Ishq ka Ittefaq - 5

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सिया की आँखों से निकले वो गर्म आंसू कबीर के हाथ पर गिरे, तो उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने दहकते हुए अंगारे उसकी हथेली पर रख दिए हों. कमरे में पुलिस बुलाने की बात पर सन्नाटा ऐसा पसरा थाकि बाहर चल रही हवा की सरसराहट भी साफ सुनाई दे रही थी. विक्रम अपनी चाल पर मन ही मन इतना खुश था कि उसकी बाछें खिली जा रही थीं, पर वो अपनी इस कमीनी मुस्कान को कबीर के सामने छुपाने की पूरी कोशिश कर रहा था. कबीर भाई, अब सोच क्या रहे हो?इस चोर लडकी को पुलिस के हवाले करो,