विक्रम के जेल जाने के बाद मेहरा मेंशन के गलियारों में सन्नाटा तो पसर गया था, पर वह सन्नाटा किसी बडे तूफान के आने की आहट था. काम्या मेहरा अपने कमरे की बालकनी में खडी ठंडी हवा के बीच भी गुस्से से तप रही थीं. उनका इकलौता बेटा पुलिस की सलाखों के पीछे था, और कबीर. कबीर उस मामूली फिजियोथैरेपिस्ट के सामने नंगे पैर खडा होकर अपनी गलती मान चुका था ।.एक मामूली डॉक्टर की छोरी ने मेरे बेटे को जेल भिजवा दिया और कबीर उसके आगे भीगी बिल्ली बन गया? नहीं. यह काम्या मेहरा इतनी आसानी से हार नहीं