सरकारी बंगले का लान। चार कुर्सियाँ लगी हैं बगल में एक छोटी मेज पर फोन रखा है। बातुल और नायकम बात कर रहे हैं। वे कमाण्डर तथा उनके साथियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।) बातुल- समय तो हो गया। नायकम-हाँ समय तो हो गया। कमाण्डर साहब आते होंगे। बातुल- सरकार सुना है.... नायकम-जो अपने सुना वह सच है। सरकार की नींद हराम हो गई है. .... बातुल- महंगाई और बेरोजगारी से उनकी नींद हराम होना..... नायकम- बात यह नहीं है। उन्हें सबसे अधिक परेशानी जन आन्दोलन को लेकर है। आदमी कुछ भी बरदाश्त नहीं करना चाहता। बातुल- लेकिन मँहगाई और बेरोजगारी होगी तो आन्दोलन होंगे ही.. नायकम- किन्तु ये समस्यायें पहले भी थीं। आदमी को जिस तरह हम चाहते थे हाँक देते थे लेकिन आज......
उन्हें नींद नहीं आती-1-I
उन्हें नींद नहीं आतीपात्र-बातुलनायकमकटियारकमाण्डरमिस राव/बनजाराटोगोमोलईजगरूपमधुकरकिश्नूमटरूकुंजीलाल-------------------------------------अंक- 1(सरकारी बंगले का लान। चार कुर्सियाँ लगी हैं बगल में एक छोटी मेज पर रखा है। बातुल और नायकम बात कर रहे हैं। वे कमाण्डर तथा उनके साथियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।)बातुल- समय तो हो गया।नायकम-हाँ समय तो हो गया। कमाण्डर साहब आते होंगे।बातुल- सरकार सुना है....नायकम-जो अपने सुना वह सच है। सरकार की नींद हराम हो गई है. ....बातुल- महंगाई और बेरोजगारी से उनकी नींद हराम होना.....नायकम- बात यह नहीं है। उन्हें सबसे अधिक परेशानी जन आन्दोलन को लेकर है। आदमी कुछ भी बरदाश्त नहीं करना चाहता।बातुल- लेकिन मँहगाई और बेरोजगारी होगी ...और पढ़े
उन्हें नींद नहीं आती-1-II
बातुल- मि. कटियार तुम तो कहते हो कि देश में गरीबी नहीं है। कोई भूखों नहीं मरता। यहाँ आकर नहीं देखते? फर्जी आंकड़ो से देश नहीं चलता। मोलई की भूख किस किस को डसेगी। जगरूप तुम पानी लाओ। मि.कटियार आकर देखो.....।कटियार-(प्रवेशकर) क्यों चिल्ला रहे हो मि. बातुल?बातुल- तुम्हें दिखाना चाहता हूँ कि देखो इस देश में लोग भूख से मर रहे हैं और तुम कहते हो कि सरकार को चैन से सोने दो।कटियार- इतनी बड़ी आबादी में दो-चार लोग मर ही जायेंगे तो पहाड़ नहीं टूट पडेगा बातुल। सरकार को नींद आनी ही चाहिए।बातुल- ठीक कहते हो इसी सोच ...और पढ़े
उन्हें नींद नहीं आती-3
अंक- 3(स्थान वही, कटियार एक कुर्सी पर ऊँघ रहा है। मटरू दौड़ता हुआ आता है।)मटरू- सरकार?(मटरू थर-थर काँपता है। बार दौड़कर अन्दर झाँककर)सरकार?(कटियार के चारो ओर चक्कर लगाकर)सरकारकटियार- (कुनमुनाते हुए) कौन? मटरू? सोने दो, नींद आ रही है।मटरू- सरकार?कटियार- कह रहा हूँ, नींद आ रही हैमटरू- (थोड़ा तेज किन्तु आर्त्त स्वर में) सरकार?कटियार- (एक थप्पड़ मटरू को जड़ते हुए) क्या है? बोल?मटरू- (एक बार फिर दौड़कर अन्दर झाँकता है।)सरकार....मैं तो मिट गया सरकार!कटियार- हुआ क्या?मटरू- सरकार मेरी झोपड़ी (रोने लगता है।)कटियार- तेरी झोपड़ी?मटरू- हाँ, सरकार।कटियार- (एक थप्पड़ और लगाकर) एक झोपड़ी के लिए सरकार की नींद खराब कर रहा ...और पढ़े
उन्हें नींद नहीं आती-2
अंक- 2(स्थान वही। कटियार और कमाण्डर- का प्रवेश। कटियार एक बोतल में पानी लिए हुए है।)कटियार- (इधर-उधर देखकर) सर, तो मोलई का पता नहीं है।कमाण्डर- यह कैसे हो गया कटियार?कटियार- क्या बताऊँ? मैं तो आपके साथ ही था।कमाण्डर- किसी ने कोई शड्यंत्र किया है। सावधान कटियार! दीवार के भी कान होते हैं।कटियार- तो अब?कमाण्डर- जल्दी तय करो, हमें अब करना क्या है?(कमाण्डर हाथ का रोल घुमाता है। रेडियो से समाचार की पुनरावृत्ति....देश की सीमाओं पर सेना का जमाव। हथियारों और विमानों की खरीद प्रस्तावित। सरकार के स्वास्थ्य के लिए एक व्यक्ति द्वारा प्राण अर्पित, सरकार द्वारा उसके वारिसों को ...और पढ़े