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#हिंदी शायरी#

ट्रिन ट्रिन घंटी बजी, तेज़ी से मेरी धड़कन बढ़ी,
सालों बाद वोह ' हैलो ' सुनी, लगे यादों के मेले !!

मन में गुब्बारे थे, दिलों में फव्वारे थे
सपने बहुत सवारें थे, लगे मस्ती के मेले !!

आंखो ने गिरफ्त किया, बाहों ने कैद किया,
होठों ने गिरफ्तार किया, लगे स्नेह क़ैद के मेले !!

तारों ने शहनाई बजाई, चांदनी बारात ले लाई,
आसमां ने दुआ बरसाई, लगे रंगों के मेले !!

तभी एक आंधी आई, उड़ा के सब प्यार ले गई,
रुसारूसी पे वोह उतर आई, लगे शिकवों के मेले !!

ना हमने मनाया , ना उसने, टुकड़े दिल के हुई छन से,
पर आज तो हमारा एक ' सॉरी', होंगे खुशियों के मेले !!

#hindishayri #

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मनोमंथन :



हल्का हल्का सा दिल मे एह्सास क्यूँ है ..

बुझा बुझा मन और भारी सांस क्यूँ है ?

यूं तो कुछ भी कमी नही है जीन्दगी मे,

फिर भी पता नही दिल थोडा सा उदास क्यूँ है ?



सो के उठना ,उठ के दौडना , दौड के भागना

क्या पता जीन्दगी कि रफ्तार तेज़ क्यूँ है ?

पल भर भी ना रुक पाउ कभी खुद के लिये

दौड रही है बस जीन्दगी , शांति से परहेज क्यूँ है ?



ख़डे पांव काम करु , फिर भी बोस की डपट खाउ ,

उस के टार्गेट पुरे करने का, हम ही शिकार क्यूँ है ?

उन से ना कुछ कह पाउ मैं , मन ही मन झुलस जाउ मैं

घर जा के सब पे उबल जाउ मैं , सहमा सा परिवार क्यूँ है?



सुबह कि गरम चाय मेज पे हमेशा ठन्डी हो जाये

मुझे देख तरसता घर का झूला और अखबार क्यूँ है?

कब देखा मैने सुबह का सूरज, कब देखी ढलती श्याम

ओफिस मे ही दिन रात , ओफिस मे ही संसार क्यूँ है ?



सालो गुजरे , उमर बीती , नौकरी के माया जाल मे ,

ठोकर लगाउ नौकरी को ??? ये सोचना भी पाप क्यूँ है !!!

कब मनाउंगी खुशिया , कब होगा हर लम्हा हसीन

ज़ीयुंगी जरुर अपने लिये एक दिन, ऐसा विश्वास क्यूँ है ?

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एक तो तेरा यूँ दिल में बेरोकटोक घूस जाना ..

फिर अपने हुश्न की अदालत में हमें ही मुजरिम ठहराना..

फैसले सब हमने तो किये मंजूर तुम्हारी आँखों के

पर नॉन-बैलेबल वारंट दे के यूँ तेरा दिल से बहार निकल जाना ...

बहुत नाइंसाफी है ये ... !!!

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एक पल की मुलाकात हुई ,एक पल की मुलाकात हुई
दिल में, मेरे दिल में , मेरे दिल में , कुछ बात हुई !!

मेरी आँखों में , मेरी रातों में, मेरी नींदों में कोई ख्वाब जगा
मेरे होठों पे, मेरी बातों में, मेरे गीतों में कोई आन बसा
मेरे दिल में झन-झनकार हुई, मैं तो खुद से ही अंजान हुई !
एक पल की ....

मेरे दिन नये, मेरी रात नयी, मेरे बातों में बस बात तू ही
मेरे गीत नए, आवाज़ नयी, मेरे प्यार का बस एक साज तू ही
मेरे गुलशन में बहार हुई , तेरे प्यार की रस-बरसात हुई !
एक पल की ....

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रूमानी

आओ थोड़ा थोड़ा सा रूमानी हो जाएँ !
साथ चलें, प्यार करें,एक-दूजे में खो जाएँ, बस खो जाएँ !!

पलभर को आओं, दुनिया को भूलें
पलभर को आओं, खुशियाँ बटोरें
पलभर को अपनी यादे संजो लें
देखें मीठे सपने और सो जाएँ , सो जाएँ !
आओ थोड़ा थोड़ा सा रूमानी हो जाएँ !!

सागर की लहरों से लहरायें
उड़ते पंछी से पंख पायें
अम्बर पे बादल से मिल आयें
प्यार की मीठी मदहोशी में खो जायें, खो जाएँ!
आओ थोड़ा थोड़ा सा रूमानी हो जाएँ !!

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ये आज कल के बच्चे
पूरी रात जागे और आधा दिन सोयें अपने में ही मस्त और खुद ही में खोयें
लड्डु पेडे देखें तो मुँह बिचकायें पीत्ज़ा बर्गर पास्ता दो, तो खुशी खुशी खायें
बडे भाई बहन के कपडें हाथ भी ना लगायें ब्रांडॆड कपड़ों बिना पल भी ना चलायें
मोम-डॆड को बर्थडे विश करना ही भूल जायें दोस्तों की बर्थडे केक रात बारह बजे ही खायें
मैदान में जा के खेलना किसे सुहायें टीवी, नेट और मोबाइल में ही दुनिया बसायें
बस मौज मस्ती मूवीज़ और पार्टीज़ ही भाये कल की न कोई टेंशन मस्त लाइफ जीये जायें
पर सच पूछें तो यही बच्चे
बचपन से ही भारी दफ्तर का बोज़ उठायें बिना फरियाद स्कूल हंसते-खेलते जायें
स्कूल से ही सीधा ट्य़ूशन में जायें स्विमिंग, स्केटिंग, डांसिंग भी साथ साथ सीख जायें
मोबाइल टीवी के ज़माने में भी अच्छे मार्क्स लायें फोकस दिमाग से सही करीयर पायें
दोस्तों को मदद करने में जरा भी ना देर लगायें बिना स्वार्थ के सब का साथ निभायें
किसी से ना डरें, बोस को भी धमकायें अच्छी भली नौकरी छोडने में जरा भी ना घबरायें
आगे जा के, यही बच्चे देश को आगे बढायें बडों कि है यही आशिष यही शुभकामनाएं

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