तरह हर प्रकार का साहित्य लिखता हूँ। जो अल्फाज किसी से कह नही पाता वो सब लिख देता हूं शिक्षा- M. Sc. Organic chemistry पिछले 4 वर्षों से अध्यापन में सक्रिय।

अपनों से ज्यादा अपनी तू है,
क्या करूँ दुआ जब खुदा तू है

क्या आपने मेरी कथा श्रंखला "वो लड़की" पढ़ी है?? आपको वो कैसी लगी, पसनिन्दा किरदार कौन है, ओर किस हद तक डराने में सफल हुआ इस विषय मे राय दे।

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क्या आपने किसी से प्यार किया है,
क्या आपको लगता है कि आपको अपना प्यार नहीं मिलेगा,
क्या दुनिया और समाज से डर के आप के मन में अपनी लव स्टोरी का गला घोंटने की बात दिमाग मे आ रही है
क्या आप उसकी खुशी के लिए अपनी खुशी को दूर किया है

तब ये कहानी बस आपके लिए ही है,
जरूर पढ़ें और यकीन कीजिये आपको भी मिलेगी *मंजिल प्यार की*
हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'मंजिल प्यार की' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19865906/manzil-pyar-ki

-- Ankit Maharshi

मातृभारती के माध्यम से साझा किया.. https://www.matrubharti.com/bites/111122795

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क्या आपने किसी से प्यार किया है,
क्या आपको लगता है कि आपको अपना प्यार नहीं मिलेगा,
क्या दुनिया और समाज से डर के आप के मन में अपनी लव स्टोरी का गला घोंटने की बात दिमाग मे आ रही है
क्या आप उसकी खुशी के लिए अपनी खुशी को दूर किया है

तब ये कहानी बस आपके लिए ही है,
जरूर पढ़ें और यकीन कीजिये आपको भी मिलेगी *मंजिल प्यार की*
हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'मंजिल प्यार की' पढ़ें
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#kavyotsav

*कैसी सी है वो*
मुझसे भी ज्यादा कुछ मुझसी है वो,
आंखें भिगो देने वाली हंसी के पीछे ,
खुशी सी है वो ।
कोशिश तो की है बहुत बताने की ,
पर कभी बता ना सका ,
कैसी सी है वो, कैसी सी है वो।।




जो महके कुछ उस सा ,
ऐसा कोई फूल नही
उसे कहना अक़्स खुदा का ,
ये भी तो कोई भूल नहीं ।
वैशाख की धूप में ,
सावन की समीर सी है वो
कोशिश तो की है बहुत बताने की,
पर कभी बता न सका
कैसी सी है वो, कैसी सी है वो ।।


जो चढ़ जाए कुछ उस सा,
ऐसा कोई नशा नहीं।
जादू ऐसा चला उसका,
दिल अब मेरा रहा नहीं।
आंखे बंद है फिर भी,
दिखती सूरज सी है वो
कोशिश तो की है बहुत बताने की,
पर कभी बता न सका,
कैसी सी है वो, कैसी सी है वो।।

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ये मेरी पुरानी यादें है जो मेरे रफ रजिस्टर के पन्नो से निकली हैं। अच्छी है या बुरी ये तो आप ही बताएंगे पर मैं तो इसी उम्मीद में लिख रहा हूं कि क्या मालूम ये उस तक पहुंचे जिसके लिए लिखा था।

अंकित महर्षि
anokhaankit123@gmail.com

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