Hey, I am on Matrubharti!

रखकर जेब मे तहेजीब लोग घुम रहे है |
" आजकल "
हस ने की भी वजह लोग ढूंढ़ रहे है |
"आजकल "
रोना चाहे तो रो भी नहीं पाते . |
"आजकल "
आँशु ओ मे भी मिलावट हो रही है |
"आजकल "
रिश्तों की क्या बात करें अब |
" आजकल "
पल दो पल मे बदल जा रहे है |
"आजकल "
कागज की नैया बनती रही खिलोनो सी अबतक
अब रिश्ते कागज के बन रहे है |
"आजकल "

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जनाजे पे लें जाओ हमको.. |
मगर किताबों मे दफनाओ.. |
न रुख़सत करो समशान मे. |
न भष्मी भुत करो.. |
राख बन जायेंगे तो, |
खाख रहे जायेंगे, |
करो रोशन हमको की, हम |
शब्द बन जायेंगे... |
हर वो लब्ज पे हम ढहेरेंगे..|
जो किताबों पे मरते है |
कौन कहेता है .. अमर कोई नहीं होता |
आगे सदियों तक..हम पन्नों पर जिये जायेंगे.. |

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कही रित्त होंगी |
कही प्रीत होंगी |
कही दिखावे की जीत होंगी |
मिल न सकेगी तुझे तेरी मंजिल,
जब तक सीने मे ज्वाला न होंगी |
कही मस्ती होंगी |
कही मंजिल होंगी |
कही खुद की परछाईया होंगी |
अंधेरो से निकल के.. तू आगे चल |
कही ना कही तो रौशनी होंगी |

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यशोदा तेरी वाट निहारे |
कान्हा अब तू कब आवे |
हवाओ मे है जोरो की हलचल |
बादल बरसे है खुलके गगन |
तेरी राह निहारे.. सृष्टि के जीवल.. |
तेरी राह निहारे रँग उपवन |
नदिया भी अब तो.. बहेरहीहे.. थनगन सी |
बावरी बनी है वो भी कान्हा की |
तू क्यू इतनी देर लगाये |
तेरी वाट मे अब तो शिव शम्भू भी आये |
तेरी वाट मे अब तो जगदम्बा भी आये |
फिर तू क्यू इतनी देर लगाये..
फिर तू क्यू इतनी देर लगाये |
तेरी लीला कोई न जाने.. |
तेरी लीला सिर्फ तू ही जाने |

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कान्हा तेरी बासुरी पुकारे मुझे |
तेरी राधा सुनके बलखाये. |
चितवन मे चहेकके.. मुज अखियन मे बहेक के |
तू क्यू करता है बावली मुझको |
मेरा रोम रोम पिघलता है |
तेरी बासुरी मे है कई साज़.. |
जैसे दे रहे हो मुझको आवाज़.. |
तड़पता है मुझको तू |
नींद से जगाता है |
नींद आधी, बात आधी |
फिर तू क्यू हृदय मे अगन लगाके |
अनजाना बन जाता है |
तेरी राधा तड़पे मिलन की अगन मे |
तू देखके मुझको मरके के मुख मन मे |
ये तेरी कैसी रीत है?? "ओ कान्हा "
ये कैसी तेरी प्रीत है.. |
कान्हा तेरी बासुरी पुकारे मुझे.. ||

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कही देर न हो जाये |
कही देर न हो जाये |
परदेश गये हो बरसो से |
यु दूर गये हो नज़रो से |
अब नज़रे भी कम हो रही है.. |
तेरी सुरत भी आंखो से ओजल हो रही है |
अब तो आजा एक बार.. अपने देश |
अब बहुत रहे लिया.. विदेश |
कही थम न जाये सासों की लड़िया |
तुझे याद कर रही है तेरी खिलोने की गुड़िया |
बचपन बिता, हाथो से खिलौना छूटा
जवानी बीती, तेरी हर कहानी मिट्टी
बस गया परदेश.. तू
लगा गया हर दिल को ठेस तू...
छूट रहे है.. हर मुकाम...
तेरी सब यादें हो रही है तमाम |
न रही हाथो मे यारियां..
न रही दिलदारियां.. |
तेरी आहट से होती थी किलकारियां..
वो अब बन गयी पुरानी कहानियाँ..|
आखिर क्या है.. तेरी मजबूरियां.. तेरी मजबूरियां...
कही देर न हो जाये |
कही देर न हो जाये !!!!

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शहर शहर |
डगर डगर |
निकलू मे जिधऱ जिधऱ |
देखी मैंने व्यापारी, |
मानव के अंदर, |
न रही मानवता |
न रही करुणा, |
बस भूख भरी है,
पैसो की जहन के अंदर |
माँगा पानी तो पैसा माँगा |
जगा क्या मांगी बैठने की. तो,
किराया माँगा |
खाने की क्या बात करें अब उनसे |
वे खुद थे बेचारे पैसो के भूखे |
सोच रहे होंगे खुदको कामयाब |
मुख मे यु मरक मरक कर
हालत उनकी थी मेरे से बद्त्तर |
बस कपड़ो से रखी थी इज्जत ढ़ककर |
सही है !!!! तू व्यापार ही कर.. व्यापार ही कर |
इज्जत देना किसीको
नहीं है अब तेरे करम |
तू व्यापार कर.. व्यापार कर.. !!!
Alpa mehta

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ऐ बादल तू अब जमके बरस |
ऐ बादल तू अब जमके बरस |
खेतो मे है सूखे पड़े हुए l
महीनों से है ये बंजर बने हुए |
सर पर हाथ धरे किशान अब बैठे हुए |
लाचारी से आधे प्राण त्यजे हुए |
न कर अब तू भी सितम
ये है पहले से सताये हुए |
बिन तेरे अब जिये किस के सहारे |
तू ही बतलादे अब जाये तो जाये कहा ये |
बच्चे घर मे भूखे बैठे हुए |
तन पर कपडे आधे ढके हुए |
भूख उनकी भी रोटी को तरसे |
आंखे उनकी भी बादल सी बरसे |
ये बेबसी के नज़ारे , ये बेबसी के नज़ारे |
जरा देख भी ले इस ओर ये सब है तुम्हारे |
ऐ बादल जरा जमके बरस |
ऐ बादल जरा जमके बरस |

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जागो मोहन प्यारे |
पधारो मोरे अंगना नीस दिन सारे |
तेरे बिन अब ना मोरे सांज सबेरे |
प्रीत संग तारे ऐसी लागी |
न मेरे मन को अब कोई भाये |
जागो मोहन प्यारे |
तुज संग खेलु मे मन की होली |
रंग दे तू चाहे मुज नैनन की चोली
प्रीत ऐसी बाँधी तुज संग मोरी
तेरे बिन अब तो ये मोरी काया अधूरी |
जग की सारी माया अधूरी |
जागो मोहन प्यारे |
चितवन मे अब तो तोहरे दर्शन |
मांगू ना अब मे दूजा दर्पन
तू क्यू खेले आँख मिचोली |
मेरे संग खेले क्यू ये ठिठोली |
अब तो नीर बहे अखियन से |
रुके न ये अब बिन तोरे दरस के..
देर न कर अब , बस भी कर |
तू आजा शावले अब प्रीत मुझसे भी थोड़ी कर |
जागो मोहन प्यारे |
जागो मोहन प्यारे |

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मौसम बदल रहा है |
दिलो की दूरिया जैसे मिलो के फासले ,
आसपास हो फ़िरभी जैसे बदलते रास्ते ,
मौसम वाकई बदल रहा है |
जो पेड़ पौधो पर थे हरे सुनहरे पते ,
आज जैसे हो बिखरे बिखरे
डाली डाली थी जैसे हरियाली |
प्रेम की भी अब अधूरी प्याली |
मधुबन जैसे काँटों की चुभन |
दिलो मे जैसे कोई अगन |
बिता जाये युही वक़्त का सफर |
न मिले मंजिल ना बहारे चमन |
मौसम बदल रहा है |
मौसम बदल रहा है |

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