कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए। श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और बहुत संवेदनशील। श्रव्या के हाथ में अपॉइंटमेंट लेटर है। वो एक बड़े और पुराने से ऑफिस बिल्डिंग के सामने खड़ी है — Disney Enterprises. श्रव्या (धीरे से खुद से) बोली - वाह... इतना बड़ा ऑफिस! लेकिन थोड़ा... पुराना सा लग रहा है।

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Honted Jobplace - 1

कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और बहुत संवेदनशील।श्रव्या के हाथ में अपॉइंटमेंट लेटर है। वो एक बड़े और पुराने से ऑफिस बिल्डिंग के सामने खड़ी है —Disney Enterprises.श्रव्या (धीरे से खुद से) बोली -वाह... इतना बड़ा ऑफिस! लेकिन थोड़ा... पुराना सा लग रहा है।वो अंदर जाती है। चारों तरफ शांति है, सिर्फ टाइपिंग की आवाज़ें। रिसेप्शन पर बैठी लड़की उसे ऊपर जाने को कहती है।रिसेप्शनिस्ट बोली -आप मिस्टर कृषांत ठाकुर की team member ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 2

श्रव्या अपनी टेबल पर बैठी है लेकिन उसका मन काम में नहीं है। दिमाग में वही बात घूम रही (सोचते हुए, बैकग्राउंड आवाज़ में) बोली -जब मैंने पहले दिन बिल्डिंग के बाहर से देखा था... तो 9th फ्लोर पर एक लड़की किसी लड़के के साथ खड़ी थी... तो क्या वो प्रिशा थी? और वो लड़का... संतोष?वो खिड़की से ऊपर देखती है, 9th फ्लोर के शीशों पर हल्की सी धूप पड़ रही है। अंदर अंधेरा।श्रव्या (धीरे से खुद से) बोली -मुझे खुद देखना होगा... आखिर इस मंज़िल में ऐसा क्या राज़ है...।घड़ी देखती है — दोपहर का 1:30 बजा है। ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 3

कुछ देर बार फिर शांति छा गई। श्रव्या को देखकर लग रहा था कि अब उसे दुनिया से कोई नहीं। वो अब उस floor को देखकर ही जाएगी।श्रव्या बोली -अब चाहे कुछ भी हो....मैं इस floor को देखकर ही जाऊंगी।धूप की हल्की किरणें शीशे से छनकर कमरे में पड़ रही हैं। हवा में सन्नाटा है , पर एक अजीब-सी मासूमियत भी। श्रव्या खिड़की के पास खड़ी है, आँखें बंद, हवा को महसूस करती हुई। उसके बाल चेहरे पर उड़ते हैं।बैकग्राउंड आवाज़ (श्रव्या के मन की) —ये खामोशी... कितनी सुकूनभरी है... जैसे कोई अपनी कहानी सुना रही हो...अचानक... पीछे से ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 4

कृषांत की आँखों में अंधकार झलकता है। आवाज़ धीमी और भारी है।कृषांत (धीरे-धीरे बोलते हुए) बोला -उस रात... रात ठीक 12 बजे... प्रिशा और संतोष 9th फ्लोर पर थे। वो दोनों उस प्रोजेक्ट की फाइल पर काम कर रहे थे...किसे पता था, कि वो उनकी आख़िरी रात होगी...️ फ्लैशबैक — 3 साल पहलेऑफिस की लाइटें मंद हैं। घड़ी की सूई 12 पर रुकती है।प्रिशा और संतोष कंप्यूटर पर कुछ देख रहे हैं। बाहर हल्की हवा चल रही है।प्रिशा (थोड़ी थकी हुई आवाज़ में) बोली -बस ये रिपोर्ट भेज दो संतोष, फिर चलते हैं... आज बहुत लेट हो गया...।संतोष (हँसते ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 5

9th और 8th floor पर कमरे में हल्की धूल, टूटी हुई खिड़कियाँ, और धूप की किरणें अजीब तरह की डाल रही हैं।श्रव्या खड़ी है — उसके हाथ में प्रिशा, संतोष और स्मिता की फाइलें। उसके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि दृढ़ता और हल्की मुस्कान है।प्रिशा (धीरे, खुद से) बोली -अब तुम्हें शांति मिलेगी। तुम फँसे नहीं रहोगे।मैं... मैं तुम्हें आज़ाद करती हूँ।वो फाइल जमीन पर रखती है। जैसे ही वो ऐसा करती है, कमरे में हवा तेज़ हो जाती है। पुराने पंखे घूमने लगते हैं। दीवारों पर हल्की रोशनी की परछाइयाँ उभरती हैं। प्रिशा, संतोष और स्मिता की परछाइयाँ ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 6

सुबह का समय है, सूरज की रोशनी बिल्डिंग पर पड़ रही है,पर अंदर के माहौल में अब भी एक ठंडक और खामोशी है।श्रव्या लिफ्ट के सामने खड़ी है। हाथ में ऑफिस फाइलें हैं, पर चेहरा उतरा हुआ है। वो बार-बार लिफ्ट की तरफ देखती है — जैसे उसका दिल ऊपर जाने से डर रहा हो।श्रव्या (धीरे, खुद से बड़बड़ाते हुए) बोली -ऊपर नहीं जाऊँगी... बस अपने केबिन तक...ऊपर नहीं... वहाँ अब कोई नहीं है... फिर भी डर लगता है...।लिफ्ट की टिंग की आवाज़ आती है। वो चौंक जाती है।धीरे-धीरे अंदर कदम रखती है, पर 7th फ्लोर का बटन दबाकर ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 7

ऑफिस का मेन गेट। रात के 11:15 बज चुके हैं। बाहर तेज़ हवा चल रही है, बिजली चमक रही कृषांत अपनी गाड़ी से उतरता है, मोबाइल कान से लगाए हुए।कृषांत (फोन पर, गुस्से में) बोला -क्या? तुम लोगों ने उसे ऊपर भेज दिया?!तुम सबको दिमाग नहीं है क्या!वो तेजी से अंदर जाता है। कैमरा उसके पीछे चलता है।ब्रेक रूम का दरवाज़ा खुलता है — अंदर सन्नाटा छा जाता है।श्रव्या के दोस्त — साक्षी, विवेक, अनुज, और कामिनी — सबका चेहरा पीला पड़ा हुआ है।कृषांत (कठोर स्वर में) बोला -कहाँ है श्रव्या?कोई जवाब नहीं देता। साक्षी के हाथ काँप रहे ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 8

ऑफिस का कमरा — रात का समय।श्राव्या अपनी डेस्क पर बैठी है, कंप्यूटर स्क्रीन की हल्की रोशनी उसके चेहरे पड़ रही है। सारी लाइट्स बुझी हैं। बाहर बारिश की हल्की आवाज़ और बिजली की चमक माहौल को डरावना बना रही हैं। श्राव्या कंप्यूटर पर कुछ काम करने की कोशिश कर रही है, पर बार-बार उसका ध्यान 9th फ्लोर की यादों की ओर जाता है।श्राव्या (धीरे से, खुद से) बोली -मैं कैसे वहाँ गई थी...? वो हरी परछाई... मुझे क्यों बुला रही थी?वो अपने हाथों से बालों को सहलाती है, पर एक ठंडी हवा उसके कंधे को छूती है। वो ...और पढ़े

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Honted Jobplace - 9

कुछ दिन बाद — ऑफिस।श्राव्या वापस आ चुकी है, लेकिन पहले जैसी नहीं है। वो हर छोटी आवाज़ पर जाती है। कभी अचानक पीछे मुड़कर देखती है, कभी खाली कुर्सियों को घूरती रहती है। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड पर कांप रही हैं।श्राव्या (धीरे से, खुद से) बोली -वो... अब भी यहीं है... मुझे महसूस होता है...अचानक पीछे से कोई फाइल गिरती है — श्राव्या घबरा जाती है और कुर्सी से उठ जाती है। तभी कृषांत वहाँ आता है। वो तुरंत श्राव्या के पास जाता है।कृषांत (नरमी से) बोला -श्राव्या… रिलैक्स… कुछ नहीं है यहाँ।श्राव्या डर के मारे सीधे उसके पास ...और पढ़े

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